31 अक्टूबर 2026
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ऑपरेशन ट्राइडेंट: ईडी ने चार और गिरफ्तार, मणिपुर-मिजोरम में अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश

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ऑपरेशन ट्राइडेंट: ईडी ने चार और गिरफ्तार, मणिपुर-मिजोरम में अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश

सारांश

ऑपरेशन ट्राइडेंट में अब 10 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। मणिपुर के चुराचांदपुर में मिले हस्तलिखित हवाला खाते, ₹175 करोड़ का बैंकिंग लेनदेन और 'ड्रग्स के बदले सामान' की GST-आड़ वाली योजना — यह महज तस्करी का मामला नहीं, बल्कि भारत-म्यांमार सीमा पर एक सुनियोजित वित्तीय अपराध-तंत्र का खुलासा है।

मुख्य बातें

ईडी ने 31 अक्टूबर 2026 को ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया; तीनों मामलों में कुल गिरफ्तारियाँ अब 10 हो गई हैं।
गिरफ्तार आरोपी लालराममुआना (मिजोरम), थांगसिंटुआंग (म्यांमार), जब्रुल हक और सैफ उद्दीन (असम) पहले से NCB मामलों में आइजोल जेल में बंद थे।
अबू सालेह के खाते में ₹11.44 करोड़ (जिसमें ₹6.67 करोड़ नकद ) आए; रकम चम्फाई हवाला खातों में भेजी गई।
चुराचांदपुर के आरोपी जेंगैहनियांग ने बैंकिंग प्रणाली से ₹175 करोड़ से अधिक का लेनदेन किया; उससे जुड़े 991 बैंक खाते फ्रीज ।
एक दिन में ₹54.47 लाख तक की हवाला प्रविष्टियाँ दर्ज; अप्रैल 2025 में एक सप्ताह में एक व्यक्ति को ₹1.14 करोड़ का भुगतान।
ड्रग्स का भुगतान नकद की जगह सामान से — GST इनवॉइस की आड़ में; सप्लायरों में पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली और मिजोरम के व्यापारी शामिल।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 31 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया — यह पूर्वोत्तर भारत में कई केंद्रीय एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा एक बहु-राज्यीय अभियान है। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में की गई तलाशी के दौरान जब्त दस्तावेजों से भारत-म्यांमार के बीच व्यापक अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है। इन गिरफ्तारियों के साथ तीनों संबंधित मामलों में अब तक कुल 10 लोग गिरफ्त में आ चुके हैं।

किसे गिरफ्तार किया गया

ईडी के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने शुक्रवार को चार आरोपियों — लालराममुआना (मिजोरम के चम्फाई जिले का निवासी), थांगसिंटुआंग उर्फ चिंटुआंग उर्फ तलुआंगा (म्यांमार के बुलफेक गांव का निवासी), जब्रुल हक और अबू सालेह मोहम्मद सैफ उद्दीन (दोनों असम के श्रीभूमि जिले, पूर्व में करीमगंज, के निवासी) — को हिरासत में लिया।

सैफ उद्दीन को कृषिव एंटरप्राइज मामले में गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य तीन को जब्रुल हक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत। ईडी के बयान के अनुसार, चारों आरोपी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नारकोटिक्स मामलों में आइजोल की केंद्रीय जेल में पहले से बंद थे। 29 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत आइजोल के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-I ने उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति दी और पूछताछ के लिए 48 घंटे की ईडी हिरासत सौंपी।

ड्रग तस्करी और हवाला का गठजोड़

थांगसिंटुआंग म्यांमार से 49.101 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन की उस खेप का आपूर्तिकर्ता बताया गया है, जिसे 21 अगस्त 2025 को जब्त किया गया था। लालराममुआना इस खेप का मुख्य संचालक था। जब्रुल हक त्रिपुरा के दमछेरा-कन्हुमुन सीमा पर लक्षित प्राप्तकर्ता था, जबकि अबू सालेह करीमगंज स्थित संचालक था — जिसके खाते में ₹11.44 करोड़ (जिसमें ₹6.67 करोड़ नकद शामिल) आए और इसी रकम से चम्फाई के हवाला खातों में धन जमा किया गया।

चुराचांदपुर हवाला नेटवर्क का खुलासा

23 अक्टूबर को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के न्यू लामका निवासी जेंगैहनियांग उर्फ तानियांग के आवास पर तलाशी के दौरान हस्तलिखित कैश बुक, रजिस्टर और नोटबुक बरामद किए गए, जिनमें उसके हवाला कारोबार के विस्तृत खाते दर्ज थे। इन अभिलेखों के अनुसार, भारत के विभिन्न हिस्सों से नकद और बैंक खातों में भारतीय रुपए प्राप्त किए जाते थे और प्रतिदिन लगभग 42 से 48 क्यात प्रति रुपए की दर से म्यांमार क्यात में परिवर्तित करके म्यांमार में भुगतान किया जाता था।

ईडी के बयान के अनुसार, एक दिन में ₹54.47 लाख (लगभग 26 करोड़ क्यात) तक की लेनदेन प्रविष्टियाँ दर्ज की गईं और कुल योग 43 करोड़ क्यात से अधिक हो गया। अप्रैल 2025 में एक सप्ताह के भीतर एक ही व्यक्ति को ₹1.14 करोड़ का भुगतान किया गया। खातों में म्यांमार के मोबाइल वॉलेट 'केपे' के माध्यम से हस्तांतरण और 10,816 अमेरिकी डॉलर के 4,150 क्यात प्रति डॉलर की दर से रूपांतरण का रिकॉर्ड भी मिला। तलाशी में हवाला पाने वालों की पहचान के लिए टोकन के रूप में इस्तेमाल किए गए लिखे हुए ₹10 के सात नोट और जेंगैहनियांग के नाम पर ₹60 लाख में खरीदी गई एक अचल संपत्ति के दस्तावेज भी जब्त हुए। इस नेटवर्क से जुड़े 991 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।

