पीएम आवास के बाहर विपक्षी प्रदर्शन पर सैकड़ों वकीलों ने सीजेआई को लिखा पत्र, सुप्रीम कोर्ट से दिशा-निर्देश की मांग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 24 जुलाई को देशभर के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को एक संयुक्त प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें 21 जुलाई को प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर हुए विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील की गई है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि न्यायालय उच्च सुरक्षा वाले संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति होने वाले प्रदर्शनों के संबंध में व्यापक और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।
प्रतिवेदन में क्या आरोप लगाए गए
प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई सांसद 21 जुलाई को बिना पूर्व अनुमति या अधिकृत स्वीकृति के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर एकत्र हुए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, और इस प्रकार का अनधिकृत जमावड़ा सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था तथा कानून के शासन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाता है।
सुप्रीम कोर्ट से क्या माँगा गया
प्रतिवेदन में सुप्रीम कोर्ट से तीन प्रमुख अनुरोध किए गए हैं — पहला, पूरे घटनाक्रम की न्यायिक परीक्षा; दूसरा, यह निर्धारित करना कि क्या यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप की माँग करता है; और तीसरा, भविष्य में उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में किसी भी अनधिकृत प्रदर्शन या भीड़ जुटाने को रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना।
अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, किंतु इसका प्रयोग संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए — विशेषकर उन स्थानों पर जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा का प्रश्न जुड़ा हो।
मुख्य घटनाक्रम: प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
21 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संसद मार्च में शामिल छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में विपक्षी सांसदों ने अगले दिन प्रधानमंत्री आवास के समीप धरना दिया था।
राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में सांसद प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सड़क पर बैठ गए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसी दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और राहुल गांधी से मुलाकात कर प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव चरम पर है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रतिवेदन पर स्वतः संज्ञान लेता है या नहीं, और क्या न्यायालय उच्च सुरक्षा क्षेत्रों में प्रदर्शन के अधिकार की सीमाओं को परिभाषित करने वाला कोई ऐतिहासिक निर्देश जारी करता है।