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क्या ईडी ने 100 करोड़ रुपए के साइबर अपराध धन शोधन मामले में चार को गिरफ्तार किया?

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क्या ईडी ने 100 करोड़ रुपए के साइबर अपराध धन शोधन मामले में चार को गिरफ्तार किया?

सारांश

ईडी ने सूरत में 100 करोड़ रुपए के साइबर अपराध से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में कई धोखाधड़ी के तरीके और जालसाजी के आरोप सामने आए हैं, जिसमें प्रतिष्ठित संस्थानों का नाम भी शामिल है। क्या यह मामला साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत है?

मुख्य बातें

ईडी ने 100 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी में चार लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों ने धन शोधन के लिए जालसाजी की थी।
इस मामले में कई बैंक खाते और सिम कार्ड शामिल हैं।
जांच में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग भी सामने आया है।
ईडी की कार्रवाई से साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत मिलता है।

सूरत, 10 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों पर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने 100 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी से संबंधित एक बड़ी धन शोधन जांच के तहत चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में मकबूल अब्दुल रहमान डॉक्टर, काशिफ मकबूल डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई, और ओम राजेंद्र पांड्या शामिल हैं। उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत हिरासत में लिया गया है।

ईडी की जांच सूरत पुलिस के विशेष अभियान समूह द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई एक प्राथमिकी पर आधारित है। इस एफआईआर में मकबूल डॉक्टर और अन्य पर आम नागरिकों को निशाना बनाकर कई साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।

ईडी के अनुसार, मकबूल डॉक्टर के बेटों काशिफ और बासम सहित आरोपियों ने डिजिटल गिरफ्तारियों, नकली विदेशी मुद्रा व्यापार प्लेटफॉर्म और भारत के सर्वोच्च न्यायालय और प्रवर्तन निदेशालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कथित तौर पर जाली नोटिस का उपयोग करके धमकाने की रणनीति से जुड़ी विस्तृत योजनाएं बनाई।

इन हथकंडों का उपयोग पीड़ितों से पैसे ऐंठने और उस पैसे को एक जटिल धन शोधन नेटवर्क में डालने के लिए किया गया। जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि आरोपियों ने अवैध धन इकट्ठा करने और उसे छिपाने के लिए कर्मचारियों, सहयोगियों और किराए के व्यक्तियों के नाम पर कई बैंक खाते खोले।

इन खातों को संचालित करने के लिए, उन्होंने इसी तरह के धोखाधड़ी वाले तरीकों का इस्तेमाल करके पहले से सक्रिय सिम कार्ड हासिल किए। इसके बाद, लूटे गए धन को क्रिप्टोकरेंसी, विशेष रूप से यूएसडीटी (टीथर) में बदल दिया गया और नियामकीय निगरानी को दरकिनार करने के लिए हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से भेजा गया।

गिरफ्तार किए गए चारों व्यक्तियों को अहमदाबाद की विशेष अदालत (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया, जिसने आगे की पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के लिए उन्हें पांच दिनों की ईडी हिरासत में दे दिया।

प्रवर्तन निदेशालय ने पुष्टि की है कि जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्त की जा सकती है। यह मामला साइबर अपराध और वित्तीय शोधन के बीच बढ़ते गठजोड़ और ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ईडी के तीव्र प्रयासों को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें ऐसे जालसाजों के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए और ईडी के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने किस आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया?
ईडी ने 100 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में कौन-कौन शामिल हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में मकबूल अब्दुल रहमान डॉक्टर, काशिफ मकबूल डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई, और ओम राजेंद्र पांड्या शामिल हैं।
क्या ईडी की जांच के पीछे कोई विशेष कारण था?
ईडी की जांच सूरत पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोप है कि आरोपियों ने आम नागरिकों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी की।
ईडी की कार्यवाही का उद्देश्य क्या है?
ईडी का उद्देश्य साइबर अपराधियों को पकड़कर मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क को समाप्त करना है।
क्या आगे की गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
ईडी ने पुष्टि की है कि जांच जारी है और आगे की गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्त की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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