2 अक्टूबर 2026
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ओडिशा में 'शिशु श्रम मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान शुरू, 44 दिन चलेगा राज्यव्यापी जागरूकता अभियान

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ओडिशा में 'शिशु श्रम मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान शुरू, 44 दिन चलेगा राज्यव्यापी जागरूकता अभियान

सारांश

गांधी जयंती पर ओडिशा सरकार ने 'शिशु श्रम मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान छेड़ा — 44 दिन, हर पंचायत, सामूहिक जागरूकता। लेकिन असली चुनौती यह है कि राज्य में बाल श्रम का आखिरी व्यापक सर्वे 1997 में हुआ था, जब 2,15,222 बाल श्रमिक मिले थे।

मुख्य बातें

ओडिशा सरकार ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती पर 'शिशु श्रम मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान लॉन्च किया।
अभियान 44 दिनों तक राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में चलेगा।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वीडियो संदेश के ज़रिये अभियान का उद्घाटन किया और इसे सामूहिक दायित्व बताया।
राज्य में बाल श्रम का आखिरी व्यापक सर्वे 1997 में हुआ था, जिसमें 2,15,222 बाल श्रमिक पाए गए थे।
ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार, 1997 के बाद कोई व्यवस्थित राज्यव्यापी सर्वे नहीं हुआ।

ओडिशा सरकार ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर 'शिशु श्रम मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान का शुभारंभ किया, जो राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में 44 दिनों तक चलेगा और जिसका लक्ष्य ओडिशा को बाल श्रम की समस्या से पूरी तरह मुक्त करना है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से इस अभियान का उद्घाटन किया और राज्य की जनता से इसमें सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

अभियान का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री माझी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो बच्चों और किशोरों को शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित करती है। उन्होंने कहा, 'हमारे समाज को बाल श्रम जैसी बुरी प्रथा से मुक्त करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक दायित्व है।' यह अभियान लोगों में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ बाल श्रम उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री का विज़न: 'समृद्ध ओडिशा'

माझी ने जोर देते हुए कहा कि बच्चों का समग्र विकास 'समृद्ध ओडिशा' के लक्ष्य को हासिल करने की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने कहा, 'आइए, हम सभी मिलकर बाल श्रम मुक्त ओडिशा के निर्माण के लिए काम करें, जहाँ हर बच्चा सपने देख सके और उन सपनों को पूरा करने के लिए उसे सक्षम बनाया जा सके।' गांधी जयंती पर इस संकल्प की शुरुआत को राज्य सरकार ने प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया है।

ज़मीनी आँकड़ों की चुनौती

गौरतलब है कि ओडिशा में बाल श्रम को लेकर आखिरी विशेष राज्यव्यापी सर्वे 1997 में किया गया था, जिसमें राज्य में 2,15,222 बाल श्रमिकों की पहचान की गई थी। ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार, उस सर्वे के बाद राज्य में बाल श्रम को लेकर कोई व्यवस्थित राज्यव्यापी सर्वे नहीं किया गया है। यह तथ्य इस बात को रेखांकित करता है कि जमीनी स्तर पर बाल श्रम की वर्तमान स्थिति को लेकर सटीक डेटा का अभाव है।

अभियान का दायरा और जन-भागीदारी

यह 44 दिवसीय अभियान ओडिशा की प्रत्येक ग्राम पंचायत तक पहुँचेगा और स्थानीय समुदायों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा नागरिक समाज को एक साझे मंच पर लाने की कोशिश करेगा। अभियान का स्वरूप जागरूकता-केंद्रित है, जो यह स्पष्ट करता है कि सरकार केवल प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय सामाजिक चेतना को बाल श्रम उन्मूलन का प्राथमिक हथियार मान रही है।

आगे की राह

यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया गया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। अभियान की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य में अद्यतन सर्वे के आधार पर कितनी ठोस नीतिगत पहल की जाती है और पंचायत स्तर पर जागरूकता को व्यावहारिक परिणामों में कैसे बदला जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जागरूकता अभियान बिना अद्यतन डेटा के कितना कारगर होगा — राज्य में आखिरी बाल श्रम सर्वे करीब तीन दशक पुराना है। बिना वर्तमान आँकड़ों के न तो समस्या की सही सीमा पता है, न लक्षित हस्तक्षेप संभव है। ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की यह स्वीकृति कि 1997 के बाद कोई व्यवस्थित सर्वे नहीं हुआ, खुद अभियान की सीमा उजागर करती है। जब तक सर्वे और जागरूकता साथ-साथ नहीं चलते, यह अभियान भावनात्मक तो होगा, पर मापने योग्य बदलाव की गारंटी नहीं देगा।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'शिशु श्रम मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान क्या है?
यह ओडिशा सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2026 को शुरू किया गया 44 दिवसीय राज्यव्यापी जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत को बाल श्रम से मुक्त बनाना है। यह अभियान लोगों में जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।
ओडिशा में बाल श्रमिकों की संख्या कितनी है?
ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार, राज्य में बाल श्रम का आखिरी व्यवस्थित सर्वे 1997 में हुआ था, जिसमें 2,15,222 बाल श्रमिकों की पहचान की गई थी। उसके बाद कोई राज्यव्यापी सर्वे नहीं हुआ, इसलिए वर्तमान आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अभियान के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री माझी ने वीडियो संदेश में कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है जो बच्चों को शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित करती है। उन्होंने इसे केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया और जनता से अभियान में जुड़ने की अपील की।
यह अभियान गांधी जयंती पर ही क्यों शुरू किया गया?
राज्य सरकार ने गांधी जयंती के अवसर पर इस अभियान की शुरुआत को प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि महात्मा गांधी बच्चों की शिक्षा और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक थे। सरकार ने इस दिन को बाल श्रम मुक्त ओडिशा के संकल्प के लिए उचित अवसर माना।
अभियान की सफलता कैसे मापी जाएगी?
अभियान मुख्यतः जागरूकता-केंद्रित है और इसमें पंचायत स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। हालाँकि, चूँकि 1997 के बाद कोई व्यवस्थित सर्वे नहीं हुआ है, अभियान के ठोस परिणामों को मापने के लिए अद्यतन डेटा संग्रह जरूरी होगा।
राष्ट्र प्रेस
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