पश्चिम बंगाल में पोस्टल बैलट के मुद्दे पर विवाद: सुवेंदु अधिकारी के आरोपों का पुलिस ने किया खंडन
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में पोस्टल बैलट विवाद चल रहा है।
- सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस पर हेराफेरी का आरोप लगाया है।
- पुलिस ने आरोपों का खंडन किया है और पारदर्शिता पर जोर दिया है।
- चुनाव ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी फॉर्म 12डी के माध्यम से आवेदन करते हैं।
- वोट डालने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है।
कोलकाता, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में आगामी लोकसभा चुनावों से पहले पुलिस कर्मचारियों के पोस्टल बैलट को लेकर एक विवाद उठ खड़ा हुआ है। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस, टीएमसी के इशारे पर, पुलिसकर्मियों के वोटों में हेराफेरी कर रही है। इसी बीच, पुलिस ने इन सभी आरोपों का पूरी तरह खंडन किया और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया है।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल के माध्यम से इन आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि पोस्टल बैलट (पीबी) को इकट्ठा करने या रिजर्व अधिकारियों द्वारा संभालने की कोई गुंजाइश नहीं है। पीबी केवल पोस्टल वोटिंग सेंटर (पीवीसी) पर पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी किए जाते हैं। वोटर वोट डालने के बाद बैलट को सील कर ड्रॉप बॉक्स में डालता है, और इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी फॉर्म 12डी के जरिए आवेदन करते हैं, जिसकी जांच संबंधित रिटर्निंग अधिकारी करते हैं। जिन वोटरों को अनुमति दी गई है, उन्हें एसएमएस के माध्यम से पीवीसी की जानकारी मिलती है, और केंद्र रिटर्निंग अधिकारी के मुख्यालय पर लगाए जाते हैं। यहाँ राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में वोटिंग होती है। पुलिस ने जोर देकर कहा कि पीबी को पीवीसी से बाहर ले जाना या किसी अधिकारी द्वारा इकट्ठा करना असंभव है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
भाजपा नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे पर टीएमसी सरकार को घेरते हुए कहा कि टीएमसी-नियंत्रित पश्चिम बंगाल पुलिस वेलफेयर संगठन की लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशों से वह स्तब्ध और क्रोधित हैं। अधिकारी ने झारग्राम जिले के पुलिस अधीक्षक के 7 मार्च 2026 के आदेश का हवाला दिया था, जिसमें पुलिसकर्मियों के पोस्टल बैलट और ईडी वोटों को संभालने का जिम्मा झारग्राम जिला पुलिस वेलफेयर के 'ज्वाइंट कन्वीनर, वेलफेयर' को सौंपा गया था।
उन्होंने इसे एक राज्यव्यापी साजिश करार दिया, जिसमें पुलिस रिजर्व अधिकारियों को हर पुलिसकर्मी से बैलट इकट्ठा करने और वेलफेयर संगठन के जरिए भेजने का आदेश दिया जा रहा है।