पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ऐतिहासिक: भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी बोले — ताशकंद में 60 साल बाद बदला कालचक्र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 31 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि इस यात्रा ने रणनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक — तीनों मोर्चों पर भारत की स्थिति को सुदृढ़ किया है। उन्होंने विशेष रूप से भारत-उज्बेकिस्तान यूरेनियम आपूर्ति समझौते को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
ताशकंद का ऐतिहासिक संदर्भ
त्रिवेदी ने इस यात्रा को छह दशक पुराने एक दर्दनाक अध्याय से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ताशकंद वही शहर है जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री रहस्यमय परिस्थितियों में सदा के लिए सो गए थे। उनके अनुसार, उस दौर में कथित तौर पर ऐसी प्रतिगामी शक्तियाँ सक्रिय थीं जो भारत की परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की पहल को रोकना चाहती थीं — एक पहल जिसकी नींव शास्त्री ने रखी थी।
उन्होंने कहा, 'आज 60 वर्ष बाद उसी देश से भारत की परमाणु ऊर्जा की निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने यूरेनियम सप्लाई का ऐतिहासिक समझौता किया है। यह दर्शाता है कि 60 वर्षों में कालचक्र की गति मोदी सरकार में पूरी तरह बदल चुकी है।'
यूरेनियम डील और व्यापारिक लक्ष्य
त्रिवेदी के अनुसार, इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार को 1 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 5 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने इस व्यापारिक महत्वाकांक्षा को भारत की बदलती वैश्विक आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार की दिशा में कई देशों के साथ समझौते कर रहा है और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर जोर दे रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति के नए अध्याय
त्रिवेदी ने बताया कि इस यात्रा में सांस्कृतिक मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उज्बेकिस्तान के तमरेज क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन बौद्ध विहार के संरक्षण का दायित्व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने लिया है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा ताशकंद विश्वविद्यालय में संस्कृत चेयर की स्थापना की गई है। साथ ही, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर हिंदी अध्ययन के लिए 100 छात्रों को छात्रवृत्ति देने की व्यवस्था भारत सरकार की ओर से की गई है।
गौरतलब है कि त्रिवेदी ने इसे इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर के जीर्णोद्धार से जोड़ते हुए कहा कि यह भारत की उस व्यापक सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा है जो प्राचीन संबंधों को पुनर्जीवित कर रही है।
उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
त्रिवेदी ने बताया कि उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया। उनके अनुसार यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की पहचान और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब तक प्रधानमंत्री मोदी को 36 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
आगे की राह
यह यात्रा भारत की मध्य एशिया नीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित होने से भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को दीर्घकालिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है, जबकि सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहल दोनों देशों के जन-संपर्क को नई दिशा देंगी।