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नीट-यूजी सुधार: 101 में से अधिकांश सिफारिशें लागू, पूर्व इसरो प्रमुख राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

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नीट-यूजी सुधार: 101 में से अधिकांश सिफारिशें लागू, पूर्व इसरो प्रमुख राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

सारांश

नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद बनी विशेषज्ञ समिति की 101 सिफारिशों में से अधिकांश लागू हो चुकी हैं — आधार बायोमेट्रिक, सीसीटीवी विस्तार, सरकारी परीक्षा केंद्र और 16 नए वरिष्ठ पद। पूर्व इसरो प्रमुख राधाकृष्णन ने सर्वोच्च न्यायालय को हलफनामे में यह जानकारी दी।

मुख्य बातें

पूर्व इसरो अध्यक्ष के.
राधाकृष्णन ने 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर नीट-यूजी सुधारों की प्रगति बताई।
एचएलसीई ने 21 अक्टूबर 2024 को 101 सिफारिशें प्रस्तुत कीं; निगरानी के लिए 14 नवंबर 2024 को एचपीएससी गठित।
नीट-यूजी 2026 के 99.5% से अधिक परीक्षा केंद्र सरकारी संस्थान रहे।
नीट उम्मीदवारों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और मोबाइल जैमर लागू।
एनटीए में 16 नए वरिष्ठ पद सृजित; IIT, UGC, KVS से विशेषज्ञ तैनात।
नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर से सीबीटी प्रारूप में बदलने की सिफारिश; स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श से लागू होगी।

पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया है कि नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (एचएलसीई) की 101 सिफारिशों में से अधिकांश या तो लागू की जा चुकी हैं या उन पर तेज़ गति से काम जारी है। यह जानकारी उन्होंने 29 मई 2026 को न्यायालय में दायर हलफनामे के माध्यम से दी, जो शीर्ष अदालत के 25 मई के निर्देश के जवाब में था।

समिति का गठन और कार्यक्षेत्र

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जून 2024 में नीट-यूजी विवाद के बाद एचएलसीई का गठन किया था। समिति ने राज्य सरकारों, पुलिस अधिकारियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, छात्र समूहों और वैश्विक परीक्षा एजेंसियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया।

हलफनामे के अनुसार, समिति ने 'मेरी सरकार' पोर्टल के माध्यम से भी परामर्श प्रक्रिया चलाई और छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा शिक्षाविदों से 37,144 प्रतिक्रियाएँ प्राप्त कीं। समिति ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें परीक्षा सुधार, डेटा सुरक्षा, एनटीए का संस्थागत पुनर्गठन, परीक्षा की निष्पक्षता, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और तकनीकी सुरक्षा उपायों को शामिल करते हुए 101 सिफारिशें की गईं।

निगरानी तंत्र और प्रगति

सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए 14 नवंबर 2024 को एक उच्चस्तरीय संचालन समिति (एचपीएससी) का गठन किया गया। यह समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों द्वारा नियमित अंतराल पर समीक्षाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी कर रही है।

राधाकृष्णन ने बताया कि राज्य सरकारें अब राज्यस्तरीय समन्वय समितियों (एसएलसीसी) और जिलास्तरीय समन्वय समितियों (डीएलसीसी) के माध्यम से नीट परीक्षाओं के संचालन में सक्रिय रूप से शामिल हैं। हलफनामे के अनुसार, इन समितियों ने नीट-यूजी 2025 और 2026 की परीक्षाओं के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

परीक्षा केंद्रों में बदलाव

हलफनामे में उल्लेख किया गया है कि नीट-यूजी 2026 के 99.5 प्रतिशत से अधिक परीक्षा केंद्र सरकारी संस्थान थे और शहर समन्वयकों को सरकारी स्कूलों तथा केंद्रीय विद्यालयों से लिया गया था। यह बदलाव निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

एनटीए को मज़बूत करने के लिए सरकार ने 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए हैं और आईआईटी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) जैसे संस्थानों से विशेषज्ञों को तैनात किया है।

