ओपी राजभर का दावा: 2027 यूपी चुनाव में NDA को मिलेगी ‘ऐतिहासिक’ जीत, रामभद्राचार्य की भविष्यवाणी सही
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 3 जून को लखनऊ में दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को ‘ऐतिहासिक’ जीत मिलेगी। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की हालिया भविष्यवाणी का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ‘नाकाम’ हैं और 2017 से बेहतर प्रदर्शन भाजपा-नीत गठबंधन करेगा।
मुख्य दावा और तर्क
राजभर ने कहा, ‘NDA को बिहार में ऐतिहासिक जीत मिली थी। बंगाल में जहां इंडी गठबंधन को अपनी जीत का पूरा भरोसा था, वहां भी NDA की ऐतिहासिक जीत हासिल हुई। इसलिए, यूपी में भी ऐतिहासिक जीत होगी, क्योंकि ये लोग नाकाम हैं।’ उन्होंने जोड़ा कि कांग्रेस के पास अपने वोट नहीं हैं और उसे समाजवादी पार्टी के सहारे ही चुनाव लड़ना होगा, जिससे विपक्षी समीकरण कमज़ोर रहेगा।
विपक्षी बैठक पर तंज
आगामी 8 जून को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की बैठक पर मंत्री ने कटाक्ष किया कि ‘कांग्रेस जहां-जहां भी गई, वहां एक ही रिजल्ट आया।’ उनके मुताबिक यूपी में कांग्रेस नेताओं का ‘कोई वजूद नहीं’ है और ‘योगी राज’ में राज्य में सकारात्मक बदलाव हुए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल लोकसभा नतीजों के बाद राज्यवार रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।
ममता बनर्जी और TMC पर हमला
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के प्रदर्शन पर राजभर ने कहा, ‘TMC के मतदाताओं ने भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया है, जिसका असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला। अब जब ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, तो भाजपा में गए मतदाता TMC में क्यों लौटेंगे?’ उन्होंने कथित तौर पर पार्टी के भीतर फूट की अटकलों को ‘गुंडागर्दी, हिटलर जैसी रणनीति और तानाशाही’ का परिणाम बताया।
CBSE तबादलों पर सफ़ाई
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादलों पर पूछे जाने पर राजभर ने कहा, ‘सवाल उठाए गए थे और इसीलिए जांच कराई गई। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’ हालांकि उन्होंने जांच के दायरे या समय-सीमा का ब्यौरा नहीं दिया।
आगे क्या
यूपी की 403 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 2027 की पहली छमाही में संभावित हैं। आलोचकों का कहना है कि सहयोगी दलों के बीच सीट-बंटवारे की प्रारंभिक खींचतान अभी से शुरू हो चुकी है, और राजभर जैसे क्षेत्रीय सहयोगी अपने जनाधार को मज़बूत दिखाने की कोशिश में हैं।