टीवीके के कृषि बजट 2026-27 पर पलानीस्वामी का हमला, किसानों से किए वादे अधूरे: AIADMK
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 6 अगस्त 2026 को तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के पहले कृषि बजट 2026-27 की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों से पूर्व किसान समुदाय से किए गए प्रमुख वादे इस बजट में पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिए गए हैं। पलानीस्वामी के अनुसार, किसान ठोस राहत की उम्मीद लेकर बैठे थे, लेकिन बजट उन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा।
मुख्य आरोप: वादे और हकीकत का फासला
तमिलनाडु विधानसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री आर. विनोद द्वारा पेश किए गए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने कहा कि TVK ने चुनाव प्रचार के दौरान किसानों से कई महत्वपूर्ण वादे किए थे, किंतु सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा करने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने विशेष रूप से धान, गन्ना और अन्य फसलों के लिए लाभकारी खरीद मूल्य सुनिश्चित करने की मांग को रेखांकित किया। आलोचकों का कहना है कि कृषि उपज के उचित मूल्य के बिना किसानों की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार संभव नहीं है।
कर्ज माफी और वित्तीय राहत की उम्मीद
पलानीस्वामी ने कृषि ऋण के मुद्दे पर सरकार के रवैये को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को उम्मीद थी कि नई सरकार कर्ज से जूझ रहे किसानों के लिए पात्र फसल ऋणों की माफी सहित व्यापक राहत पैकेज की घोषणा करेगी, जो नहीं हुई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसान बढ़ती खेती लागत, मजदूरों की कमी और मौसम की अनिश्चितता जैसी बहुआयामी चुनौतियों से एक साथ जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार को इन समस्याओं के समाधान के लिए अधिक मजबूत वित्तीय सहायता तंत्र स्थापित करना चाहिए था।
बुनियादी ढाँचे और सिंचाई पर सवाल
AIADMK नेता ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए प्रभावी उपायों की कमी पर भी चिंता जताई। उनका तर्क था कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है — सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभ बिना किसी देरी के किसानों तक पहुँचे।
TVK सरकार का पक्ष: बजट में क्या है
दूसरी ओर, TVK सरकार ने इस कृषि बजट को तमिलनाडु की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप के रूप में प्रस्तुत किया है। बजट में मिट्टी संरक्षण, दलहन व तिलहन उत्पादन, मोटे अनाज की खेती, बीज उत्पादन और प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि सेवाओं से जुड़ी पहलें शामिल हैं।
सरकार ने किसानों को व्यक्तिगत सेवाएँ और कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक AI-आधारित एप्लिकेशन की भी घोषणा की है, जिसे आधुनिक खेती की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
पलानीस्वामी ने स्पष्ट किया कि इस कृषि बजट की असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी — यानी सरकार तमिलनाडु के किसान समुदाय से किए गए वादों को किस हद तक धरातल पर उतार पाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बहस आने वाले महीनों में TVK सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण जवाबदेही का मुद्दा बन सकती है।