पवन कल्याण ने काकीनाडा मछुआरों की सुरक्षा व आजीविका के लिए दिए ठोस निर्देश, दिवाली बाद होगा गाँवों का दौरा
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 30 अक्टूबर 2026 को काकीनाडा जिले के तटीय अधिकारियों और प्रभावित बस्तियों के निवासियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक कर चक्रवात अर्नब के बाद मछुआरा समुदाय की सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक कदम उठाने के निर्देश दिए। पंचायत राज, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और वन मंत्री के रूप में पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि तटीय मछुआरा समुदाय लंबे समय से अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है और अब स्थायी समाधान आवश्यक है।
मुख्य निर्देश और कार्ययोजना
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए बीमा सुविधा की संभावनाओं का अध्ययन करने और उपयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने काकीनाडा जिला प्रशासन को तटीय मछुआरा समुदाय की चुनौतियों के स्थायी निराकरण हेतु विस्तृत योजनाएँ बनाने को कहा। पवन कल्याण ने यह भी घोषणा की कि वे दिवाली के बाद मछुआरा गाँवों का व्यक्तिगत दौरा करेंगे और वहाँ के लोगों की समस्याओं का स्वयं आकलन करेंगे।
उप्पाडा में सुरक्षात्मक समुद्री दीवार को मिली प्राथमिकता
उपमुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर को उप्पाडा तटीय क्षेत्र में सुरक्षात्मक समुद्री दीवार (सी वॉल) के डिज़ाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने तथा जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को पहले भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर इस सुरक्षात्मक दीवार को कोनापापेटा तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को शीघ्र अनुमोदित कराने के प्रयास करने को भी कहा।
चक्रवात अर्नब से हुई तबाही और राहत कार्यों की समीक्षा
उप्पाडा-काकीनाडा बीच रोड चक्रवात से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने और स्थानीय तटीय आबादी की आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी बताया गया कि सुरदापेटा, मायापटनम, कोठापटनम और नायकार कॉलोनी के निवासियों को समुद्री पानी बस्तियों में घुसने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा; हालाँकि जिला प्रशासन ने सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर पानी पूरी तरह निकाल दिया।
10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित पहुँचाया गया
पवन कल्याण ने काकीनाडा जिला प्रशासन की सराहना करते हुए बताया कि जिले की 92 तटीय बस्तियों से 10,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया और 102 पुनर्वास केंद्रों में उन्हें आश्रय दिया गया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहने चाहिए।
नुकसान के आकलन और आगे की राह
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि चक्रवात से मकानों, फसलों, नौकाओं, मछली पकड़ने के जाल और करघों को हुए नुकसान के आकलन का काम जल्द पूरा किया जाए और एक व्यापक मूल्यांकन रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाए। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश की तटरेखा बार-बार चक्रवाती तूफानों की चपेट में आ रही है और मछुआरा समुदाय के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास नीति की माँग तेज़ होती जा रही है। पवन कल्याण का दिवाली बाद प्रस्तावित दौरा यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे पर सीधे ज़मीनी संपर्क से नीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।