पृथ्वीराज चव्हाण का सरकार पर हमला: पेपर लीक माफिया, ऑपरेशन सिंदूर जांच और नासिक कुंभ के ₹35,000 करोड़ पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 26 अगस्त 2026 को मुंबई में एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरा — एमपीएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के बढ़ते नेटवर्क, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमान नुकसान पर पूर्व सीडीएस के बयान, नासिक कुंभ पर कथित तौर पर प्रस्तावित ₹35,000 करोड़ के खर्च और उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को चुनावी हथकंडा बताने तक। चव्हाण ने पेपर लीक को एक संगठित माफिया करार देते हुए परीक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव की माँग की।
पेपर लीक: संगठित माफिया और कानून की नाकामी
चव्हाण ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, इसमें पेपर लीक करने वाले, बेचने वाले और खरीदने वाले — तीनों मिलकर एक बड़ा नेटवर्क बना चुके हैं। महंगे कोचिंग संस्थान पेपर खरीदकर छात्रों को लाखों रुपये में उपलब्ध कराते हैं और कई मामलों में जब तक कोई जागरूक नागरिक शिकायत नहीं करता, लीक का पता ही नहीं चलता।
उन्होंने 2024 के नीट पेपर लीक के बाद बनाए गए कड़े कानून का हवाला देते हुए सवाल किया कि सख्त प्रावधानों के बावजूद पेपर लीक क्यों नहीं रुक रहे। चव्हाण का तर्क था कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी — जब तक दोषियों को निश्चित रूप से दंड नहीं मिलता और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार नहीं होता, यह कारोबार जारी रहेगा।
ऑपरेशन सिंदूर: पारदर्शिता और जांच समिति की माँग
पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों को हुए नुकसान को स्वीकार किया था, चव्हाण ने सरकार से स्पष्टीकरण माँगा। उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का हक है कि कितने विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए और वास्तविक परिस्थितियाँ क्या थीं।
चव्हाण ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर दोनों की व्यापक जाँच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की माँग की। उन्होंने कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा कराई गई समीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि गलतियों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ऐसी जाँच अनिवार्य है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर खुफिया या सुरक्षा संबंधी चूक हुई है तो उसे स्वीकार करने में सरकार को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
नासिक कुंभ: ₹35,000 करोड़ के खर्च पर जनसुनवाई की माँग
नासिक कुंभ पर सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की टिप्पणी — कि कुंभ के खर्च का एक हिस्सा स्कूलों पर लगाया जाए — का उल्लेख करते हुए चव्हाण ने कहा कि वे इस विचार से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि नासिक कुंभ के लिए कथित तौर पर करीब ₹35,000 करोड़ खर्च किए जाने की चर्चा है।
चव्हाण ने स्पष्ट किया कि उन्हें नासिक के विकास या कुंभ के आयोजन पर आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को पहले सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरण प्रभाव आकलन और सामाजिक प्रभाव आकलन कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र की जनता का पैसा है, किसी नेता की निजी संपत्ति नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि वे जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
उत्तर प्रदेश की मुफ्त बस योजना: चुनावी रणनीति या जनकल्याण?
उत्तर प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू किए जाने को चव्हाण ने आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि चुनाव अगले साल होने हैं और सत्ता में वापसी के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश की जा रही है — पहले महिलाएँ, फिर पुरुष और अन्य वर्ग।
युवा मतदाताओं पर चव्हाण ने कहा कि चाहे जेन-ज़ी हो, जेन-अल्फा हो या मिलेनियल्स — युवा पीढ़ी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल युवा बेरोज़गारी और पेपर लीक को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।
आगे क्या
चव्हाण ने संकेत दिया कि नासिक कुंभ के खर्च पर वे जल्द विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। ऑपरेशन सिंदूर जाँच समिति और पेपर लीक पर परीक्षा सुधार — दोनों माँगें अब कांग्रेस के विधायी एजेंडे का हिस्सा बनने की संभावना है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश दोनों में आने वाले महीनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार हैं।