22 जुलाई 2026
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ओडिशा डीजीपी खुरानिया की चेतावनी: उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने को अंतरराज्यीय तालमेल अनिवार्य

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ओडिशा डीजीपी खुरानिया की चेतावनी: उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने को अंतरराज्यीय तालमेल अनिवार्य

सारांश

पूर्वी भारत के पाँच राज्यों के डीजीपी एक मेज पर बैठे — और संदेश साफ था: साइबर अपराध, मादक तस्करी और वामपंथी उग्रवाद जैसे खतरे अब राज्य की सीमाएँ नहीं मानते। ओडिशा डीजीपी खुरानिया ने भुवनेश्वर में कहा कि अकेले लड़ना अब विकल्प नहीं — संयुक्त खुफिया और तकनीक-आधारित रणनीति ही रास्ता है।

मुख्य बातें

ओडिशा डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने भुवनेश्वर में ईस्टर्न रीजनल पुलिस कोऑर्डिनेशन कमेटी 2026 की अध्यक्षता की।
बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड के डीजीपी व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारी शामिल हुए।
संगठित अपराध, साइबर अपराध, मादक तस्करी, मानव तस्करी और वामपंथी उग्रवाद पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा हुई।
जीरो एफआईआर का समयबद्ध हस्तांतरण, रेलवे सुरक्षा और अवैध घुसपैठ से निपटने के उपाय भी एजेंडे में रहे।
बैठक केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित की गई।

ओडिशा के पुलिस महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया ने 22 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में स्पष्ट किया कि संगठित अपराध, साइबर अपराध और वामपंथी उग्रवाद जैसे आधुनिक सुरक्षा खतरे किसी एक राज्य की सीमा में नहीं रहते, इसलिए इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतरराज्यीय समन्वय, आधुनिक तकनीक और खुफिया-आधारित संयुक्त रणनीति अपरिहार्य है। उन्होंने ईस्टर्न रीजनल पुलिस कोऑर्डिनेशन कमेटी 2026 की उच्चस्तरीय बैठक के उद्घाटन सत्र में यह बात कही, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित की गई थी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

ओडिशा डीजीपी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, केंद्रीय पुलिस संगठनों और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। यह बैठक पूर्वी भारत के राज्यों के बीच सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखी जा रही है।

खुरानिया ने गृह मंत्रालय का आभार व्यक्त किया कि इस क्षेत्रीय समन्वय बैठक की मेजबानी की जिम्मेदारी ओडिशा पुलिस को सौंपी गई। उन्होंने कहा कि ऐसे साझा मंच पुलिस एजेंसियों के बीच आपसी विश्वास और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मुख्य सुरक्षा चुनौतियाँ जो उठाई गईं

खुरानिया ने रेखांकित किया कि मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौतियाँ बहु-राज्यीय प्रकृति की हैं। उन्होंने लगातार खुफिया जानकारी साझा करने, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और आधुनिक तकनीक के उपयोग को समय की माँग बताया। उनके अनुसार, कोई भी राज्य अकेले इन खतरों का सामना करने में सक्षम नहीं है।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

आधिकारिक बयान के अनुसार, दिनभर चली इस बैठक में कई रणनीतिक विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

आत्मसमर्पित वामपंथी उग्रवादियों की निगरानी और पुनर्वास; अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी पर रोक; साइबर अपराध से निपटने के लिए रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करना; जीरो एफआईआर का समयबद्ध हस्तांतरण और जाँच; रेलवे सुरक्षा को सुदृढ़ करना; तथा अवैध घुसपैठ की चुनौती से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करना।

इसके अलावा, राज्यों के बीच सक्रिय आपराधिक गिरोहों के विरुद्ध संयुक्त अभियान, सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने और तकनीक-आधारित खुफिया पुलिसिंग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

बैठक का निष्कर्ष और आगे की राह

बैठक के समापन सत्र में डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने विश्वास जताया कि इस बैठक में लिए गए फैसले और सुझाव राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पूर्वी भारत की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह बैठक ऐसे समय में आई है जब पूर्वी भारत के राज्य अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क और वामपंथी उग्रवाद के शेष प्रभाव से एक साथ जूझ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनके प्रस्ताव ज़मीन पर कितने उतरते हैं। वामपंथी उग्रवाद में गिरावट के बावजूद अंतरराज्यीय साइबर अपराध और मादक तस्करी के नेटवर्क तेज़ी से जटिल हो रहे हैं — और इनके खिलाफ रियल-टाइम खुफिया साझेदारी अभी भी कागज़ पर ज़्यादा, व्यवहार में कम है। जीरो एफआईआर के समयबद्ध हस्तांतरण जैसे बुनियादी मुद्दों का एजेंडे में होना बताता है कि राज्यों के बीच प्रक्रियागत खाई अभी पाटी नहीं गई है। बिना बाध्यकारी क्रियान्वयन ढाँचे के, ये बैठकें अच्छे इरादों का दस्तावेज़ बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईस्टर्न रीजनल पुलिस कोऑर्डिनेशन कमेटी 2026 की बैठक क्या है?
यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित एक उच्चस्तरीय क्षेत्रीय पुलिस बैठक है, जिसमें पूर्वी भारत के राज्यों — ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड — के डीजीपी और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य संगठित अपराध, वामपंथी उग्रवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत करना है।
ओडिशा डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने बैठक में क्या कहा?
खुरानिया ने कहा कि साइबर अपराध, मादक तस्करी, मानव तस्करी और वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौतियाँ राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने लगातार खुफिया जानकारी साझा करने, आधुनिक तकनीक के उपयोग और राज्यों के बीच करीबी सहयोग को अनिवार्य बताया।
बैठक में किन प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में आत्मसमर्पित वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास, अंतरराज्यीय मादक तस्करी, रियल-टाइम साइबर खुफिया साझेदारी, जीरो एफआईआर का समयबद्ध हस्तांतरण, रेलवे सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस बैठक की मेजबानी ओडिशा को क्यों सौंपी गई?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस वर्ष की क्षेत्रीय समन्वय बैठक की मेजबानी ओडिशा पुलिस को सौंपी। डीजीपी खुरानिया ने इसे पुलिस एजेंसियों के बीच आपसी विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने का अवसर बताया।
इस बैठक से पूर्वी भारत की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
डीजीपी खुरानिया के अनुसार, बैठक में लिए गए फैसले और सुझाव राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने और पूर्वी भारत की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद करेंगे। हालाँकि, इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन की समयसीमा और तंत्र का अभी आधिकारिक ब्यौरा सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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