राम मंदिर चढ़ावा विवाद: पिनाराई विजयन ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने 28 जून 2026 को अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में उच्च-स्तरीय जांच की मांग की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआईएम — के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट के ज़रिए यह माँग रखी।
विजयन के आरोप: क्या कहा
विजयन ने वित्तीय गड़बड़ी की खबरों को 'बेहद गंभीर' करार देते हुए कहा कि इनसे लोगों की आस्था और धार्मिक भावनाओं के दुरुपयोग को लेकर चिंताजनक सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने राजनीतिक फायदे के लिए जनता की आस्था का इस्तेमाल किया, उन्होंने इसकी आड़ में सुनियोजित ढंग से वित्तीय धोखाधड़ी भी की।
विजयन ने यह भी दावा किया कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों के संघ परिवार से जुड़े संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध थे। उनके अनुसार, ट्रस्टियों की यह जिम्मेदारी है कि वे स्पष्ट करें कि लाखों भक्तों से एकत्र किया गया धन किस प्रकार व्यय किया गया।
PM मोदी से जवाब की माँग
विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने को कहा, यह तर्क देते हुए कि मोदी ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक संसदीय अधिसूचना के ज़रिए गठित ट्रस्ट पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता अनिवार्य हो गई है।
जांच की माँग और तर्क
विजयन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दे। उनका कहना था कि केवल स्वतंत्र और न्यायिक निगरानी वाली जांच ही सच्चाई उजागर कर सकती है, जवाबदेही सुनिश्चित कर सकती है और मंदिर परियोजना में योगदान देने वाले लाखों श्रद्धालुओं का विश्वास पुनः स्थापित कर सकती है।
गौरतलब है कि इस मामले की जांच कर रही एसआईटी अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। विजयन के अनुसार, मंदिर के फंड को लेकर जारी यह विवाद संघ परिवार की राजनीति के 'असली चरित्र' को उजागर करता है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे के प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। विजयन की फेसबुक पोस्ट ने इस मामले में एक नया राजनीतिक आयाम जोड़ दिया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रस्ट को संसदीय प्रक्रिया के तहत गठित किया गया था, इसलिए उसके वित्तीय लेखे-जोखे की पारदर्शिता सार्वजनिक हित का विषय है।
आगे क्या होगा
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और आठ गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। विजयन की माँग के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और ट्रस्ट इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग राजनीतिक दबाव बढ़ाने का काम कर सकती है।