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घटिया दवाओं पर केंद्र का बड़ा फैसला: NSQ पाए जाने पर तत्काल निलंबित होगा निर्माण लाइसेंस

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घटिया दवाओं पर केंद्र का बड़ा फैसला: NSQ पाए जाने पर तत्काल निलंबित होगा निर्माण लाइसेंस

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है — NSQ पाई गई दवाओं का निर्माण लाइसेंस अब बिना लंबी प्रक्रिया के तुरंत निलंबित होगा। रूट कॉज एनालिसिस और CAPA लागू करने के बाद ही लाइसेंस बहाल होगा। यह कदम दवा-नियामक तंत्र की सबसे बड़ी खामी — 'कार्रवाई में देरी' — को सीधे दूर करता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए अधिसूचित किया।
NSQ (मानक गुणवत्ता वाली नहीं) घोषित दवाओं का निर्माण लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जा सकेगा — 'कारण बताओ नोटिस' की प्रतीक्षा के बिना।
निलंबन हटाने के लिए निर्माता को रूट कॉज एनालिसिस और CAPA लागू कर लाइसेंसिंग अथॉरिटी से सत्यापन कराना होगा।
फॉर्म 13 में संशोधन के तहत टेस्ट रिपोर्ट अब DCGI , राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी और निर्माता — तीनों को एक साथ भेजी जाएगी।
हितधारक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर आपत्तियाँ और सुझाव भेज सकते हैं।
यह प्रस्ताव ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी की 65वीं बैठक (20 दिसंबर 2024) और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 92वीं बैठक (24 अप्रैल 2025) की सिफारिशों पर आधारित है।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत किसी दवा के 'मानक गुणवत्ता वाली नहीं' (NSQ) पाए जाने पर उसका निर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा सकेगा। यह प्रस्ताव सार्वजनिक परामर्श के लिए अधिसूचित कर दिया गया है और हितधारक भारत के राजपत्र में मसौदा नियमों के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियाँ और सुझाव भेज सकते हैं। यह कदम देश में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता पर जनता का भरोसा बहाल करने की दिशा में एक निर्णायक नियामक हस्तक्षेप माना जा रहा है।

मौजूदा नियमों में क्या है कमी

वर्तमान व्यवस्था में किसी निर्माण लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने से पहले एक निर्धारित नियामक प्रक्रिया अपनानी होती है, जिसमें 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण दवा को NSQ घोषित करने और उसके विरुद्ध कार्रवाई शुरू होने के बीच एक खतरनाक अंतराल बन जाता है।

इस दौरान घटिया दवा बाज़ार में बनी रह सकती है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम होता है और ऐसी दवाओं को वापस मँगाना भी कठिन हो जाता है। गौरतलब है कि यह समस्या वर्षों से विशेषज्ञों और नियामक निकायों के लिए चिंता का विषय रही है।

प्रस्तावित संशोधन में क्या है नया

नए प्रावधान के अनुसार, यदि सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में कोई दवा 'एसे', 'डिसोल्यूशन', 'संबंधित पदार्थों', 'अशुद्धियों' या 'स्टेरिलिटी' के महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर NSQ पाई जाती है, तो केंद्रीय लाइसेंसिंग अनुमोदन प्राधिकरण अथवा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण उस दवा का निर्माण लाइसेंस तुरंत निलंबित कर सकेंगे।

यह व्यवस्था नियामकों को बिना किसी देरी के हस्तक्षेप करने का अधिकार देती है, जो पहले नहीं था। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पाँचों मानक दवाओं की प्रभावकारिता और सुरक्षा के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

निलंबन हटाने के लिए क्या करना होगा

प्रस्तावित संशोधन के तहत निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक निर्माता 'रूट कॉज एनालिसिस' (मूल कारण विश्लेषण) नहीं कर लेता और 'सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई' (CAPA) लागू नहीं कर देता। इन उपायों का संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा उचित सत्यापन होने के बाद ही लाइसेंस बहाल किया जा सकेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में घटिया और नकली दवाओं की शिकायतें बढ़ रही हैं और पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारतीय दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा चुके हैं।

