पेपर लीक विरोधी बिल पर सपा-आरजेडी का पलटवार: 'पहले लाते तो न होता आंदोलन'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज कुमार झा ने 27 जुलाई को केंद्र सरकार के प्रस्तावित पेपर लीक विरोधी विधेयक पर तीखी प्रतिक्रिया दी। दोनों विपक्षी नेताओं ने एकस्वर में कहा कि यदि सरकार ने यह कदम समय रहते उठाया होता, तो देशभर में छात्रों को सड़कों पर उतरने की नौबत नहीं आती।
सपा का रुख: युवाओं की जीत, सरकार की देरी
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, 'समाजवादी पार्टी का मानना है कि युवाओं ने एक अहम लड़ाई जीती है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बात पर अड़ी थी कि वह धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लेगी, लेकिन छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी माँगें रखीं और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर सरकार ने ये फैसले पहले लिए होते, यह बिल जल्दी पेश किया होता और छात्रों के हित में कानून बनाने को प्राथमिकता दी होती, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन नहीं होता और युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।'
चांद ने स्पष्ट किया कि युवा सड़क पर इसलिए उतरे क्योंकि भाजपा सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी कि पेपर लीक से कोई नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, 'पूरे देश के युवाओं में गुस्सा था — अब सरकार जागी है। सरकार जो बिल अब ला रही है, इसे बहुत पहले ही लाना चाहिए था।'
एनटीए सुधारों पर सपा की चेतावनी
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में प्रस्तावित सुधारों को लेकर फखरुल हसन चांद ने कहा, 'टास्क फोर्स और कानून बने, लेकिन यह केवल दिखावा न हो। भाजपा सरकार में जब कोई घटना घटित होती है तो बड़ी-बड़ी बातें और दावे किए जाते हैं, लेकिन आखिरकार दावे खोखले नजर आते हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सरकार पर NEET और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर चौतरफा दबाव है।
आरजेडी का तर्क: कानून नहीं, सिस्टम है असली समस्या
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने पेपर लीक विरोधी बिल पर अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक कानूनों की कमी की वजह से नहीं हुआ है। सिस्टम के अंदर के लोग ही इसमें शामिल हैं और जो लोग उन पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार हैं, वे आँखें मूँदे हुए हैं और ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।'
झा ने एक तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'जब कोई पार्टी हॉर्स-ट्रेडिंग के जरिए विधानसभा में अपनी ताकत बढ़ाती है, तो यह विडंबना है कि वह NEET के बारे में कड़े शब्दों में बात करने की कोशिश करती है। क्योंकि भ्रष्टाचार का एक रूप दूसरे रूप को जन्म देता है।' उन्होंने चेताया कि जब तक सिस्टम की जड़ों में मौजूद समस्याओं का समाधान नहीं होता, 'यह सब सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट है।'
अन्य मुद्दों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर सपा प्रवक्ता चांद ने कहा कि महिलाएँ आज समाज के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। उन्होंने BJP पर विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा, 'एक तरफ भाजपा महिला आरक्षण बिल की बात करती है, तो दूसरी तरफ उसकी विचारधारा से जुड़े संगठनों की ओर से इस तरह के बयान दिए जाते हैं। ऐसी विरोधाभासी बातें महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।'
बांकीपुर उपचुनाव पर आरजेडी सांसद झा ने कहा कि भाजपा की चिंता समझ में आती है। उन्होंने कहा, 'साफ है कि उनके पैरों तले जमीन खिसक रही है और जो थोड़ी-बहुत कसर बची थी, उसे पुलिस की बर्बरता ने और खराब कर दिया।' राम मंदिर चंदा मामले पर झा ने कहा, 'यह चंदे की चोरी नहीं है, यह डकैती है।'
गौरतलब है कि NEET विवाद और पेपर लीक के मुद्दे ने पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रीय राजनीति को गर्माए रखा है। विपक्ष की यह आक्रामक प्रतिक्रिया संसद सत्र में सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।