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नीट-यूजी 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा — PM मोदी खुद कर रहे हैं निगरानी

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नीट-यूजी 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा — PM मोदी खुद कर रहे हैं निगरानी

सारांश

नीट-यूजी 2026 विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया कि PM मोदी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। अदालत ने NTA की 'एड-हॉक' कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की और व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की माँग की। अगली सुनवाई जुलाई में।

मुख्य बातें

29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में नीट-यूजी 2026 विवाद पर अहम सुनवाई हुई।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि PM नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं।
नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने NTA की कार्यशैली को 'एड-हॉक' बताते हुए व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
अदालत ने UPSC को आदर्श संस्था बताते हुए NTA को उससे सीखने की सलाह दी।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय को NTA सुधारों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी।

सर्वोच्च न्यायालय में 29 मई 2026 को नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद पर हुई अहम सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह बयान देते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इसका सीधा असर देश के युवाओं पर पड़ता है।

सुनवाई का मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ नीट-यूजी परीक्षा में सुधारों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में बदलने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग की गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में स्पष्ट किया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।'

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी गड़बड़ियाँ रुकने वाली नहीं हैं। अदालत ने कहा, 'असल समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती। यह पता होना चाहिए कि कौन व्यक्ति किस जिम्मेदारी को संभाल रहा है।' कोर्ट ने NTA की कार्यशैली को 'एड-हॉक' करार देते हुए कहा कि देश की परीक्षा संस्थाओं को मजबूत और स्थायी ढाँचे के साथ काम करना चाहिए।

छात्रों और परिवारों पर असर

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह की घटनाएँ छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक होती हैं। अदालत ने कहा, 'हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते। यह सिर्फ छात्र का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों और संघर्ष का सवाल है।' गौरतलब है कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत, समय और भावनाओं के साथ इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

UPSC और IIT को आदर्श बताया

अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उदाहरण देते हुए कहा कि NTA को ऐसी संस्थाओं से सीखने की जरूरत है, जिन्होंने बड़े पैमाने पर परीक्षाएँ बिना विवाद के सफलतापूर्वक कराई हैं। कोर्ट ने IIT समेत विशेषज्ञ संस्थानों के साथ निरंतर सहयोग बढ़ाने की सलाह भी दी, ताकि परीक्षा सुरक्षा और प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा सके।

सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह NTA की संगठनात्मक क्षमता और संसाधनों को मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में 2024 और 2026 जैसी घटनाएँ दोबारा न हों। यह ऐसे समय में आया है जब लगातार दो वर्षों में नीट परीक्षा विवादों ने पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता पैदा की है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निगरानी का अर्थ क्या है — प्रशासनिक सुधार या केवल छवि प्रबंधन? 2024 के नीट पेपर लीक के बाद भी NTA की संरचना में कोई मूलभूत बदलाव नहीं हुआ, और 2026 में विवाद फिर सामने आया। अदालत का UPSC की तुलना करना सटीक है — UPSC के पास दशकों की संस्थागत स्वायत्तता और जवाबदेही का ढाँचा है, जो NTA के पास अभी तक नहीं है। जब तक हलफनामे में ठोस संरचनात्मक बदलाव नहीं आते, यह सुनवाई भी पिछली सुनवाइयों की तरह आश्वासनों की एक और कड़ी बनकर रह सकती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 विवाद में सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में नीट-यूजी 2026 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र ने बताया कि PM मोदी स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं। अदालत ने NTA की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की माँग की।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA पर क्या आपत्ति जताई?
अदालत ने NTA की कार्यशैली को 'एड-हॉक' बताते हुए कहा कि सिर्फ संस्थागत जिम्मेदारी से काम नहीं चलेगा — यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन अधिकारी किस जिम्मेदारी को संभाल रहा है। कोर्ट ने UPSC को आदर्श बताते हुए NTA को उससे सीखने की सलाह दी।
सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह NTA की संगठनात्मक क्षमता और संसाधनों को मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने कहा कि 2024 और 2026 जैसी घटनाएँ भविष्य में नहीं दोहरानी चाहिए।
नीट-यूजी को CBT में बदलने की माँग क्या है?
याचिकाओं में माँग की गई है कि नीट-यूजी परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में बदला जाए, ताकि पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी की संभावना कम हो सके। इस माँग पर अदालत ने विचार करने का संकेत दिया है।
नीट-यूजी 2026 मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में निर्धारित की है, जिसमें सरकार का हलफनामा और NTA सुधारों पर विस्तृत जानकारी अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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