विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक पर केंद्र सरकार को घेरा, कहा- 'हर मामले में विफल'
सारांश
Key Takeaways
- सर्वदलीय बैठक का आयोजन केंद्र सरकार द्वारा किया गया है।
- विपक्ष ने आलोचना की है कि बैठक की जानकारी एक दिन पहले दी गई।
- विदेश नीति के मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर सवाल उठाए गए।
- किसानों और आम जनता की गैस की कमी पर चिंता जताई गई।
- विपक्ष संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा।
नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले, विपक्ष के सांसदों ने सरकार पर तीखा हमला किया है। सांसदों का कहना है कि बैठक की जानकारी एक दिन पहले दी गई है, जो उचित नहीं है। यह दर्शाता है कि सरकार हर मामले में विफल हो रही है।
सामाजिक पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "यह सर्वदलीय बैठक शाम 5 बजे आयोजित की गई है, जिसका नोटिस एक दिन पहले दिया गया। यह उचित नहीं है।" उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी की ओर से जावेद अली खान और धर्मेंद्र यादव को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और उनकी पार्टी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा में सक्रिय भागीदारी करेगी।
विदेश नीति पर उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की विदेश नीति पूरी तरह से प्रधानमंत्री के हाथ में होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि भारत को खुद पहल करनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री को संसद में आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से क्या बातचीत हुई।
गुजरात में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड के बिल पर भी रामगोपाल यादव ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारों वाले क्षेत्रों में ऐसे कानून लाए जा रहे हैं जो आम जनता के हितों के खिलाफ हैं।
कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलका ने सर्वदलीय बैठक के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बैठक में शामिल होकर देश को पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की भूमिका के बारे में बताना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत को न केवल अमेरिका बल्कि ईरान के साथ भी संवाद बढ़ाना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एलपीजी की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वास्तविकता कुछ और है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में सब कुछ सामान्य बता रहे हैं, जबकि जनता गैस की कमी से जूझ रही है। किसानों के सामने भी आने वाले समय में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी एलपीजी संकट पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गांवों और शहरों में गैस की कमी है, खासकर नवरात्र और ईद जैसे त्योहारों के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। उन्होंने बताया कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा और जनता की आवाज उठाएगा।