27 जुलाई 2026
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पेपर लीक विरोधी बिल पर सपा-आरजेडी का पलटवार: 'पहले लाते तो न होता आंदोलन'

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पेपर लीक विरोधी बिल पर सपा-आरजेडी का पलटवार: 'पहले लाते तो न होता आंदोलन'

सारांश

पेपर लीक विरोधी बिल पर सपा और आरजेडी ने सरकार को आईना दिखाया — 'पहले जागते तो युवा सड़क पर न उतरते।' सपा के फखरुल हसन चांद ने इसे छात्रों की जीत बताया, जबकि आरजेडी के मनोज कुमार झा ने चेताया कि बिना सिस्टम सुधारे यह महज हेडलाइन मैनेजमेंट है।

मुख्य बातें

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पेपर लीक विरोधी बिल को बहुत पहले लाया जाना चाहिए था, तभी बड़ा छात्र आंदोलन टाला जा सकता था।
चांद ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर सरकार के पहले के रुख को 'हठधर्मिता' बताया और छात्रों की जीत घोषित की।
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि पेपर लीक कानूनों की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर मिलीभगत का नतीजा है।
झा ने NTA सुधार बिल को 'हेडलाइन मैनेजमेंट' करार दिया जब तक भ्रष्टाचार की जड़ें न काटी जाएँ।
सपा ने BJP पर महिला आरक्षण और RSS के बयानों के बीच विरोधाभास का आरोप लगाया।
बांकीपुर उपचुनाव पर झा ने कहा कि पुलिस की बर्बरता ने भाजपा की स्थिति और कमजोर की है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज कुमार झा ने 27 जुलाई को केंद्र सरकार के प्रस्तावित पेपर लीक विरोधी विधेयक पर तीखी प्रतिक्रिया दी। दोनों विपक्षी नेताओं ने एकस्वर में कहा कि यदि सरकार ने यह कदम समय रहते उठाया होता, तो देशभर में छात्रों को सड़कों पर उतरने की नौबत नहीं आती।

सपा का रुख: युवाओं की जीत, सरकार की देरी

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, 'समाजवादी पार्टी का मानना है कि युवाओं ने एक अहम लड़ाई जीती है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बात पर अड़ी थी कि वह धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लेगी, लेकिन छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी माँगें रखीं और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर सरकार ने ये फैसले पहले लिए होते, यह बिल जल्दी पेश किया होता और छात्रों के हित में कानून बनाने को प्राथमिकता दी होती, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन नहीं होता और युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।'

चांद ने स्पष्ट किया कि युवा सड़क पर इसलिए उतरे क्योंकि भाजपा सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी कि पेपर लीक से कोई नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, 'पूरे देश के युवाओं में गुस्सा था — अब सरकार जागी है। सरकार जो बिल अब ला रही है, इसे बहुत पहले ही लाना चाहिए था।'

एनटीए सुधारों पर सपा की चेतावनी

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में प्रस्तावित सुधारों को लेकर फखरुल हसन चांद ने कहा, 'टास्क फोर्स और कानून बने, लेकिन यह केवल दिखावा न हो। भाजपा सरकार में जब कोई घटना घटित होती है तो बड़ी-बड़ी बातें और दावे किए जाते हैं, लेकिन आखिरकार दावे खोखले नजर आते हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सरकार पर NEET और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर चौतरफा दबाव है।

आरजेडी का तर्क: कानून नहीं, सिस्टम है असली समस्या

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने पेपर लीक विरोधी बिल पर अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक कानूनों की कमी की वजह से नहीं हुआ है। सिस्टम के अंदर के लोग ही इसमें शामिल हैं और जो लोग उन पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार हैं, वे आँखें मूँदे हुए हैं और ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।'

