पटना के गांधी मैदान में विजयादशमी: 90 फीट रावण दहन, सीएम सम्राट चौधरी ने चलाया प्रतीकात्मक बाण
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी पर्व पर भव्य रावण दहन समारोह संपन्न हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने धनुष से प्रतीकात्मक बाण चलाकर रावण वध की रस्म पूरी की। इस अवसर पर 90 फीट ऊँचे रावण, 85 फीट ऊँचे मेघनाद और 80 फीट ऊँचे कुंभकर्ण के विशाल पुतलों को अग्नि के हवाले किया गया। पुतले जलते ही रंग-बिरंगी आतिशबाजी से गांधी मैदान का आसमान जगमगा उठा और पूरा परिसर 'जय श्रीराम' के जयकारों से गूंज उठा।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीराम की झांकी रथ और वानर सेना के गांधी मैदान में प्रवेश के साथ हुई। भगवान राम और लक्ष्मण की झांकी के दर्शन के लिए उपस्थित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित सभी गणमान्य अतिथियों ने भगवान राम और लक्ष्मण की आरती की। प्रतीक स्वरूप वीर हनुमान द्वारा सोने की लंका के दहन के पश्चात मुख्यमंत्री ने धनुष पर बाण चलाकर रावण दहन की परंपरा का निर्वहन किया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन, नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और मंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित अनेक प्रमुख जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। पटना और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर्व में भाग लेने पहुँचे।
सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्था
जिला प्रशासन की ओर से इस विशाल आयोजन के लिए व्यापक तैयारियाँ की गई थीं। दर्शकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए अलग से दर्शक दीर्घा तैयार की गई थी और बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। पुलिस बल और जिला प्रशासन के अधिकारी पूरे कार्यक्रम के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहे।
आम जनता पर असर
विजयादशमी के इस भव्य आयोजन ने पटना में उत्सव और धार्मिक आस्था का उत्साहपूर्ण वातावरण निर्मित किया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में दशहरा पर्व की धूम है और बड़े-बड़े रावण दहन कार्यक्रमों में जनसैलाब उमड़ रहा है। गांधी मैदान का यह आयोजन बिहार के सबसे प्रतिष्ठित दशहरा समारोहों में से एक माना जाता है, जो दशकों से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता आया है।
गौरतलब है कि इस वर्ष रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों की ऊँचाई पिछले वर्षों की परंपरा के अनुरूप बनाए रखी गई, जो इस आयोजन की भव्यता और सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाती है। आने वाले वर्षों में भी इस परंपरा के और भव्य रूप में जारी रहने की संभावना है।