पीएम मोदी के काफिले में कटौती पर पूर्व डीजीपी बोले — पहल सराहनीय, सुरक्षा से समझौता नहीं

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पीएम मोदी के काफिले में कटौती पर पूर्व डीजीपी बोले — पहल सराहनीय, सुरक्षा से समझौता नहीं

सारांश

पीएम मोदी ने काफिला छोटा कर ऊर्जा बचत का संदेश दिया — कहा नहीं, करके दिखाया। लेकिन पूर्व डीजीपी वैद और विक्रम सिंह ने एकमत होकर कहा: पाकिस्तान और बांग्लादेश के चरमपंथी संगठनों के खतरे के बीच प्रधानमंत्री की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं चलेगा।

मुख्य बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा बचत अपील के तहत अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.
वैद ने पहल की सराहना की, लेकिन कहा — 'चंद लीटर पेट्रोल के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।' उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि ब्लॉक प्रमुख तक दस गाड़ियाँ लेकर चलते हैं — पीएम का यह उदाहरण अनुकरणीय है।
दोनों पूर्व अधिकारियों ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के चरमपंथी संगठनों से प्रधानमंत्री को खतरे का हवाला दिया।
SPG की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य बनाए रखने की माँग, चाहे काफिले का आकार कुछ भी हो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ऊर्जा बचत' अपील और उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाए जाने के फैसले पर देश के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने 14 मई को अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस. पी. वैद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने पहल की तारीफ की, लेकिन एकमत होकर कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में अभेद्य रहनी चाहिए।

पूर्व डीजीपी वैद की प्रतिक्रिया

एस. पी. वैद ने कहा कि प्रधानमंत्री के संदेश को गंभीरता से लेते हुए देशवासियों को ऊर्जा बचत करनी चाहिए और गाड़ियों का न्यूनतम उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने काफिला छोटा कर केवल कहा ही नहीं, बल्कि खुद करके भी दिखाया — यह नेतृत्व का असली उदाहरण है।

हालांकि, वैद ने सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता भी जताई। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की ज़रूरत केवल देश को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को है, और दुनिया में सबसे अधिक खतरा उन्हीं को है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के कई कट्टरपंथी संगठन सीधे प्रधानमंत्री को धमकी देते हैं। वैद ने कहा, 'चंद लीटर पेट्रोल बचाकर देश पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा — कुछ लीटर ईंधन बचाने के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।'

विक्रम सिंह का संदेश — नेताओं को लेनी चाहिए सीख

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने एक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस देश में ब्लॉक प्रमुख, प्रधान और पार्षद तक अपने काफिले में दस-दस गाड़ियाँ लेकर चलते हैं, उस देश के प्रधानमंत्री यदि दो गाड़ियों के काफिले के साथ चल रहे हैं, तो यह अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के हर जनप्रतिनिधि और अधिकारी को इससे सीख लेनी चाहिए।

विक्रम सिंह ने भी सुरक्षा की अनिवार्यता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री को न केवल घरेलू राष्ट्र-विरोधी तत्वों से, बल्कि पड़ोसी देशों के चरमपंथी संगठनों से भी खतरा है। उनके अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन का यह दायित्व है कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की सुरक्षा व्यवस्था पहले जैसी अभेद्य बनी रहे, चाहे इसके लिए आवश्यक सुधार ही क्यों न करने पड़ें।

SPG की भूमिका और सुरक्षा ढाँचा

प्रधानमंत्री की सुरक्षा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के हाथों में होती है, जो केंद्र सरकार की एक विशेष सुरक्षा एजेंसी है। पूर्व अधिकारियों का कहना है कि काफिले के आकार में बदलाव का निर्णय SPG के परामर्श से लिया गया होगा, और एजेंसी ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा होगा।

ऊर्जा बचत की व्यापक पहल का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री की यह पहल सांकेतिक होते हुए भी व्यापक सामाजिक संदेश देती है — कि नेतृत्व केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण से भी होता है। गौरतलब है कि काफिले की संख्या में कटौती ऊर्जा बचत के प्रतीकात्मक प्रदर्शन के रूप में देखी जा रही है, न कि सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव के रूप में।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र और राज्य स्तर के अन्य नेता भी इस पहल का अनुसरण करते हैं, और क्या SPG इस नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा मानकों की औपचारिक समीक्षा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह संदेश सत्ता के निचले पायदानों तक पहुँचेगा — जहाँ ब्लॉक प्रमुख और पार्षद दस-दस गाड़ियों के काफिले में चलते हैं। पूर्व डीजीपी की चिंता वाजिब है: भारत के भू-राजनीतिक परिवेश में, जहाँ पड़ोसी देशों के चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं, प्रधानमंत्री की सुरक्षा किसी भी सांकेतिक इशारे से ऊपर है। मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है कि ऊर्जा बचत का संदेश तभी सार्थक होगा जब यह संस्थागत बदलाव में बदले — केवल शीर्ष नेतृत्व के व्यक्तिगत आचरण तक सीमित न रहे।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने काफिले में गाड़ियाँ क्यों कम कीं?
पीएम मोदी ने ऊर्जा बचत की अपील के तहत अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाई, ताकि ईंधन संरक्षण का व्यावहारिक संदेश दिया जा सके। यह कदम प्रतीकात्मक है और देश के अन्य नेताओं व अधिकारियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व डीजीपी एस. पी. वैद ने मोदी की सुरक्षा पर क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस. पी. वैद ने कहा कि पीएम की पहल सराहनीय है, लेकिन चंद लीटर पेट्रोल बचाने के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों से प्रधानमंत्री को सर्वाधिक खतरे का उल्लेख किया।
विक्रम सिंह ने काफिला कटौती पर क्या टिप्पणी की?
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि जब देश में ब्लॉक प्रमुख और पार्षद तक दस गाड़ियों के काफिले में चलते हैं, तो पीएम का दो गाड़ियों में चलना अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से इसे अपनाने की अपील की।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा कौन देखता है और क्या यह प्रभावित होगी?
प्रधानमंत्री की सुरक्षा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) देखती है। पूर्व अधिकारियों के अनुसार, काफिले के आकार में बदलाव SPG के परामर्श से हुआ होगा और सुरक्षा प्रोटोकॉल अभेद्य बने रहने चाहिए।
क्या यह ऊर्जा बचत पहल केवल प्रतीकात्मक है?
पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मुख्यतः प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए है। इसका व्यापक प्रभाव तभी होगा जब निचले स्तर के नेता और अधिकारी भी इसका अनुसरण करें — केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित रहने से ऊर्जा बचत का वास्तविक लक्ष्य सीमित रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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