पाटलिपुत्र स्टेशन पर परीक्षार्थियों का पथराव: दुकानें क्षतिग्रस्त, यात्री व पुलिसकर्मी घायल
सारांश
मुख्य बातें
पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन, पटना पर 14 जून 2026 की रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक भारी उपद्रव हुआ, जब मद्य निषेध विभाग की परीक्षा में शामिल होने आए सैकड़ों अभ्यर्थियों ने ट्रेनों में भीड़ और अपर्याप्त व्यवस्था से नाराज होकर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में स्टेशन परिसर की कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, अनेक यात्री चोटिल हुए और कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शी राजकुमार के अनुसार, परीक्षा के कारण स्टेशन पर असाधारण भीड़ थी और कोई विशेष ट्रेन नहीं चलाई गई थी। जो भी ट्रेनें आ रही थीं, वे पहले से खचाखच भरी थीं। पर्याप्त यातायात व्यवस्था न होने से नाराज अभ्यर्थियों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे मौके पर तैनात प्रशासनिक कर्मी पीछे हट गए और स्टेशन की स्टॉलों को नुकसान पहुँचा।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी करन कुमार ने बताया कि अचानक भड़के आक्रोश में युवाओं ने ट्रेनों पर पथराव किया। यह हंगामा रात 12:30 बजे से शुरू होकर सुबह 5 बजे तक जारी रहा, जिसे पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद काबू में लिया।
आईजी का बयान
आईजी जितेंद्र राणा ने बताया कि लगभग 200 से 250 अभ्यर्थी ट्रेन को रोके हुए थे। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और जिला पुलिस बल के संयुक्त प्रयास से भीड़ को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों ने पथराव शुरू कर दिया। राणा के अनुसार, जान-माल की हानि रोकने के लिए पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की और अंततः भीड़ को हटा दिया गया।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
पुलिस ने पथराव करने वालों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू की जा चुकी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उपद्रवियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद सभी ट्रेनें पुनः सामान्य रूप से चलने लगी हैं।
आम जनता और यात्रियों पर असर
घंटों चले इस उपद्रव के दौरान स्टेशन पर मौजूद सामान्य यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई यात्रियों को पथराव में चोटें आईं और स्टेशन की दुकानों को आर्थिक नुकसान हुआ। यह घटना ऐसे समय में हुई जब बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान यातायात प्रबंधन की व्यवस्था पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शी बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान में जुटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी परीक्षाओं के दौरान रेलवे प्रशासन को विशेष ट्रेनें चलाने और भीड़ प्रबंधन की अग्रिम योजना बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो।