प्रतिमा बागरी ने SC प्रमाण पत्र विवाद में कांग्रेस के आरोप खारिज किए, 110 साल पुराने दस्तावेज पेश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने 7 जुलाई 2026 को अपने अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र की वैधता पर उठाए गए कांग्रेस के आरोपों को सिरे से नकार दिया। बागरी ने कहा कि वे सोमवार को राज्य की उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष पेश हुईं और 110 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक अभिलेखों सहित सभी दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। उनके अनुसार दस्तावेजों की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला तब सामने आया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बागरी वास्तव में राजपूत समुदाय से हैं और उन्होंने गलत जानकारी के आधार पर SC प्रमाण पत्र हासिल किया। अहिरवार का दावा है कि बागरी ने इसी कथित अमान्य प्रमाण पत्र के बल पर रायगांव के आरक्षित विधानसभा क्षेत्र से 2023 का चुनाव लड़ा और बाद में राज्य मंत्रिमंडल में स्थान पाया।
कांग्रेस नेता ने तीन प्रमुख मांगें रखीं — बागरी का जाति प्रमाण पत्र रद्द किया जाए, उन्हें विधानसभा से अयोग्य घोषित किया जाए और राज्य मंत्रिमंडल से हटाया जाए।
बागरी का पक्ष
बागरी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि जाति जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में बागड़ी समुदाय के अनुसूचित जाति सूची में शामिल होने से संबंधित ऐतिहासिक अभिलेख भी थे। उनके अनुसार, 'दस्तावेजों की जांच के बाद किसी को भी कोई अनियमितता नहीं मिली और उनका जाति प्रमाण पत्र असली है।' उन्होंने अहिरवार पर मीडिया के सामने गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाया।
समिति की कार्यवाही
उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष दोनों पक्ष पेश हुए। जहाँ बागरी ने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज रखे, वहीं अहिरवार ने भी उनकी जातिगत स्थिति को चुनौती देने वाले साक्ष्य प्रस्तुत किए। समिति अब दोनों पक्षों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।
आगे क्या होगा
जाति जांच समिति अपनी जांच पूरी करने के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय सुनाएगी। यह फैसला न केवल बागरी की मंत्री पद की स्थिति बल्कि रायगांव विधानसभा सीट की वैधता को भी प्रभावित कर सकता है। गौरतलब है कि SC प्रमाण पत्र से जुड़े ऐसे विवाद मध्य प्रदेश में पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बन चुके हैं।