24 जुलाई 2026
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पीएम आवास के बाहर विपक्षी प्रदर्शन पर सैकड़ों वकीलों ने सीजेआई को लिखा पत्र, सुप्रीम कोर्ट से दिशा-निर्देश की मांग

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पीएम आवास के बाहर विपक्षी प्रदर्शन पर सैकड़ों वकीलों ने सीजेआई को लिखा पत्र, सुप्रीम कोर्ट से दिशा-निर्देश की मांग

सारांश

देशभर के सैकड़ों वकीलों ने सीजेआई को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि 21 जुलाई को पीएम आवास के बाहर हुए विपक्षी प्रदर्शन पर संज्ञान लिया जाए। यह मामला संवैधानिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की महीन रेखा को परिभाषित करने की माँग बन चुका है।

मुख्य बातें

देशभर के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने 24 जुलाई को सीजेआई को संयुक्त प्रतिवेदन सौंपा।
21 जुलाई को राहुल गांधी , मल्लिकार्जुन खड़गे , प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव सहित विपक्षी सांसद बिना पूर्व अनुमति पीएम आवास के बाहर एकत्र हुए थे।
प्रदर्शन जंतर-मंतर लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित किया गया था; सांसदों ने पीएम और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और राहुल गांधी से बातचीत कर प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की।
वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से उच्च सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रदर्शनों पर व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की माँग की है।

नई दिल्ली में 24 जुलाई को देशभर के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को एक संयुक्त प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें 21 जुलाई को प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर हुए विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील की गई है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि न्यायालय उच्च सुरक्षा वाले संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति होने वाले प्रदर्शनों के संबंध में व्यापक और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।

प्रतिवेदन में क्या आरोप लगाए गए

प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई सांसद 21 जुलाई को बिना पूर्व अनुमति या अधिकृत स्वीकृति के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर एकत्र हुए।

अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, और इस प्रकार का अनधिकृत जमावड़ा सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था तथा कानून के शासन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाता है।

सुप्रीम कोर्ट से क्या माँगा गया

प्रतिवेदन में सुप्रीम कोर्ट से तीन प्रमुख अनुरोध किए गए हैं — पहला, पूरे घटनाक्रम की न्यायिक परीक्षा; दूसरा, यह निर्धारित करना कि क्या यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप की माँग करता है; और तीसरा, भविष्य में उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में किसी भी अनधिकृत प्रदर्शन या भीड़ जुटाने को रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना।

अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, किंतु इसका प्रयोग संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए — विशेषकर उन स्थानों पर जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा का प्रश्न जुड़ा हो।

मुख्य घटनाक्रम: प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

21 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संसद मार्च में शामिल छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में विपक्षी सांसदों ने अगले दिन प्रधानमंत्री आवास के समीप धरना दिया था।

राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में सांसद प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सड़क पर बैठ गए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसी दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और राहुल गांधी से मुलाकात कर प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव चरम पर है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रतिवेदन पर स्वतः संज्ञान लेता है या नहीं, और क्या न्यायालय उच्च सुरक्षा क्षेत्रों में प्रदर्शन के अधिकार की सीमाओं को परिभाषित करने वाला कोई ऐतिहासिक निर्देश जारी करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार यह मांग सत्तापक्ष से नहीं, बल्कि स्वतंत्र अधिवक्ताओं के एक समूह से आई है — जो इसे राजनीतिक रंग देने से बचाती भी है और संदेह के घेरे में लाती भी है। सुप्रीम कोर्ट यदि इस पर संज्ञान लेता है, तो उसे विरोध के अधिकार और सुरक्षा प्रतिबंधों के बीच एक ऐसी रेखा खींचनी होगी जो भविष्य में सत्ता में बैठे किसी भी दल के लिए लागू हो — यही इस मामले की असली कसौटी है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वकीलों ने सीजेआई को पत्र क्यों लिखा?
देशभर के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने 21 जुलाई को पीएम आवास के बाहर विपक्षी सांसदों के कथित अनधिकृत प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने और उच्च सुरक्षा क्षेत्रों में प्रदर्शनों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग को लेकर 24 जुलाई को सीजेआई को प्रतिवेदन सौंपा। उनका तर्क है कि पीएम आवास एक अत्यंत संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र है जहाँ बिना अनुमति जमावड़ा कानून के शासन पर सवाल उठाता है।
21 जुलाई को पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन क्यों हुआ था?
21 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संसद मार्च में शामिल छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने पीएम आवास के निकट धरना दिया। प्रदर्शनकारी सांसदों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी सांसद शामिल थे। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौके पर पहुँचे और राहुल गांधी से बातचीत कर प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट से क्या दिशा-निर्देश माँगे गए हैं?
अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से तीन माँगें रखी हैं — पूरे घटनाक्रम की न्यायिक परीक्षा, यह तय करना कि क्या मामला न्यायिक हस्तक्षेप की माँग करता है, और भविष्य में उच्च सुरक्षा वाले संरक्षित क्षेत्रों में अनधिकृत प्रदर्शन या भीड़ जुटाने को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना।
क्या विरोध-प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार इस मामले में बाधित होता है?
अधिवक्ताओं ने स्वयं माना है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन उनका तर्क है कि इसका प्रयोग कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में कानून का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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