तकनीकी सुरक्षा उपाय

हलफनामे के अनुसार, प्रस्तावित 'डिजी-एग्जाम' प्रणाली के पहले चरण के तहत नीट-यूजी उम्मीदवारों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शुरू किया गया है। इसके अतिरिक्त बहुस्तरीय तलाशी तंत्र, परीक्षा केंद्रों में विस्तारित सीसीटीवी निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के दुरुपयोग को रोकने के लिए मोबाइल जैमर लगाए गए हैं।

उम्मीदवारों की प्रतिक्रियाओं में संदिग्ध पैटर्न और विसंगतियों की पहचान के लिए अब डेटा एनालिटिक्स टूल का उपयोग किया जा रहा है, जबकि एआई और मशीन लर्निंग आधारित कार्यात्मकताओं के माध्यम से शिकायत निवारण प्रणाली को भी मज़बूत किया गया है।

परीक्षा प्रारूप और आगे की राह

विशेषज्ञ समिति ने नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) प्रारूप में क्रमिक रूप से बदलने तथा बहु-सत्र और बहु-चरणीय परीक्षा की सिफारिश की है। हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी सिफारिशें केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से लागू की जाएँगी, जो नीट-यूजी के लिए नोडल मंत्रालय है।

गौरतलब है कि यह हलफनामा 2026 के पेपर लीक विवाद के बाद नीट-यूजी संचालन में व्यापक सुधारों की माँग करने वाली याचिकाओं की पृष्ठभूमि में आया है। शैक्षिक परीक्षण अनुसंधान, सूचना सुरक्षा उन्नयन, एआई-आधारित निगरानी प्रणाली और प्रवेश परीक्षाओं के मानकीकरण सहित कई दीर्घकालिक सुधार चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'लागू' का अर्थ कागज़ पर है या ज़मीन पर। 2024 के पेपर लीक विवाद के बाद भी 2026 में नया विवाद सामने आना बताता है कि संस्थागत सुधार और परिणाम के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है। 37,144 हितधारक प्रतिक्रियाएँ और 101 सिफारिशें प्रक्रिया की गंभीरता दर्शाती हैं, परंतु सीबीटी प्रारूप जैसी मूलभूत सिफारिश अभी भी 'परामर्श' के चरण में है। सर्वोच्च न्यायालय की सक्रिय निगरानी ही वह दबाव है जो इन सुधारों को केवल हलफनामों तक सीमित रहने से रोक सकती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी सुधार के लिए बनी विशेषज्ञ समिति ने क्या सिफारिशें दीं?
एचएलसीई ने 21 अक्टूबर 2024 को 101 सिफारिशें प्रस्तुत कीं, जिनमें परीक्षा सुधार, डेटा सुरक्षा, एनटीए का संस्थागत पुनर्गठन, परीक्षा की निष्पक्षता, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और तकनीकी सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इनमें से अधिकांश या तो लागू हो चुकी हैं या उन पर काम जारी है।
नीट-यूजी 2026 में कौन से नए सुरक्षा उपाय अपनाए गए?
नीट-यूजी 2026 में आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, बहुस्तरीय तलाशी, विस्तारित सीसीटीवी निगरानी और मोबाइल जैमर लगाए गए। इसके अलावा 99.5% से अधिक परीक्षा केंद्र सरकारी संस्थान रहे।
नीट परीक्षा को सीबीटी प्रारूप में कब बदला जाएगा?
विशेषज्ञ समिति ने नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) में क्रमिक रूप से बदलने की सिफारिश की है। यह बदलाव केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से लागू किया जाना होगा; अभी इसकी कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने नीट सुधारों पर हलफनामा क्यों माँगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई 2026 को के. राधाकृष्णन को निर्देश दिया था कि वे समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन की स्थिति बताएँ। यह निर्देश 2026 के पेपर लीक विवाद के बाद नीट-यूजी संचालन में व्यापक सुधारों की माँग करने वाली याचिकाओं की पृष्ठभूमि में आया था।
एनटीए को मज़बूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार ने एनटीए में 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए हैं और IIT, UGC तथा KVS जैसे संस्थानों से विशेषज्ञों को तैनात किया है। साथ ही एआई और मशीन लर्निंग आधारित शिकायत निवारण प्रणाली और डेटा एनालिटिक्स टूल भी लागू किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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