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प्रतिमा बागरी ने SC प्रमाण पत्र विवाद में कांग्रेस के आरोप खारिज किए, 110 साल पुराने दस्तावेज पेश

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प्रतिमा बागरी ने SC प्रमाण पत्र विवाद में कांग्रेस के आरोप खारिज किए, 110 साल पुराने दस्तावेज पेश

सारांश

मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने कांग्रेस के SC प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े के आरोपों को नकारते हुए जाति जांच समिति के सामने 110 साल पुराने दस्तावेज रखे। समिति का फैसला उनकी मंत्री पद और विधायक की स्थिति दोनों तय करेगा।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने 7 जुलाई 2026 को अपने SC प्रमाण पत्र पर लगे आरोपों को खारिज किया।
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार का आरोप है कि बागरी राजपूत समुदाय से हैं और उन्होंने फर्जी SC प्रमाण पत्र से रायगांव की आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा।
बागरी ने जाति जांच समिति के समक्ष 110 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक अभिलेख सहित दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।
दोनों पक्षों ने समिति के सामने अपने-अपने दस्तावेज रखे; समिति जांच के बाद अंतिम निर्णय सुनाएगी।
फैसले का असर बागरी की मंत्री पद और विधायक सदस्यता दोनों पर पड़ सकता है।

मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने 7 जुलाई 2026 को अपने अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र की वैधता पर उठाए गए कांग्रेस के आरोपों को सिरे से नकार दिया। बागरी ने कहा कि वे सोमवार को राज्य की उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष पेश हुईं और 110 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक अभिलेखों सहित सभी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। उनके अनुसार दस्तावेजों की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला तब सामने आया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बागरी वास्तव में राजपूत समुदाय से हैं और उन्होंने गलत जानकारी के आधार पर SC प्रमाण पत्र हासिल किया। अहिरवार का दावा है कि बागरी ने इसी कथित अमान्य प्रमाण पत्र के बल पर रायगांव के आरक्षित विधानसभा क्षेत्र से 2023 का चुनाव लड़ा और बाद में राज्य मंत्रिमंडल में स्थान पाया।

कांग्रेस नेता ने तीन प्रमुख मांगें रखीं — बागरी का जाति प्रमाण पत्र रद्द किया जाए, उन्हें विधानसभा से अयोग्य घोषित किया जाए और राज्य मंत्रिमंडल से हटाया जाए।

बागरी का पक्ष

बागरी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि जाति जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में बागड़ी समुदाय के अनुसूचित जाति सूची में शामिल होने से संबंधित ऐतिहासिक अभिलेख भी थे। उनके अनुसार, 'दस्तावेजों की जांच के बाद किसी को भी कोई अनियमितता नहीं मिली और उनका जाति प्रमाण पत्र असली है।' उन्होंने अहिरवार पर मीडिया के सामने गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाया।

समिति की कार्यवाही

उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष दोनों पक्ष पेश हुए। जहाँ बागरी ने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज रखे, वहीं अहिरवार ने भी उनकी जातिगत स्थिति को चुनौती देने वाले साक्ष्य प्रस्तुत किए। समिति अब दोनों पक्षों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।

आगे क्या होगा

जाति जांच समिति अपनी जांच पूरी करने के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय सुनाएगी। यह फैसला न केवल बागरी की मंत्री पद की स्थिति बल्कि रायगांव विधानसभा सीट की वैधता को भी प्रभावित कर सकता है। गौरतलब है कि SC प्रमाण पत्र से जुड़े ऐसे विवाद मध्य प्रदेश में पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बन चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला इसलिए अधिक संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक सत्तारूढ़ मंत्री की विधायक सदस्यता और मंत्री पद दोनों दांव पर हैं। जाति जांच समिति की प्रक्रिया अभी चल रही है और अंतिम निर्णय आना बाकी है — ऐसे में किसी भी पक्ष के दावे को अभी सत्य मान लेना जल्दबाजी होगी। असली सवाल यह है कि क्या राज्य की जाति सत्यापन प्रणाली इतनी पारदर्शी और त्वरित है कि राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष फैसला दे सके। यदि प्रमाण पत्र वैध साबित होता है तो कांग्रेस पर राजनीतिक उत्पीड़न का आरोप लगेगा, और यदि नहीं, तो यह आरक्षण व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतिमा बागरी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया है कि प्रतिमा बागरी राजपूत समुदाय से हैं और उन्होंने फर्जी SC प्रमाण पत्र के आधार पर रायगांव की आरक्षित विधानसभा सीट से 2023 का चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल किया। कांग्रेस ने उनका प्रमाण पत्र रद्द कर उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
बागरी ने जाति जांच समिति के सामने क्या प्रस्तुत किया?
बागरी ने सोमवार को जाति जांच समिति के समक्ष 110 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक अभिलेख सहित दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनमें अनुसूचित जाति सूची में बागड़ी समुदाय के शामिल होने से संबंधित रिकॉर्ड भी थे। उनके अनुसार दस्तावेजों की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
जाति जांच समिति का फैसला कब आएगा?
समिति दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
इस विवाद का प्रतिमा बागरी के मंत्री पद पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि जाति जांच समिति SC प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित करती है, तो बागरी की विधायक सदस्यता और मंत्री पद दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। हालाँकि, समिति का फैसला आने तक उनकी स्थिति यथावत बनी रहेगी।
रायगांव विधानसभा सीट क्यों महत्वपूर्ण है?
रायगांव मध्य प्रदेश की एक आरक्षित विधानसभा सीट है, जहाँ से केवल अनुसूचित जाति के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं। यदि बागरी का SC प्रमाण पत्र अमान्य पाया जाता है, तो 2023 का उनका चुनाव परिणाम भी कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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