गणेश चतुर्थी 2026: प्रणव और करण अदाणी ने परिवार संग किए चिंचपोकली चा चिंतामणि के दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
गणेश चतुर्थी 2026 के पावन अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने अपने परिवार के साथ मुंबई के ऐतिहासिक चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। 14 सितंबर 2026 को संपन्न इस आस्था-यात्रा में दोनों वरिष्ठ अदाणी परिवार के सदस्यों ने मंडल के 107वें उत्सव वर्ष में भागीदारी की।
अदाणी परिवार का मंडल से जुड़ाव
इस अवसर पर प्रणव अदाणी ने कहा कि चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुके इस मंडल की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक रही है। उनकी यह उपस्थिति न केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतिबिंब थी, बल्कि मुंबई की एक शताब्दी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ाव का भी संकेत थी।
चिंचपोकली चा चिंतामणि की ऐतिहासिक विरासत
मुंबई का दूसरा सबसे प्राचीन सार्वजनिक उत्सव मंडल — चिंचपोकली चा चिंतामणि — 107 वर्षों की अटूट परंपरा का वाहक है। इसकी जड़ें मुंबई के ऐतिहासिक मिल क्षेत्रों — परेल, गिरगांव और लालबाग — से गहराई से जुड़ी हैं। गौरतलब है कि यह उत्सव लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाता है, जिन्होंने 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को निजी धार्मिक आयोजन से सार्वजनिक उत्सव के रूप में रूपांतरित किया था।
यह उत्सव वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के निकट आयोजित होता आ रहा है। 1982 की ऐतिहासिक मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बड़े बदलावों के बावजूद यह मंडल स्थानीय समाज की सांस्कृतिक पहचान का एक अटूट केंद्र बना हुआ है।
इस वर्ष की थीम: दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला
इस वर्ष मंडल ने दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला की भव्यता से प्रेरित सजावट की है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की थीम पर सुसज्जित किया गया है, जिसमें गरुड़, शंख, चक्र, कीर्तिमुख और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को विशेष स्थान दिया गया है।
विशाल पंडाल को हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर (स्वर्णगिरि) की स्थापत्य शैली के अनुरूप निर्मित किया गया है। ऊँचे गोपुरम, दीपस्तंभ और याली-व्याल जैसे पारंपरिक संरक्षक प्रतीक इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक समन्वय का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
सामाजिक सेवा में मंडल की भूमिका
करीब 5,000 सदस्यों और सहयोगियों के साथ चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं है — यह स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी निरंतर सक्रिय रहता है। मंडल नियमित रूप से रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और बच्चों के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित करता है।
यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब कोविड-19 महामारी के दौरान भी मंडल ने सार्वजनिक उत्सवों को सीमित रखते हुए स्वास्थ्य जाँच शिविर, चिकित्सकीय सहायता और रक्तदान अभियानों जैसे जनसेवा कार्यों को प्राथमिकता दी थी। इस वर्ष के उत्सव में इस परंपरा की निरंतरता एक बार फिर देखी जा रही है।