ओडिशा में कानून-व्यवस्था पर बीजद का हमला: सुलता देव ने लगाए सरकार पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (बीजद) की राज्यसभा सांसद सुलता देव ने 27 जून 2026 को ओडिशा की कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 26 महीनों में प्रदेश में अपराध की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है और आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना गहरी होती जा रही है। सांसद ने सरकार से गंभीर मामलों की निष्पक्ष जाँच और कानून-व्यवस्था को मज़बूत करने की माँग की।
26 महीनों में बढ़े अपराध — क्या कहती हैं सांसद
सुलता देव के अनुसार, ओडिशा में पिछले 26 महीनों के दौरान छिनतई, मॉब लिंचिंग, गोलीबारी, दिनदहाड़े हत्या तथा महिलाओं और बच्चों के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। उनका कहना था कि इससे पहले लंबे समय तक इस स्तर की घटनाएँ नहीं देखी गई थीं। उन्होंने कहा, "लोगों में भय का वातावरण बन गया है और प्रशासन पर उनका भरोसा कमज़ोर हो रहा है।"
जेल से फरार कैदियों का मामला — मिलीभगत के आरोप
सांसद ने 2025 में ओडिशा की एक जेल से दो गैर-ओड़िया हार्डकोर कैदियों के फरार होने की घटना का विशेष उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस समय उन्होंने इस मामले में बड़े स्तर पर मिलीभगत की आशंका जताई थी, परंतु उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ही एक सांसद द्वारा जेल अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप लगाए जाने के बाद, सुलता देव ने कहा कि उनके संदेह को बल मिला है।
सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेज़ों पर सवाल
सुलता देव ने आरोप लगाया कि इस मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके अनुसार, इससे जाँच की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस पूरे मामले में कई स्तरों पर मिलीभगत हो सकती है।
बीजद की माँग — जवाबदेही और निष्पक्ष जाँच
बीजद ने स्पष्ट किया कि वह शुरू से ही इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने, आरोपियों की पहचान करने और निष्पक्ष जाँच कराने की माँग करता रहा है। सुलता देव ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय किए बिना कानून का राज स्थापित नहीं हो सकता। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि जेल से फरार कैदियों का मामला अभी भी जाँच के दायरे में है और विपक्ष इस पर लगातार दबाव बना रहा है। बीजद ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की, तो वह इस मुद्दे को और व्यापक मंच पर उठाएगा। आलोचकों का कहना है कि पारदर्शी जाँच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम ही जनता का विश्वास बहाल कर सकते हैं।