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नितेश राणे की 'हिंदू दुकानों से खरीदारी' वाली टिप्पणी पर विपक्ष का हमला, माफी की माँग

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नितेश राणे की 'हिंदू दुकानों से खरीदारी' वाली टिप्पणी पर विपक्ष का हमला, माफी की माँग

सारांश

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के कथित बयान — कि हिंदू केवल हिंदू दुकानों से खरीदें और मुस्लिम विक्रेताओं को कुंभ में न आने दें — ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। दीपावली और नासिक कुंभ की पूर्व बेला पर आया यह विवाद सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की उस बहस को फिर केंद्र में ले आया है जो महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में पहले से धधक रही है।

मुख्य बातें

नितेश राणे ने कथित तौर पर हिंदुओं से दीपावली और कुंभ पर केवल हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों से खरीदारी करने की अपील की।
राणे ने कथित तौर पर यह भी कहा कि नासिक कुंभ मेले में मुस्लिम विक्रेताओं को भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने राणे से बयान वापस लेने और जनता से माफी माँगने की माँग की।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इसे आरएसएस और BJP की साजिश बताया और संविधान की शपथ याद दिलाई।
कांग्रेस के पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने कहा कि आम खरीदार पर इस बयान का कोई असर नहीं पड़ेगा; लोग गुणवत्ता और कीमत देखते हैं।
अब तक राणे की ओर से कोई आधिकारिक खंडन या स्पष्टीकरण नहीं आया है।

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे द्वारा कथित तौर पर दिए गए एक विवादास्पद बयान — जिसमें उन्होंने हिंदुओं से त्योहारों के दौरान केवल हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों से खरीदारी करने और नासिक कुंभ मेले में मुस्लिम विक्रेताओं की भागीदारी रोकने की अपील की — ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों ने 26 अक्टूबर 2026 को इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए राणे से सार्वजनिक माफी की माँग की है।

विवादित बयान क्या था

रिपोर्टों के अनुसार, राणे ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुओं को दीपावली और कुंभ जैसे त्योहारों के दौरान केवल हिंदू दुकानदारों से ही सामान खरीदना चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि मुस्लिम विक्रेताओं को नासिक कुंभ मेले में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, रिपोर्टों के मुताबिक राणे ने यह भी कहा कि मुस्लिम विक्रेताओं से खरीदे गए सामान पर खर्च होने वाला पैसा चरमपंथ को बढ़ावा देने में उपयोग किया जाएगा — एक आरोप जिसने विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया को और तेज़ कर दिया।

राजद की प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि राणे अवसरवादी राजनेताओं का उदाहरण हैं जो मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए पार्टी बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा, 'उनके पास कोई मौलिक विचार नहीं हैं। वे सिर्फ देश में दंगे और सांप्रदायिक नफरत फैलाने का काम करते हैं।' वीरेंद्र ने यह भी याद दिलाया कि हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख — सभी ने मिलकर देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया था और भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। उन्होंने माँग की कि राणे अपना बयान वापस लें और जनता से माफी माँगें।

कांग्रेस नेताओं की आलोचना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने राणे को संविधान की शपथ की याद दिलाते हुए कहा, 'मंत्री होने के नाते उन्हें संविधान की जानकारी होनी चाहिए। वे सिर्फ दो धर्मों के बीच दुश्मनी भड़काने के लिए इस पद पर हैं।' उन्होंने इसे आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की साजिश करार दिया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने तर्क दिया कि ऐसे फैसले लेने में राणे की कोई भूमिका नहीं है और इसकी जवाबदेही मुख्यमंत्री पर है। उन्होंने यह भी कहा कि राणे के बयान का आम खरीदार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दलवाई ने कहा, 'लोग यह नहीं देखेंगे कि दुकानदार हिंदू है या मुसलमान। केवल गुणवत्तापूर्ण और किफायती वस्तुएं ही बिकेंगी।'

व्यापक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दीपावली और नासिक कुंभ मेले की तैयारियाँ चल रही हैं और महाराष्ट्र में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर संवेदनशीलता पहले से अधिक है। गौरतलब है कि नितेश राणे पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र हैं, जो कभी कांग्रेस में थे। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक पहचान बनाने के लिए इस तरह के ध्रुवीकरण वाले बयान एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

आगे क्या

अब तक नितेश राणे की ओर से कोई आधिकारिक खंडन या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। विपक्षी दलों ने माँग की है कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और राणे को बयान वापस लेने के लिए कहे। यह देखना होगा कि क्या सत्ताधारी गठबंधन इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह संकेत देती है कि नेतृत्व इस विवाद को असहज तो मानता है, पर निर्णायक रूप से दूरी बनाने में हिचकिचाहट भी है। गौरतलब यह भी है कि कुंभ और दीपावली जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों से पहले इस तरह की अपीलें व्यापार और सामुदायिक सह-अस्तित्व पर वास्तविक आर्थिक असर डाल सकती हैं, जिस पर मीडिया कवरेज पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितेश राणे ने क्या विवादित बयान दिया था?
रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने एक सभा में कहा कि हिंदुओं को त्योहारों के दौरान केवल हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों से खरीदारी करनी चाहिए और नासिक कुंभ मेले में मुस्लिम विक्रेताओं को भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि मुस्लिम विक्रेताओं से खरीदा गया पैसा चरमपंथ को बढ़ावा देने में इस्तेमाल होगा।
विपक्षी नेताओं ने राणे के बयान पर क्या माँग की है?
राजद विधायक भाई वीरेंद्र और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार सहित कई विपक्षी नेताओं ने राणे से बयान वापस लेने और सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की है। उनका कहना है कि यह बयान दो समुदायों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाने वाला है।
क्या राणे के बयान का आम खरीदारों पर असर पड़ेगा?
कांग्रेस के पूर्व सांसद हुसैन दलवाई का मानना है कि इस बयान का व्यावहारिक असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि लोग गुणवत्ता और किफायती कीमत देखकर खरीदारी करते हैं, दुकानदार की धार्मिक पहचान देखकर नहीं। हालाँकि, कुंभ और दीपावली जैसे बड़े बाज़ारों में इस तरह की अपीलों का अल्पकालिक सामाजिक प्रभाव हो सकता है।
क्या महाराष्ट्र सरकार ने इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अब तक महाराष्ट्र सरकार या सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। नितेश राणे ने भी अपने कथित बयान पर कोई स्पष्टीकरण या खंडन जारी नहीं किया है।
राष्ट्र प्रेस
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