नियामक समन्वय होगा मज़बूत

नियामक तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए 'फॉर्म 13' में भी संशोधन प्रस्तावित है। इसके तहत सरकारी विश्लेषक की टेस्ट रिपोर्ट अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की लाइसेंसिंग अथॉरिटी और दवा के निर्माता व मार्केटर — तीनों को एक साथ भेजी जाएगी।

इससे सूचना का प्रवाह तेज़ होगा और नियामक कार्रवाई में बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा। आलोचकों का कहना है कि इससे पहले सूचना के विभाजित प्रवाह के कारण कार्रवाई में अनावश्यक विलंब होता था।

किन सिफारिशों पर आधारित हैं ये संशोधन

ये प्रस्तावित संशोधन 20 दिसंबर 2024 को आयोजित ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी की 65वीं बैठक और 24 अप्रैल 2025 को हुई ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 92वीं बैठक की सिफारिशों पर आधारित हैं। इन दोनों निकायों ने दवाओं की बिक्री-पश्चात नियामक निगरानी को सशक्त बनाने की ज़रूरत पर बल दिया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये संशोधन अंतिम रूप ले लेते हैं, तो घटिया दवाओं के खिलाफ समय पर कार्रवाई संभव होगी और देश में दवाओं की गुणवत्ता पर जनता का भरोसा और मज़बूत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। भारत में राज्य-स्तरीय दवा नियामक तंत्र की क्षमता और जनशक्ति पहले से ही सीमित है — केंद्रीय अधिकार मिलने से कुछ नहीं होगा यदि राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटियाँ वास्तविक समय में सरकारी विश्लेषक रिपोर्टों पर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, यह प्रस्ताव केवल पाँच तकनीकी मानकों तक सीमित है — जबकि दवाओं की गुणवत्ता की व्यापक परिभाषा इससे कहीं आगे जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या CAPA सत्यापन प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी, या यह पुराने 'कारण बताओ नोटिस' जैसी ही एक और लंबी प्रतीक्षा बन जाएगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSQ दवा क्या होती है और इसे कैसे पहचाना जाता है?
NSQ यानी 'Not of Standard Quality' — ऐसी दवाएँ जो सरकारी विश्लेषक की जाँच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। इनकी पहचान 'एसे', 'डिसोल्यूशन', 'संबंधित पदार्थों', 'अशुद्धियों' या 'स्टेरिलिटी' जैसे महत्वपूर्ण परीक्षणों के ज़रिए होती है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया क्या होगी?
सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में NSQ पाई जाने पर केंद्रीय लाइसेंसिंग अनुमोदन प्राधिकरण या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण निर्माण लाइसेंस तत्काल निलंबित कर सकेंगे। पहले की तरह 'कारण बताओ नोटिस' की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।
निलंबित लाइसेंस बहाल कराने के लिए निर्माता को क्या करना होगा?
निर्माता को सबसे पहले 'रूट कॉज एनालिसिस' यानी गुणवत्ता में कमी के मूल कारणों की पहचान करनी होगी और फिर 'CAPA' (सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई) लागू करनी होगी। लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा इन उपायों का उचित सत्यापन होने के बाद ही लाइसेंस बहाल किया जाएगा।
इस प्रस्ताव पर अपनी राय कब तक और कहाँ भेज सकते हैं?
हितधारक और आम नागरिक भारत के राजपत्र में मसौदा नियमों के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियाँ और सुझाव केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को भेज सकते हैं।
यह संशोधन किन विशेषज्ञ बैठकों की सिफारिशों पर आधारित है?
यह प्रस्ताव 20 दिसंबर 2024 को हुई ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी की 65वीं बैठक और 24 अप्रैल 2025 को हुई ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 92वीं बैठक की सिफारिशों पर आधारित है। दोनों निकायों ने दवाओं की बिक्री-पश्चात नियामक निगरानी को सशक्त बनाने की सिफारिश की थी।
राष्ट्र प्रेस
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