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नीट-यूजी 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र बोला — PM मोदी खुद कर रहे हैं निगरानी

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नीट-यूजी 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र बोला — PM मोदी खुद कर रहे हैं निगरानी

सारांश

नीट-यूजी 2026 विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है — और केंद्र ने खुलासा किया कि PM मोदी खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। अदालत ने NTA को 'एड-हॉक' बताते हुए व्यक्तिगत जवाबदेही की माँग की और मंत्रालय से हलफनामा तलब किया।

मुख्य बातें

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि PM नरेंद्र मोदी नीट-यूजी 2026 विवाद की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं।
नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने NTA की कार्यशैली को 'एड-हॉक' करार दिया और व्यक्तिगत जवाबदेही की माँग की।
अदालत ने UPSC का उदाहरण देते हुए कहा कि NTA को बड़े पैमाने की परीक्षाएँ विवाद-रहित तरीके से आयोजित करने वाली संस्थाओं से सीखना चाहिए।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय को NTA की क्षमता सुदृढ़ीकरण पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
याचिकाओं में नीट-यूजी को पूर्णतः CBT प्रारूप में बदलने की माँग; मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में।

सर्वोच्च न्यायालय में 29 मई 2026 को नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद पर हुई अहम सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं। यह बयान उस वक्त आया जब न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और व्यक्तिगत जवाबदेही की माँग की।

सुनवाई का घटनाक्रम

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ नीट-यूजी परीक्षा में सुधारों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में परीक्षा को पूर्णतः कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में बदलने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग की गई है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इसका सीधा असर देश के युवाओं पर पड़ता है।

तुषार मेहता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।' यह पहली बार है जब सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में इस स्तर की प्रत्यक्ष राजनीतिक निगरानी की पुष्टि की है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ

पीठ ने NTA की कार्यशैली को 'एड-हॉक' करार देते हुए कहा कि देश की परीक्षा संस्थाओं को मज़बूत और स्थायी ढाँचे के साथ काम करना चाहिए। अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उदाहरण देते हुए कहा कि NTA को उन संस्थाओं से सीखना चाहिए जिन्होंने बड़े पैमाने पर परीक्षाएँ बिना विवाद के सफलतापूर्वक आयोजित की हैं।

अदालत ने कहा, 'असल समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती। यह पता होना चाहिए कि कौन व्यक्ति किस जिम्मेदारी को संभाल रहा है।' न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि सिर्फ संस्थागत ज़िम्मेदारी तय करने से काम नहीं चलेगा — व्यक्तिगत जवाबदेही अनिवार्य है।

छात्रों और परिवारों पर असर

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे के मानवीय पक्ष को भी रेखांकित किया। पीठ ने कहा, 'हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते। यह सिर्फ छात्र का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों और संघर्ष का सवाल है।' गौरतलब है कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और भावनात्मक निवेश के साथ नीट की तैयारी करते हैं, और परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी उनके भविष्य को सीधे प्रभावित करती है।

यह ऐसे समय में आया है जब 2024 और 2026 दोनों वर्षों में नीट-यूजी विवाद सामने आ चुके हैं, और छात्र समुदाय में परीक्षा प्रणाली को लेकर गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।

अदालत का निर्देश और आगे की राह

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह NTA की संगठनात्मक क्षमता और संसाधनों को मज़बूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। अदालत ने IIT समेत विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी सलाह दी, ताकि परीक्षा सुरक्षा और प्रबंधन को और सुदृढ़ किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी सवाल उठता है कि 2024 के विवाद के बाद NTA में सुधार की गति इतनी धीमी क्यों रही। अदालत का 'एड-हॉक' वाला तंज असल में उस नीतिगत विफलता की ओर इशारा है जहाँ परीक्षा सुधार की जगह हर बार संकट-प्रबंधन होता है। UPSC की तुलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह संस्था स्वायत्त है और उसकी जवाबदेही का ढाँचा स्पष्ट है — NTA के मामले में यही स्पष्टता अब तक नदारद रही है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
29 मई 2026 को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने बताया कि PM मोदी नीट-यूजी विवाद की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और मंत्रालय से हलफनामा तलब किया।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA पर क्या टिप्पणी की?
अदालत ने NTA की कार्यशैली को 'एड-हॉक' बताया और कहा कि व्यक्तिगत जवाबदेही तय किए बिना परीक्षा गड़बड़ियाँ नहीं रुकेंगी। UPSC जैसी संस्थाओं से सीखने की सलाह दी गई।
नीट-यूजी को CBT में बदलने की माँग क्यों की जा रही है?
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रारूप पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की संभावना को काफी हद तक कम करता है। सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में निर्धारित की है। तब तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय को NTA सुधारों पर हलफनामा दाखिल करना है।
नीट-यूजी विवाद से छात्रों पर क्या असर पड़ रहा है?
सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के सपनों का सवाल है जो वर्षों की मेहनत के बाद इन परीक्षाओं में बैठते हैं। 2024 और 2026 दोनों वर्षों में सामने आए विवादों ने परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा कमज़ोर किया है।
राष्ट्र प्रेस
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