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संसद सुरक्षा चूक: यूएपीए के तहत 13,000 पन्नों की चौथी चार्जशीट दाखिल, आतंकी साजिश के आरोप

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संसद सुरक्षा चूक: यूएपीए के तहत 13,000 पन्नों की चौथी चार्जशीट दाखिल, आतंकी साजिश के आरोप

सारांश

दिसंबर 2023 की संसद सुरक्षा चूक अब चौथी और सबसे विस्तृत चार्जशीट तक पहुंच गई है — 13,000 पन्ने, यूएपीए की गंभीर धाराएं, और आतंकी साजिश के आरोप। जांच का दायरा अब विदेशी संपर्कों और फंडिंग नेटवर्क तक फैल चुका है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 23 मई को संसद सुरक्षा चूक मामले में 13,000 पन्नों की चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।
चार्जशीट यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
आरोपियों पर आतंकी गतिविधि, दंगा भड़काने की साजिश, सबूत मिटाने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप हैं।
जांच में डिजिटल डेटा, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों को साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।
जांच एजेंसियां अब संभावित विदेशी संपर्कों और फंडिंग नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिसंबर 2023 के संसद सुरक्षा चूक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 13,000 पन्नों की चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट 23 मई को अदालत में दाखिल की। इस चार्जशीट में आरोपियों पर आतंकी गतिविधियों, दंगा भड़काने की साजिश और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

चार्जशीट में क्या-क्या शामिल

स्पेशल सेल ने यह विस्तृत चार्जशीट डिजिटल डेटा, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तैयार की है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के साथ-साथ यूएपीए की गंभीर धाराएं भी इसमें शामिल की गई हैं।

आरोपियों पर लगाए गए प्रमुख आरोपों में सरकारी कामकाज में बाधा डालना, ड्यूटी पर तैनात सार्वजनिक सेवकों को रोकना, दंगा भड़काने के लिए उकसाना, सबूत मिटाना, आपराधिक साजिश रचना और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े अपराध शामिल हैं।

पुलिस का दावा: सामान्य प्रदर्शन नहीं, संगठित साजिश

दिल्ली पुलिस के अनुसार, संसद जैसी अत्यंत संवेदनशील जगह पर सुरक्षा में सेंध लगाने की यह कोशिश महज सामान्य विरोध-प्रदर्शन नहीं थी। जांच में संगठित साजिश और बड़े स्तर की पूर्व-तैयारी के सबूत सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि इस घटना के जरिए देशभर में भय का माहौल बनाने और अशांति फैलाने की कोशिश की गई थी।

जांच एजेंसियां अब इस मामले से जुड़े संभावित नेटवर्क, फंडिंग स्रोतों और विदेशी संपर्कों की भी गहन जांच कर रही हैं।

घटनाक्रम: दिसंबर 2023 की वह दोपहर

दिसंबर 2023 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कुछ युवकों ने विजिटर्स गैलरी से लोकसभा सदन के भीतर छलांग लगाकर स्मोक कैनिस्टर छोड़ दिए थे। इस घटना ने पूरे देश में संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और तत्काल राजनीतिक हंगामा मचा था। घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।

गौरतलब है कि यह चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट है, जो दर्शाती है कि जांच का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है और मामला शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक जटिल निकला है।

आगे क्या होगा

अदालत अब इस 13,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान लेगी और आगे की कार्यवाही तय करेगी। यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है, जिससे आरोपियों की न्यायिक हिरासत लंबी खिंच सकती है। जांच एजेंसियों का ध्यान अब मामले से जुड़े संभावित बाहरी संपर्कों और फंडिंग की कड़ियों को उजागर करने पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 पन्नों के साथ — यह संकेत देता है कि जांच एजेंसियां इस मामले को एक सुनियोजित आतंकी षड्यंत्र के रूप में स्थापित करने में जुटी हैं, न कि महज एक आवेगपूर्ण प्रदर्शन के रूप में। यूएपीए की धाराओं का प्रयोग आरोपियों के लिए जमानत की राह लगभग बंद कर देता है — यह कानूनी रणनीति उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी खुद चार्जशीट। विदेशी संपर्कों और फंडिंग की जांच का उल्लेख गंभीर है, लेकिन अब तक कोई ठोस सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है — इस दावे को स्वतंत्र सत्यापन की आवश्यकता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद सुरक्षा चूक मामले में चौथी चार्जशीट क्यों दाखिल की गई?
जांच के दौरान नए डिजिटल साक्ष्य, चैट रिकॉर्ड और तकनीकी डेटा सामने आने पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यह चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। प्रत्येक सप्लीमेंट्री चार्जशीट जांच के नए पहलुओं और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखती है।
यूएपीए के तहत आरोपी होने का क्या मतलब है?
यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) एक कठोर आतंकवाद-रोधी कानून है, जिसके तहत जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है। इस कानून के तहत आरोपी को लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रखा जा सकता है और सजा भी अधिकतम होती है।
दिसंबर 2023 की संसद सुरक्षा चूक घटना क्या थी?
दिसंबर 2023 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कुछ युवकों ने विजिटर्स गैलरी से लोकसभा सदन के भीतर छलांग लगाकर स्मोक कैनिस्टर छोड़ दिए थे। इस घटना ने संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए और देशभर में हंगामा मचा था।
आरोपियों पर कौन-कौन से आरोप लगाए गए हैं?
आरोपियों पर आतंकी गतिविधि, दंगा भड़काने की साजिश, सरकारी कामकाज में बाधा, ड्यूटी पर तैनात सार्वजनिक सेवकों को रोकना, सबूत मिटाना और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप हैं। ये आरोप यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) दोनों के तहत लगाए गए हैं।
इस मामले में जांच आगे कहां जाएगी?
जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े संभावित विदेशी संपर्कों, फंडिंग स्रोतों और व्यापक नेटवर्क की जांच कर रही हैं। अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आगे की सुनवाई की तारीख तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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