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पृथ्वीराज चव्हाण का सरकार पर हमला: पेपर लीक माफिया, ऑपरेशन सिंदूर जांच और नासिक कुंभ के ₹35,000 करोड़ पर सवाल

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पृथ्वीराज चव्हाण का सरकार पर हमला: पेपर लीक माफिया, ऑपरेशन सिंदूर जांच और नासिक कुंभ के ₹35,000 करोड़ पर सवाल

सारांश

पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एक ही दिन में चार बड़े मोर्चे खोले — पेपर लीक माफिया, ऑपरेशन सिंदूर की पारदर्शिता, नासिक कुंभ के ₹35,000 करोड़ और UP की चुनावी योजनाएँ। यह कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है जो महाराष्ट्र और UP दोनों में सरकार को एक साथ कई मुद्दों पर घेरना चाहती है।

मुख्य बातें

पृथ्वीराज चव्हाण ने 26 अगस्त 2026 को मुंबई में पेपर लीक, ऑपरेशन सिंदूर, नासिक कुंभ और UP बस योजना पर सरकार की आलोचना की।
पिछले 5-6 वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जारी है; चव्हाण ने इसे संगठित माफिया बताया और परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार की माँग की।
पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के बयान का हवाला देते हुए चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले की जाँच के लिए स्वतंत्र समिति माँगी।
नासिक कुंभ पर कथित तौर पर ₹35,000 करोड़ खर्च की चर्चा; चव्हाण ने सार्वजनिक सुनवाई और पर्यावरण-सामाजिक प्रभाव आकलन की माँग की।
UP में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को चव्हाण ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले की चुनावी रणनीति करार दिया।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 26 अगस्त 2026 को मुंबई में एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरा — एमपीएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के बढ़ते नेटवर्क, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमान नुकसान पर पूर्व सीडीएस के बयान, नासिक कुंभ पर कथित तौर पर प्रस्तावित ₹35,000 करोड़ के खर्च और उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को चुनावी हथकंडा बताने तक। चव्हाण ने पेपर लीक को एक संगठित माफिया करार देते हुए परीक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव की माँग की।

पेपर लीक: संगठित माफिया और कानून की नाकामी

चव्हाण ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, इसमें पेपर लीक करने वाले, बेचने वाले और खरीदने वाले — तीनों मिलकर एक बड़ा नेटवर्क बना चुके हैं। महंगे कोचिंग संस्थान पेपर खरीदकर छात्रों को लाखों रुपये में उपलब्ध कराते हैं और कई मामलों में जब तक कोई जागरूक नागरिक शिकायत नहीं करता, लीक का पता ही नहीं चलता।

उन्होंने 2024 के नीट पेपर लीक के बाद बनाए गए कड़े कानून का हवाला देते हुए सवाल किया कि सख्त प्रावधानों के बावजूद पेपर लीक क्यों नहीं रुक रहे। चव्हाण का तर्क था कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी — जब तक दोषियों को निश्चित रूप से दंड नहीं मिलता और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार नहीं होता, यह कारोबार जारी रहेगा।

ऑपरेशन सिंदूर: पारदर्शिता और जांच समिति की माँग

पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों को हुए नुकसान को स्वीकार किया था, चव्हाण ने सरकार से स्पष्टीकरण माँगा। उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का हक है कि कितने विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए और वास्तविक परिस्थितियाँ क्या थीं।

चव्हाण ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर दोनों की व्यापक जाँच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की माँग की। उन्होंने कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा कराई गई समीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि गलतियों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ऐसी जाँच अनिवार्य है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर खुफिया या सुरक्षा संबंधी चूक हुई है तो उसे स्वीकार करने में सरकार को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

नासिक कुंभ: ₹35,000 करोड़ के खर्च पर जनसुनवाई की माँग

नासिक कुंभ पर सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश की टिप्पणी — कि कुंभ के खर्च का एक हिस्सा स्कूलों पर लगाया जाए — का उल्लेख करते हुए चव्हाण ने कहा कि वे इस विचार से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि नासिक कुंभ के लिए कथित तौर पर करीब ₹35,000 करोड़ खर्च किए जाने की चर्चा है।

