ओडिशा के कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु भेजा गया, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा

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ओडिशा के कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु भेजा गया, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा

सारांश

ओडिशा में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजा है। इसे 'रिसॉर्ट राजनीति' के तहत देखा जा रहा है, ताकि क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को कम किया जा सके। जानिए इस कदम के पीछे के कारण।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु भेजा है।
क्रॉस वोटिंग की आशंका को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया।
बीजेडी ने शांतनु मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है।
राज्यसभा चुनाव में कई दलों की भागीदारी है।
रिसॉर्ट राजनीति के माध्यम से विधायकों को एकजुट रखा जा रहा है।

बेंगलुरु, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के आगामी राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की चिंताओं के मद्देनजर, कांग्रेस पार्टी ने अपने विधायकों को बेंगलुरु में स्थानांतरित करने का फैसला लिया है। इसे "रिसॉर्ट राजनीति" के तहत अपने विधायकों को एकजुट रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस के सूत्रों ने शुक्रवार को यह पुष्टि की कि विधायकों को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार की निगरानी में बेंगलुरु लाया गया है। विधायक और पार्टी नेता गुरुवार रात को इंडिगो की फ्लाइट से भुवनेश्वर से बेंगलुरु पहुंचे।

वे गुरुवार रात लगभग ११ बजे केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां शिवकुमार के करीबी सहयोगियों ने उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे से विधायकों को पुलिस सुरक्षा में सीधे रामनगर जिले के बिदादी स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया।

यहां विधायकों के ठहरने की व्यवस्था वंडरला रिसॉर्ट में की गई है, जहां उनके लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस समूह में विधायक मंगू खिला, अप्पाला स्वामी, राजन एक्का और अशोक कुमार शामिल हैं। पार्टी के ओडिशा प्रमुख और पूर्व सांसद भक्त चरण दास तथा प्रवक्ता दुर्गा प्रसाद पांडा भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। ओडिशा से लगभग १४ कांग्रेस नेता बेंगलुरु पहुंच चुके हैं।

कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के दौरान संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर चिंताओं के मद्देनजर विधायकों को ओडिशा से बाहर भेजने का निर्णय लिया गया है। यह कदम भाजपा के कथित "ऑपरेशन लोटस" का मुकाबला करने के उद्देश्य से भी उठाया गया है।

ओडिशा विधानसभा में १४७ सदस्य हैं, जिसमें भाजपा को वर्तमान में ७९ विधायकों का समर्थन प्राप्त है जबकि बीजू जनता दल (बीजेडी) के पास ५० सीटें और कांग्रेस के पास १४ विधायक हैं।

बीजेडी ने शांतनु मिश्रा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार नामित किया है और दत्तेश्वर होता को राज्यसभा की चौथी सीट के लिए सामान्य उम्मीदवार के रूप में उतारा है, जिनकी उम्मीदवारी को कांग्रेस ने समर्थन दिया है।

दूसरी ओर, भाजपा ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय का भी समर्थन किया है।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, चौथी सीट पर मुकाबला क्रॉस वोटिंग पर निर्भर हो सकता है। दत्तेश्वर होता की जीत कांग्रेस विधायकों के समर्थन पर निर्भर करेगी जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को जीत हासिल करने के लिए विपक्षी दलों के कम से कम आठ विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

गौरतलब है कि क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के मद्देनजर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने इससे पहले महाराष्ट्र और गुजरात के विधायकों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में स्थानांतरित किया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि भाजपा के संभावित प्रभाव को कम किया जा सके। यह राजनीति की एक नई परत को उजागर करता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु क्यों भेजा?
कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु भेजा ताकि राज्यसभा चुनाव में संभावित क्रॉस वोटिंग से बचा जा सके।
रिसॉर्ट राजनीति क्या है?
रिसॉर्ट राजनीति का मतलब है विधायकों को एक स्थान पर एकजुट रखना ताकि वे पार्टी के साथ रहें और अन्य दलों के प्रभाव से बच सकें।
बीजेडी ने किसे अपना उम्मीदवार बनाया है?
बीजेडी ने शांतनु मिश्रा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार नामित किया है।
राज्यसभा चुनाव में कौन-कौन से दल भाग ले रहे हैं?
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और बीजेडी सहित कई दल भाग ले रहे हैं।
क्रॉस वोटिंग क्या होती है?
क्रॉस वोटिंग का मतलब है कि विधायकों द्वारा अपने दल के विपरीत वोट डालना।
राष्ट्र प्रेस
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