पीरियड्स में स्वच्छता की अनदेखी पड़ सकती है भारी, NHM की ये 3 ज़रूरी सलाहें जानें
सारांश
मुख्य बातें
मासिक धर्म महिलाओं की एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है, फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस दौरान साफ-सफाई में ज़रा-सी लापरवाही यूटीआई (मूत्र मार्ग संक्रमण), पेल्विक इंफेक्शन, तेज़ बुखार और त्वचा संबंधी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल तीन मूलभूत सावधानियाँ अपनाकर इन अधिकांश जोखिमों को टाला जा सकता है।
मासिक धर्म स्वच्छता क्यों है इतनी ज़रूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमज़ोर हो सकती है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। NHM के जागरूकता कार्यक्रमों में यह बात बार-बार रेखांकित की गई है कि मासिक धर्म स्वच्छता केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के स्वास्थ्य का विषय है। गौरतलब है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सही जानकारी के अभाव में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।
सुरक्षित और प्रमाणित सैनिटरी उत्पादों का चुनाव
पीरियड्स के दौरान हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले सैनिटरी पैड, टैम्पून या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाज़ार में उपलब्ध सस्ते और अप्रमाणित ब्रांड के उत्पादों से बचें, क्योंकि ये त्वचा में जलन और बैक्टीरियल संक्रमण का कारण बन सकते हैं। हमेशा त्वचा-अनुकूल और विश्वसनीय ब्रांड को प्राथमिकता दें।
समय पर सैनिटरी पैड बदलना है अनिवार्य
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक सैनिटरी पैड को 4 से 6 घंटे से अधिक समय तक नहीं पहनना चाहिए। गर्मी के मौसम में यह अवधि और कम होनी चाहिए, क्योंकि नमी और गर्मी में बैक्टीरिया तेज़ी से पनपते हैं। नियमित बदलाव से न केवल संक्रमण, बल्कि जलन और खुजली जैसी तकलीफें भी काफी हद तक कम होती हैं।
व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें
पीरियड्स के दौरान दिन में 2 से 3 बार साफ पानी से निजी अंगों की सफाई करनी चाहिए। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि सफाई हमेशा आगे से पीछे की दिशा में करें, ताकि बैक्टीरिया मूत्र मार्ग में न पहुँचें। इसके अलावा, सूती अंडरगारमेंट्स पहनें, टाइट कपड़ों से बचें और पैड बदलते समय हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएँ।
जागरूकता और खुली बातचीत है समाधान
यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब सरकार और स्वास्थ्य संगठन मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर निरंतर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माताओं और परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वे किशोरियों को मासिक धर्म के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी दें, ताकि वे भविष्य में इन जोखिमों से सुरक्षित रह सकें।