मकर द्वार राजनीति से संसद ठप: आरएलडी सांसद चंदन चौहान बोले — चर्चा छोड़ प्रदर्शन में व्यस्त विपक्ष
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र 2026 में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे पर सत्ता पक्ष ने तीखा पलटवार किया है। राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के सांसद चंदन चौहान ने विपक्ष के आचरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि सदन को जानबूझकर ठप रखने की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है। नई दिल्ली में 6 अगस्त को उन्होंने कहा कि 'मकर द्वार राजनीति' अब संसदीय विमर्श की जगह ले रही है।
मकर द्वार राजनीति क्या है
चंदन चौहान ने कहा, 'अब राजनीति का एक नया रूप सामने आया है, जिसे लोग मकर द्वार राजनीति कहने लगे हैं। विपक्ष के सांसद संसद के प्रवेश द्वार पर 10 से 20 मिनट तक विरोध प्रदर्शन करते हैं, लेकिन सदन को 15 मिनट भी सुचारू रूप से नहीं चलने देते।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि यही समय सदन के भीतर विधेयकों पर बहस में लगाया जाए तो संसदीय प्रक्रिया कहीं अधिक सार्थक बन सकती है।
खड़गे पर सीधा निशाना
चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि खड़गे वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने सरकारें चलाई हैं, इसलिए जब कथनी और करनी में अंतर होता है तो जनता को गुमराह करना संभव नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में पारित एक विधेयक पर लोकसभा अध्यक्ष ने छात्रों के हित को देखते हुए विपक्ष को उनकी माँग से अधिक समय दिया था, जिसके बाद वह विधेयक पारित हो सका।
एफसीआरए विधेयक पर टीडीपी का रुख
तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेती ने एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन) विधेयक के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश में बाहर से आने वाले धन का पूरा हिसाब होना चाहिए — किस उद्देश्य से पैसा आया और किस काम में खर्च हुआ, यह सुनिश्चित करना राष्ट्रीय हित में अनिवार्य है।
सभापति का हस्तक्षेप, विपक्ष को उम्मीद
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. संतोष कुमार ने बताया कि राज्यसभा सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया कि वे गृह मंत्री की सदन से अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट करें और विपक्ष की चिंताओं पर उनसे चर्चा करें। संतोष कुमार ने इसे 'छोटी जीत' बताते हुए सकारात्मक नतीजे की उम्मीद जताई।
दोनों पक्षों की स्थिति
गौरतलब है कि संसद के दोनों सदनों में पिछले कई दिनों से विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण कई जरूरी विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाई है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर सदन को ठप कर रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस से बच रही है। यह गतिरोध तब तक बना रहने की आशंका है जब तक दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बनती — और सभापति का हस्तक्षेप इस दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।