नितेश राणे की 'हिंदू दुकानों से खरीदारी' वाली टिप्पणी पर विपक्ष का हमला, माफी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे द्वारा कथित तौर पर दिए गए एक विवादास्पद बयान — जिसमें उन्होंने हिंदुओं से त्योहारों के दौरान केवल हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों से खरीदारी करने और नासिक कुंभ मेले में मुस्लिम विक्रेताओं की भागीदारी रोकने की अपील की — ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों ने 26 अक्टूबर 2026 को इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए राणे से सार्वजनिक माफी की माँग की है।
विवादित बयान क्या था
रिपोर्टों के अनुसार, राणे ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुओं को दीपावली और कुंभ जैसे त्योहारों के दौरान केवल हिंदू दुकानदारों से ही सामान खरीदना चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि मुस्लिम विक्रेताओं को नासिक कुंभ मेले में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, रिपोर्टों के मुताबिक राणे ने यह भी कहा कि मुस्लिम विक्रेताओं से खरीदे गए सामान पर खर्च होने वाला पैसा चरमपंथ को बढ़ावा देने में उपयोग किया जाएगा — एक आरोप जिसने विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया को और तेज़ कर दिया।
राजद की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि राणे अवसरवादी राजनेताओं का उदाहरण हैं जो मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए पार्टी बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा, 'उनके पास कोई मौलिक विचार नहीं हैं। वे सिर्फ देश में दंगे और सांप्रदायिक नफरत फैलाने का काम करते हैं।' वीरेंद्र ने यह भी याद दिलाया कि हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख — सभी ने मिलकर देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया था और भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। उन्होंने माँग की कि राणे अपना बयान वापस लें और जनता से माफी माँगें।
कांग्रेस नेताओं की आलोचना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने राणे को संविधान की शपथ की याद दिलाते हुए कहा, 'मंत्री होने के नाते उन्हें संविधान की जानकारी होनी चाहिए। वे सिर्फ दो धर्मों के बीच दुश्मनी भड़काने के लिए इस पद पर हैं।' उन्होंने इसे आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की साजिश करार दिया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने तर्क दिया कि ऐसे फैसले लेने में राणे की कोई भूमिका नहीं है और इसकी जवाबदेही मुख्यमंत्री पर है। उन्होंने यह भी कहा कि राणे के बयान का आम खरीदार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दलवाई ने कहा, 'लोग यह नहीं देखेंगे कि दुकानदार हिंदू है या मुसलमान। केवल गुणवत्तापूर्ण और किफायती वस्तुएं ही बिकेंगी।'
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दीपावली और नासिक कुंभ मेले की तैयारियाँ चल रही हैं और महाराष्ट्र में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर संवेदनशीलता पहले से अधिक है। गौरतलब है कि नितेश राणे पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र हैं, जो कभी कांग्रेस में थे। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक पहचान बनाने के लिए इस तरह के ध्रुवीकरण वाले बयान एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
आगे क्या
अब तक नितेश राणे की ओर से कोई आधिकारिक खंडन या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। विपक्षी दलों ने माँग की है कि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और राणे को बयान वापस लेने के लिए कहे। यह देखना होगा कि क्या सत्ताधारी गठबंधन इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।