क्या पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया ने 'शब्दोत्सव' को सराहा? शरीर के नष्ट होने के बाद भी जिंदा रहता है शब्द

Click to start listening
क्या पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया ने 'शब्दोत्सव' को सराहा? शरीर के नष्ट होने के बाद भी जिंदा रहता है शब्द

सारांश

पद्म श्री प्रहलाद टिपानिया ने 'शब्दोत्सव 2026' के दूसरे दिन कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने इसे मानवता को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बताया। जानें कबीर और संतों की वाणी के महत्व के बारे में।

Key Takeaways

  • शब्द की शक्ति पर जोर दिया गया।
  • कार्यक्रम ने कबीर और संतों की वाणी को जीवित किया।
  • समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाया गया।
  • यह आयोजन मानवता को जोड़ने का प्रयास करता है।

नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नई दिल्ली में आयोजित ‘शब्दोत्सव 2026’ का शनिवार को दूसरा दिन रहा। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित प्रहलाद सिंह टिपानिया ने इसे लोगों को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बताया और कार्यक्रम की जमकर प्रशंसा की।

प्रहलाद सिंह टिपानिया ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "दिल्ली सरकार और आयोजकों द्वारा नए साल के उपलक्ष्य में शब्दोत्सव 2026 का आयोजन बहुत प्रशंसनीय है। शब्द ही सब कुछ है। एक शब्द इंसान को घाव देता है और एक शब्द दवा का काम करता है। इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को मेरा बहुत धन्यवाद। यह एक उत्कृष्ट आयोजन है।"

उन्होंने आगे कहा, "शब्दों के माध्यम से पूरे मानव को जोड़ने का यह तरीका बहुत शानदार है। हम साधुवाद देते हैं कि उन्होंने कबीर और संतों की वाणी को जिस प्रकार से प्रस्तुत किया, वह अद्वितीय है। कबीर और संतों की वाणी जीवन के भिन्न पहलुओं को उजागर करती है और मानवता को एकजुट करने का कार्य करती है। हम बिना किसी भेदभाव या रुकावट के प्रेम और भाईचारे के साथ रह सकते हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम बहुत ही महत्वपूर्ण और सराहनीय है।"

टिपानिया ने कहा, "मैंने कार्यक्रम में जिस प्रकार का शब्दोत्सव देखा, उसी तरह के गीत गाए। कबीर और संतों की वाणी स्वयं शब्द है। यह शब्द तब भी था जब शरीर था और यह तब तक जीवित रहेगा जब शरीर नहीं रहेगा। इस प्रकार के आयोजन मानव समाज में चेतना और समझ का संचार कर सकते हैं। यह एक महत्वपूर्ण कार्य है।"

उन्होंने बताया, "कबीर सभी की भलाई चाहते हैं। वर्तमान में विभिन्न प्रकार की सीमाएं, जैसे धर्म, जाति, रंग और ऊंच-नीच, हैं। यदि हम इन चीजों से ऊपर उठकर उस चेतना और ऊर्जा को महसूस करें, जो सभी को प्रेरित करती है, तो हर व्यक्ति अमन और शांति से रह सकेगा। ऐसे आयोजन, चाहे कोई भी करे, सराहनीय हैं। यह कार्यक्रम लोगों को जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम बन गया है।"

Point of View

बल्कि समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश भी फैलाया। यह आयोजन मानवता को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो सभी को एकजुट करने का काम करता है।
NationPress
27/02/2026

Frequently Asked Questions

शब्दोत्सव 2026 क्या है?
शब्दोत्सव 2026 एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जो शब्दों और संतों की वाणी को प्रचारित करने का काम करता है।
प्रहलाद टिपानिया ने इस कार्यक्रम के बारे में क्या कहा?
उन्होंने इसे लोगों को जोड़ने का एक बेहतरीन तरीका बताया और कार्यक्रम की प्रशंसा की।
कबीर और संतों की वाणी का क्या महत्व है?
कबीर और संतों की वाणी मानवता को जोड़ने और जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझाने में मदद करती है।
Nation Press