6 अगस्त 2026
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मकर द्वार राजनीति से संसद ठप: आरएलडी सांसद चंदन चौहान बोले — चर्चा छोड़ प्रदर्शन में व्यस्त विपक्ष

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मकर द्वार राजनीति से संसद ठप: आरएलडी सांसद चंदन चौहान बोले — चर्चा छोड़ प्रदर्शन में व्यस्त विपक्ष

सारांश

संसद का मानसून सत्र 'मकर द्वार राजनीति' की भेंट चढ़ रहा है — विपक्ष प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन करता है, सदन ठप रहता है। आरएलडी सांसद चंदन चौहान ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया, जबकि सभापति के हस्तक्षेप से गतिरोध टूटने की उम्मीद जगी है।

मुख्य बातें

आरएलडी सांसद चंदन चौहान ने 6 अगस्त को विपक्ष की 'मकर द्वार राजनीति' को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक बताया।
विपक्षी सांसद संसद के प्रवेश द्वार पर 10 से 20 मिनट प्रदर्शन करते हैं, पर सदन को 15 मिनट भी नहीं चलने देते।
टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेती ने एफसीआरए विधेयक को विदेशी धन की जवाबदेही के लिए जरूरी बताया।
राज्यसभा सभापति ने किरेन रिजिजू को गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण लाने का निर्देश दिया।
संतोष कुमार ने सभापति के हस्तक्षेप को 'छोटी जीत' बताया और सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई।

संसद के मानसून सत्र 2026 में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे पर सत्ता पक्ष ने तीखा पलटवार किया है। राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के सांसद चंदन चौहान ने विपक्ष के आचरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि सदन को जानबूझकर ठप रखने की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है। नई दिल्ली में 6 अगस्त को उन्होंने कहा कि 'मकर द्वार राजनीति' अब संसदीय विमर्श की जगह ले रही है।

मकर द्वार राजनीति क्या है

चंदन चौहान ने कहा, 'अब राजनीति का एक नया रूप सामने आया है, जिसे लोग मकर द्वार राजनीति कहने लगे हैं। विपक्ष के सांसद संसद के प्रवेश द्वार पर 10 से 20 मिनट तक विरोध प्रदर्शन करते हैं, लेकिन सदन को 15 मिनट भी सुचारू रूप से नहीं चलने देते।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि यही समय सदन के भीतर विधेयकों पर बहस में लगाया जाए तो संसदीय प्रक्रिया कहीं अधिक सार्थक बन सकती है।

खड़गे पर सीधा निशाना

चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि खड़गे वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने सरकारें चलाई हैं, इसलिए जब कथनी और करनी में अंतर होता है तो जनता को गुमराह करना संभव नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में पारित एक विधेयक पर लोकसभा अध्यक्ष ने छात्रों के हित को देखते हुए विपक्ष को उनकी माँग से अधिक समय दिया था, जिसके बाद वह विधेयक पारित हो सका।

एफसीआरए विधेयक पर टीडीपी का रुख

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेती ने एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन) विधेयक के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश में बाहर से आने वाले धन का पूरा हिसाब होना चाहिए — किस उद्देश्य से पैसा आया और किस काम में खर्च हुआ, यह सुनिश्चित करना राष्ट्रीय हित में अनिवार्य है।

सभापति का हस्तक्षेप, विपक्ष को उम्मीद

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. संतोष कुमार ने बताया कि राज्यसभा सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वे गृह मंत्री की सदन से अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट करें और विपक्ष की चिंताओं पर उनसे चर्चा करें। संतोष कुमार ने इसे 'छोटी जीत' बताते हुए सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई।

दोनों पक्षों की स्थिति

गौरतलब है कि संसद के दोनों सदनों में पिछले कई दिनों से विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण कई जरूरी विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाई है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर सदन को ठप कर रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस से बच रही है। यह गतिरोध तब तक बना रहने की आशंका है जब तक दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बनती — और सभापति का हस्तक्षेप इस दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जनता दोनों के बीच पिसती है। असली सवाल यह है कि जब सभापति को खुद हस्तक्षेप कर मंत्री को जवाब लाने का निर्देश देना पड़े, तो क्या यह केवल विपक्ष की विफलता है या कार्यपालिका की जवाबदेही का भी संकट है? एफसीआरए जैसे विधेयकों पर बिना पर्याप्त बहस के पारित होने का जोखिम दोनों पक्षों की राजनीतिक सुविधा से पैदा होता है — एक बाधित करता है, दूसरा जल्दबाजी में पास करता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर द्वार राजनीति क्या है?
मकर द्वार राजनीति उस प्रवृत्ति को कहते हैं जिसमें विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार (प्रवेश द्वार) पर 10 से 20 मिनट तक विरोध प्रदर्शन करते हैं, लेकिन सदन के भीतर चर्चा में भाग नहीं लेते। आरएलडी सांसद चंदन चौहान ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक बताया है।
संसद के मानसून सत्र 2026 में क्यों हो रहा है हंगामा?
विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों को लेकर दोनों सदनों में लगातार हंगामा कर रहे हैं, जिससे कई जरूरी विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पा रही। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर सदन ठप कर रहा है, जबकि विपक्ष सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों से भागने का आरोप लगाता है।
एफसीआरए विधेयक क्यों चर्चा में है?
टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेती ने एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन) विधेयक को देश में आने वाले विदेशी धन की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बताया। उनके अनुसार यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि विदेशी पैसे का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो जिसके लिए वह भेजा गया है।
राज्यसभा सभापति ने किरेन रिजिजू को क्या निर्देश दिया?
राज्यसभा सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वे गृह मंत्री की सदन से अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट करें और विपक्ष की चिंताओं पर उनसे चर्चा करें। सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने इसे सकारात्मक हस्तक्षेप और 'छोटी जीत' बताया।
संसद के गतिरोध से आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
सदन के ठप रहने से जरूरी विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाती, जिससे नीतिगत निर्णय और कानून बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। इसका सीधा असर उन नागरिकों पर पड़ता है जिनसे जुड़े विधेयक — जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य या वित्त — संसद में लंबित पड़े रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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