'ड्रग्स के बदले सामान' की कार्यप्रणाली

जांच में सामने आई सबसे चौंकाने वाली कड़ी तथाकथित 'गो अल्फा ट्रिप' योजना है। इसके बही-खातों और एक मिनी-एटीएम काउंटर से पता चलता है कि आरोपी जेंगैहनियांग ने बैंकिंग प्रणाली के जरिए ₹175 करोड़ से अधिक का लेनदेन किया। मिजोरम से जुड़े मामले के बयानों से भी स्पष्ट है कि ड्रग्स से अर्जित धन को रोजमर्रा के सामान की खरीद में खपाया जाता था।

इस काउंटर और मिजोरम के 'म्यूल' खातों के जरिए भुगतान पाने वालों में पश्चिम बंगाल की एक आटा मिल, असम का खाद्य तेल व्यापारी, मिजोरम के फिलिंग स्टेशन (लगभग ₹2.61 करोड़), किराने व दवाओं के थोक व्यापारी और दिल्ली के जूते-कपड़े के व्यापारी शामिल हैं। इन सौदों के इनवॉइस आइजोल, चम्फाई, जोरिनपुई और तलाबुंग जैसे सीमावर्ती कस्बों में स्थित तीसरी पार्टियों के नाम पर बनाए गए और सामान म्यांमार भेजा गया। इस तरह सीमा पार बैठे ड्रग सप्लायरों को नकद के बजाय सामान के रूप में भुगतान किया जाता था और जीएसटी इनवॉइस की आड़ में कोई वित्तीय सुराग नहीं छोड़ा जाता था।

आगे की जांच

ईडी ने बताया कि जब्त दस्तावेजों में नाम आने वाले भारत-म्यांमार के आर-पार सक्रिय लोगों की पहचान, सीमावर्ती कस्बों में सामान पाने वालों का पता लगाने और अवैध भुगतान पाने वाले सप्लायरों का पर्दाफाश करने के लिए आगे की जांच तेजी से जारी है। अपराध से अर्जित अन्य संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर में ड्रग तस्करी और सीमा पार वित्तीय अपराधों पर बहु-एजेंसी नकेल कसने के प्रयास तेज हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह साफ होता जा रहा है कि यह केवल नशा तस्करी का मामला नहीं, बल्कि GST इनवॉइस और 'म्यूल' बैंक खातों से सजी एक सुनियोजित वित्तीय संरचना है जो वर्षों से भारत-म्यांमार सीमा पर फल-फूल रही थी। ₹175 करोड़ से अधिक का बैंकिंग लेनदेन और 991 खाते फ्रीज होना बताते हैं कि यह नेटवर्क कितना गहरा था। असली सवाल यह है कि इतने व्यापक लेनदेन — जिनमें पश्चिम बंगाल से दिल्ली तक के व्यापारी शामिल हैं — इतने लंबे समय तक वित्तीय निगरानी तंत्र की नजर से कैसे ओझल रहे। जांच का अगला दौर बताएगा कि क्या जिम्मेदारी केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित है या आपूर्ति श्रृंखला में और भी बड़े नाम हैं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन ट्राइडेंट क्या है और इसमें ईडी की क्या भूमिका है?
ऑपरेशन ट्राइडेंट पूर्वोत्तर भारत में कई केंद्रीय एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा एक अभियान है, जो नशा तस्करी और उससे जुड़े धन शोधन को निशाना बनाता है। प्रवर्तन निदेशालय इस अभियान के तहत PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है और 31 अक्टूबर 2026 तक तीन मामलों में कुल 10 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
चुराचांदपुर से बरामद हवाला दस्तावेजों में क्या खुलासा हुआ?
मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में 23 अक्टूबर को आरोपी जेंगैहनियांग के आवास पर तलाशी में हस्तलिखित कैश बुक मिलीं, जिनमें भारत-म्यांमार हवाला लेनदेन के विस्तृत खाते दर्ज थे। एक दिन में ₹54.47 लाख तक की प्रविष्टियाँ थीं और बैंकिंग प्रणाली के जरिए ₹175 करोड़ से अधिक का लेनदेन सामने आया।
'ड्रग्स के बदले सामान' की योजना कैसे काम करती थी?
इस योजना में म्यांमार के ड्रग सप्लायरों को नकद के बजाय सामान — जैसे आटा, खाद्य तेल, ईंधन, दवाएँ और कपड़े — के रूप में भुगतान किया जाता था। इन सौदों के इनवॉइस मिजोरम के सीमावर्ती कस्बों की तीसरी पार्टियों के नाम बनाए जाते थे, जिससे GST की आड़ में कोई वित्तीय सुराग नहीं बचता था।
इन गिरफ्तारियों से अब तक कितने लोग पकड़े गए हैं और आगे क्या होगा?
31 अक्टूबर 2026 की गिरफ्तारियों के साथ ऑपरेशन ट्राइडेंट के तीनों मामलों में कुल 10 आरोपी गिरफ्त में आ चुके हैं। ईडी आगे उन लोगों की पहचान कर रही है जो भारत-म्यांमार के आर-पार सक्रिय हैं, साथ ही अपराध से अर्जित अन्य संपत्तियों की जब्ती भी जारी है।
इस मामले में कितने बैंक खाते फ्रीज किए गए और क्यों?
चुराचांदपुर नेटवर्क से जुड़े 991 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। ईडी के अनुसार ये खाते हवाला लेनदेन और ड्रग मनी को वैध दिखाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाते थे।
राष्ट्र प्रेस
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