सीबीआई कोर्ट का फैसला: पोस्ट ऑफिस धोखाधड़ी में पूर्व सब पोस्ट मास्टर को 5 साल की सजा, ₹47.95 लाख के गबन का दोषी
सारांश
मुख्य बातें
विशाखापत्तनम की सीबीआई अदालत ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को पोस्ट ऑफिस धोखाधड़ी के एक मामले में दमालापति वेणु गोपाल नायडू को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष की सजा सुनाई। नायडू आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम डिवीजन के अमादलावलसा एचपीओ के अंतर्गत आने वाले कोत्तुरु सब पोस्ट ऑफिस में पूर्व सब पोस्ट मास्टर (लोअर सिलेक्शन ग्रेड) के पद पर तैनात थे।
मुख्य मामला और आरोप
सीबीआई के अनुसार, 21 फरवरी 2019 से 24 अगस्त 2019 के बीच नायडू ने बेईमानी और धोखाधड़ी से अपने अधिकार क्षेत्र के तहत सरकारी कोष से कुल ₹47,95,000 की राशि का गबन किया। उन पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, सरकारी खातों में हेराफेरी और एक सरकारी कर्मचारी द्वारा सरकारी धन के आपराधिक दुरुपयोग जैसे संगीन आरोप सिद्ध हुए।
सीबीआई ने 6 मार्च 2020 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी और जाँच पूरी होने के बाद 31 दिसंबर 2020 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल के बाद अदालत ने नायडू को दोषी पाते हुए 5 वर्ष कारावास और ₹7,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
जयपुर में बैंक धोखाधड़ी: तीन सरकारी कर्मचारियों को 7 साल की सजा
इसी क्रम में जयपुर की सीबीआई अदालत ने मंगलवार को ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) के तीन तत्कालीन लोक सेवकों को 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
दोषी पाए गए अधिकारियों में रामजी लाल मीणा (तत्कालीन ब्रांच मैनेजर), मुरारी लाल मीणा (तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट) और थान सिंह लश्कर (तत्कालीन तपरासी कम हाउसकीपर) शामिल हैं। ये तीनों ओबीसी की श्योसिंहपुरा, लालसोट और दौसा शाखाओं में कार्यरत थे। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर ₹85,000 का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है।
बैंक धोखाधड़ी का तरीका और नुकसान
सीबीआई ने 1 फरवरी 2019 को ओबीसी के तत्कालीन डिप्टी जनरल मैनेजर की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार, मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बेईमानी से बिना किसी अधिकार के 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी किए। इस कारण बैंक में गिरवी रखी गई संपत्तियाँ लोन बकाया होने के बावजूद रिलीज कर दी गईं।
इस धोखाधड़ी से बैंक को तीन लोन खातों में कुल ₹12,14,660.71 का आर्थिक नुकसान पहुँचा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी तंत्र में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को लेकर केंद्रीय एजेंसियाँ लगातार सख्त रुख अपना रही हैं।
सीबीआई की कार्रवाई का महत्व
गौरतलब है कि ये दोनों फैसले सरकारी कर्मचारियों द्वारा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के विरुद्ध सीबीआई की अभियोजन क्षमता को रेखांकित करते हैं। दोनों ही मामलों में मुकदमे की पूरी प्रक्रिया में कई वर्ष लगे, जो न्यायिक प्रणाली में विलंब की एक बड़ी चुनौती को भी उजागर करते हैं।
आने वाले समय में इन फैसलों की उच्च न्यायालयों में अपील की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले सरकारी कर्मचारियों के बीच निवारक संदेश के रूप में काम करते हैं।