चव्हाण ने स्पष्ट किया कि उन्हें नासिक के विकास या कुंभ के आयोजन पर आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को पहले सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरण प्रभाव आकलन और सामाजिक प्रभाव आकलन कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र की जनता का पैसा है, किसी नेता की निजी संपत्ति नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि वे जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

उत्तर प्रदेश की मुफ्त बस योजना: चुनावी रणनीति या जनकल्याण?

उत्तर प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू किए जाने को चव्हाण ने आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि चुनाव अगले साल होने हैं और सत्ता में वापसी के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश की जा रही है — पहले महिलाएँ, फिर पुरुष और अन्य वर्ग।

युवा मतदाताओं पर चव्हाण ने कहा कि चाहे जेन-ज़ी हो, जेन-अल्फा हो या मिलेनियल्स — युवा पीढ़ी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल युवा बेरोज़गारी और पेपर लीक को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।

आगे क्या

चव्हाण ने संकेत दिया कि नासिक कुंभ के खर्च पर वे जल्द विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। ऑपरेशन सिंदूर जाँच समिति और पेपर लीक पर परीक्षा सुधार — दोनों माँगें अब कांग्रेस के विधायी एजेंडे का हिस्सा बनने की संभावना है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश दोनों में आने वाले महीनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा पारदर्शिता का सवाल उठाती है — कारगिल समीक्षा का उदाहरण सटीक है, पर सरकार इसे विपक्षी राजनीति के रूप में खारिज कर सकती है। नासिक कुंभ पर ₹35,000 करोड़ का आँकड़ा 'चर्चा' के रूप में आया है, न कि आधिकारिक बजट के रूप में — यह तथ्यात्मक आधार कमज़ोर करता है। पेपर लीक पर चव्हाण का विश्लेषण सबसे ठोस है, क्योंकि 2024 के बाद भी लीक जारी रहना कानून की सीमाओं को उजागर करता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पृथ्वीराज चव्हाण ने एमपीएससी पेपर लीक पर क्या कहा?
चव्हाण ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों से देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक का एक बड़ा संगठित नेटवर्क बन गया है, जिसमें लीक करने, बेचने और खरीदने वाले शामिल हैं। उन्होंने माँग की कि केवल सजा बढ़ाने से काम नहीं चलेगा — परीक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव ज़रूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर जाँच समिति की माँग क्यों की गई?
चव्हाण ने पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के उस कथित बयान का हवाला दिया जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों को नुकसान स्वीकार किया गया था। उन्होंने कारगिल के बाद वाजपेयी सरकार की समीक्षा प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर दोनों की स्वतंत्र जाँच की माँग की।
नासिक कुंभ पर ₹35,000 करोड़ के खर्च पर चव्हाण की क्या आपत्ति है?
चव्हाण को कुंभ आयोजन पर आपत्ति नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि — जो कथित तौर पर ₹35,000 करोड़ बताई जा रही है — खर्च करने से पहले सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरण प्रभाव आकलन और सामाजिक प्रभाव आकलन कराना ज़रूरी है। उन्होंने कहा यह महाराष्ट्र की जनता का पैसा है।
UP की मुफ्त बस सेवा को चव्हाण ने चुनावी क्यों बताया?
चव्हाण ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा सत्ता में वापसी की रणनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार आगे पुरुषों और अन्य वर्गों के लिए भी इसी तरह की घोषणाएँ आ सकती हैं।
चव्हाण के अनुसार युवा मतदाता 2027 चुनाव में क्या भूमिका निभाएंगे?
चव्हाण ने कहा कि जेन-ज़ी, जेन-अल्फा और मिलेनियल्स सहित युवा पीढ़ी BJP को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक और बेरोज़गारी युवाओं के बीच प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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