पेपर लीक पर विपक्ष छात्रों को हथियार बना रहा है: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई को देहरादून में स्पष्ट आरोप लगाया कि विपक्ष को छात्रों के वास्तविक हित से कोई सरोकार नहीं है — वह केवल छात्रों की आड़ में राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है। उनका यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने और दोषियों को कड़ी सजा देने का संकल्प व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री धामी का विपक्ष पर सीधा हमला
धामी ने कहा कि विपक्ष का रवैया बेहद नकारात्मक है। उनके अनुसार, 'विपक्ष पहले ही अपनी राजनीतिक जमीन खो चुका है और अब बच्चों को हथियार बनाकर आगे करना चाहता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने देश के युवाओं को हमेशा केवल वोट बैंक की तरह देखा है, न कि भविष्य की शक्ति के रूप में। धामी ने यह भी कहा कि कुछ तत्व देश में अस्थिरता, तोड़फोड़ और हिंसा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट का समर्थन
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री मोदी के उस एलान का पुरज़ोर समर्थन किया जिसमें पेपर लीक जैसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की गई है। धामी ने इसे 'ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम' बताते हुए कहा कि इससे पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगेगा, परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी और करोड़ों छात्रों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी मेहनत के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने समस्त उत्तराखंडवासियों की ओर से प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया।
रोज़गार के आँकड़ों पर तुलनात्मक दावा
धामी ने युवा रोज़गार के मोर्चे पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में 17 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार मिला, जबकि 2004 से 2014 के बीच केवल 2 करोड़ लोगों को ही नौकरी मिल सकी थी। धामी ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने, स्किल डेवलपमेंट विभाग की स्थापना और युवाओं के लिए अवसर सृजन को मोदी सरकार की उपलब्धि बताया।
कांग्रेस शासित राज्यों पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार परीक्षाओं की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है, जबकि कांग्रेस-शासित राज्यों में परीक्षाएँ रद्द होती रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से पंजाब का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ भी हाल ही में परीक्षा रद्द हुई। धामी ने यह भी जोड़ा कि संवाद का रास्ता खुला है, लेकिन विपक्ष समस्याएँ सुलझाने की बजाय राजनीति करना चाहता है।
आगे क्या
पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया और समयसीमा अभी सरकार की ओर से स्पष्ट की जानी बाकी है। देश की जनता और छात्र समुदाय इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर नज़र बनाए रखेंगे।