पश्चिम बंगाल मतगणना 2026: ड्रोन कैमरों और केंद्रीय बलों की त्रिस्तरीय सुरक्षा में खुलेंगी ईवीएम
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद सोमवार, 4 मई 2026 को मतगणना शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित मतगणना केंद्रों पर ड्रोन कैमरों, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की संयुक्त तैनाती के साथ अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियाँ की गई हैं।
कटवा और पुरुलिया में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
कटवा सब-डिवीजन में तीन विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना के लिए कटवा कॉलेज परिसर को आधिकारिक केंद्र बनाया गया है। सोमवार सुबह से ही पूरे परिसर को सील कर दिया गया और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। अधिकारियों के अनुसार यहाँ त्रिस्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत केवल अधिकृत कर्मियों को कई चरणों की सघन जाँच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।
पुरुलिया में स्थित सिधू कान्हो बिरसा विश्वविद्यालय को पुरुलिया, बलरामपुर, बागमुंडी और जयपुर — चार विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना के लिए केंद्र बनाया गया है। यहाँ भी पोलिंग कर्मी और उम्मीदवार पहुँच चुके हैं और सघन जाँच के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
कोलकाता में वाहन प्रतिबंध और बैरिकेडिंग
कोलकाता के राशबिहारी विधानसभा क्षेत्र के लिए बैलीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल को मतगणना केंद्र बनाया गया है। यहाँ केंद्रीय बलों, राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस की भारी तैनाती की गई है। सुरक्षा के मद्देनज़र वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और सभी प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
मालदा में ड्रोन निगरानी और 163 बटालियन की तैनाती
मालदा कॉलेज में पाँच विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना होगी। यहाँ भी तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है और 163 बटालियन को तैनात किया गया है। इस बार विशेष रूप से ड्रोन कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है, जिससे मतगणना केंद्र के आसपास की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ जताई जाती रही हैं।
राज्यव्यापी सतर्कता और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है। इस बार प्रशासन ने राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की संयुक्त तैनाती सुनिश्चित की है। राज्यभर में माहौल सतर्क और नियंत्रित बताया जा रहा है। मतगणना के नतीजे आने के साथ ही राजनीतिक समीकरण स्पष्ट होंगे और यह तय होगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ता की बागडोर किसके हाथ जाएगी।