झा ने एक तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'जब कोई पार्टी हॉर्स-ट्रेडिंग के जरिए विधानसभा में अपनी ताकत बढ़ाती है, तो यह विडंबना है कि वह NEET के बारे में कड़े शब्दों में बात करने की कोशिश करती है। क्योंकि भ्रष्टाचार का एक रूप दूसरे रूप को जन्म देता है।' उन्होंने चेताया कि जब तक सिस्टम की जड़ों में मौजूद समस्याओं का समाधान नहीं होता, 'यह सब सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट है।'

अन्य मुद्दों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर सपा प्रवक्ता चांद ने कहा कि महिलाएँ आज समाज के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। उन्होंने BJP पर विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा, 'एक तरफ भाजपा महिला आरक्षण बिल की बात करती है, तो दूसरी तरफ उसकी विचारधारा से जुड़े संगठनों की ओर से इस तरह के बयान दिए जाते हैं। ऐसी विरोधाभासी बातें महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।'

बांकीपुर उपचुनाव पर आरजेडी सांसद झा ने कहा कि भाजपा की चिंता समझ में आती है। उन्होंने कहा, 'साफ है कि उनके पैरों तले जमीन खिसक रही है और जो थोड़ी-बहुत कसर बची थी, उसे पुलिस की बर्बरता ने और खराब कर दिया।' राम मंदिर चंदा मामले पर झा ने कहा, 'यह चंदे की चोरी नहीं है, यह डकैती है।'

गौरतलब है कि NEET विवाद और पेपर लीक के मुद्दे ने पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रीय राजनीति को गर्माए रखा है। विपक्ष की यह आक्रामक प्रतिक्रिया संसद सत्र में सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सरकार को छात्र आंदोलन का इंतजार करना पड़ा। आरजेडी सांसद झा का यह तर्क कि 'कानून नहीं, सिस्टम की मिलीभगत' असली समस्या है — इसे नकारना मुश्किल है, क्योंकि NEET विवाद में जो नाम सामने आए, वे परीक्षा तंत्र के भीतर के लोग थे। लेकिन विपक्ष भी इस मुद्दे पर तब मुखर हुआ जब आंदोलन अपने चरम पर था — उससे पहले संसद में इस पर कितना दबाव बनाया गया, यह भी जाँच का विषय है। असली कसौटी यह होगी कि नया बिल केवल दंड का प्रावधान करता है या परीक्षा तंत्र की निगरानी का स्वतंत्र ढाँचा भी खड़ा करता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेपर लीक विरोधी बिल पर सपा का क्या रुख है?
समाजवादी पार्टी ने बिल का स्वागत करते हुए कहा है कि यह बहुत देर से आया। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद के अनुसार, यदि सरकार ने यह बिल पहले लाया होता तो देशभर में छात्र आंदोलन की नौबत नहीं आती।
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने पेपर लीक बिल पर क्या कहा?
मनोज कुमार झा ने कहा कि पेपर लीक कानूनों की कमी से नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर मिलीभगत से हो रहा है। उनके अनुसार जब तक इस भ्रष्टाचार की जड़ को नहीं काटा जाता, नया बिल महज 'हेडलाइन मैनेजमेंट' बनकर रह जाएगा।
NTA सुधारों पर विपक्ष की क्या माँग है?
सपा ने माँग की है कि NTA सुधारों के लिए बनाए जाने वाले टास्क फोर्स और कानून केवल दिखावा न हों। विपक्ष चाहता है कि सुधारों के नतीजे जमीन पर दिखें, न कि केवल घोषणाओं तक सीमित रहें।
सपा ने BJP और RSS के बयानों पर क्या आरोप लगाया?
सपा प्रवक्ता चांद ने कहा कि BJP एक तरफ महिला आरक्षण बिल की बात करती है और दूसरी तरफ उसकी विचारधारा से जुड़े संगठन महिलाओं को लेकर विपरीत बयान देते हैं। उन्होंने इसे लैंगिक समानता के प्रति BJP की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल बताया।
बांकीपुर उपचुनाव पर आरजेडी का क्या कहना है?
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव को लेकर BJP की बेचैनी साफ दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की बर्बरता ने वहाँ BJP की स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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