घटिया दवाओं पर केंद्र का बड़ा फैसला: NSQ पाए जाने पर तत्काल निलंबित होगा निर्माण लाइसेंस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत किसी दवा के 'मानक गुणवत्ता वाली नहीं' (NSQ) पाए जाने पर उसका निर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा सकेगा। यह प्रस्ताव सार्वजनिक परामर्श के लिए अधिसूचित कर दिया गया है और हितधारक भारत के राजपत्र में मसौदा नियमों के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियाँ और सुझाव भेज सकते हैं। यह कदम देश में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता पर जनता का भरोसा बहाल करने की दिशा में एक निर्णायक नियामक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
मौजूदा नियमों में क्या है कमी
वर्तमान व्यवस्था में किसी निर्माण लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने से पहले एक निर्धारित नियामक प्रक्रिया अपनानी होती है, जिसमें 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण दवा को NSQ घोषित करने और उसके विरुद्ध कार्रवाई शुरू होने के बीच एक खतरनाक अंतराल बन जाता है।
इस दौरान घटिया दवा बाज़ार में बनी रह सकती है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम होता है और ऐसी दवाओं को वापस मँगाना भी कठिन हो जाता है। गौरतलब है कि यह समस्या वर्षों से विशेषज्ञों और नियामक निकायों के लिए चिंता का विषय रही है।
प्रस्तावित संशोधन में क्या है नया
नए प्रावधान के अनुसार, यदि सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में कोई दवा 'एसे', 'डिसोल्यूशन', 'संबंधित पदार्थों', 'अशुद्धियों' या 'स्टेरिलिटी' के महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर NSQ पाई जाती है, तो केंद्रीय लाइसेंसिंग अनुमोदन प्राधिकरण अथवा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण उस दवा का निर्माण लाइसेंस तुरंत निलंबित कर सकेंगे।
यह व्यवस्था नियामकों को बिना किसी देरी के हस्तक्षेप करने का अधिकार देती है, जो पहले नहीं था। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पाँचों मानक दवाओं की प्रभावकारिता और सुरक्षा के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
निलंबन हटाने के लिए क्या करना होगा
प्रस्तावित संशोधन के तहत निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक निर्माता 'रूट कॉज एनालिसिस' (मूल कारण विश्लेषण) नहीं कर लेता और 'सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई' (CAPA) लागू नहीं कर देता। इन उपायों का संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा उचित सत्यापन होने के बाद ही लाइसेंस बहाल किया जा सकेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में घटिया और नकली दवाओं की शिकायतें बढ़ रही हैं और पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारतीय दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा चुके हैं।
नियामक समन्वय होगा मज़बूत
नियामक तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए 'फॉर्म 13' में भी संशोधन प्रस्तावित है। इसके तहत सरकारी विश्लेषक की टेस्ट रिपोर्ट अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की लाइसेंसिंग अथॉरिटी और दवा के निर्माता व मार्केटर — तीनों को एक साथ भेजी जाएगी।
इससे सूचना का प्रवाह तेज़ होगा और नियामक कार्रवाई में बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा। आलोचकों का कहना है कि इससे पहले सूचना के विभाजित प्रवाह के कारण कार्रवाई में अनावश्यक विलंब होता था।
किन सिफारिशों पर आधारित हैं ये संशोधन
ये प्रस्तावित संशोधन 20 दिसंबर 2024 को आयोजित ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी की 65वीं बैठक और 24 अप्रैल 2025 को हुई ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की 92वीं बैठक की सिफारिशों पर आधारित हैं। इन दोनों निकायों ने दवाओं की बिक्री-पश्चात नियामक निगरानी को सशक्त बनाने की ज़रूरत पर बल दिया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये संशोधन अंतिम रूप ले लेते हैं, तो घटिया दवाओं के खिलाफ समय पर कार्रवाई संभव होगी और देश में दवाओं की गुणवत्ता पर जनता का भरोसा और मज़बूत होगा।