प्रयागराज: शरीर पर स्लोगन लिखकर पेड़-पौधे लिए घूम रहे राजेंद्र तिवारी, विश्व पर्यावरण दिवस पर अनोखी मुहिम
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के दारागंज इलाके में विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून 2026 के अवसर पर एक अनूठी जागरूकता मुहिम देखने को मिली, जब राजेंद्र कुमार तिवारी उर्फ दुकान जी ने अपने शरीर पर पर्यावरण संरक्षण के स्लोगन लिखकर और हाथों में पेड़-पौधे लेकर शहर की सड़कों पर भ्रमण किया। उनका संदेश सीधा और स्पष्ट था — 'सांसें हो रही हैं कम, आओ एक पेड़ लगाएं हम' — और उनके इस अभियान में स्थानीय निवासी भी जुड़ते चले गए।
मुख्य घटनाक्रम
दारागंज की गलियों में राजेंद्र तिवारी का यह अभियान सुबह से ही शुरू हो गया था। वे घर-घर जाकर लोगों से वृक्षारोपण की अपील कर रहे थे। उनके अनोखे गेटअप और जोशीले संदेश ने राहगीरों और स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा, और देखते-देखते कई निवासी उनकी यात्रा में शामिल हो गए। यह अभियान शहर के विभिन्न हिस्सों में दिनभर जारी रहा।
राजेंद्र तिवारी की अपील
राजेंद्र तिवारी ने अपनी इस मुहिम के बारे में बताते हुए कहा, 'मैं लोगों से निवेदन करने निकला हूं। घर-घर जाकर निवेदन कर रहा हूं कि पर्यावरण को बचाए रखने के लिए एक पेड़ अवश्य लगाएं। जिस तरह से हमारी भूमि बंजर होती जा रही है और प्रकृति के साथ हम लोग जो खिलवाड़ कर रहे हैं, उसको बंद करना होगा नहीं तो आगे आने वाली युवा पीढ़ी को हम शुद्ध वायु नहीं दे पाएंगे।' उन्होंने यह भी सुझाया कि शादी-ब्याह या किसी भी आयोजन में बुके की जगह एक पौधा भेंट किया जाए — 'जिस तरह से पेड़ बढ़ेगा, उसी तरह परिवार बढ़ेगा।'
स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
प्रयागराज निवासी अनामिका चौधरी ने इस अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि पर्यावरण दिवस पर ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन एक पौधा रोपित करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'लोग अपने लिए एक पौधा लगाकर उसे बड़ा वृक्ष बनाएं — एक पेड़ लगाना 100 पुत्र के समान है।' वहीं, सुनील कुमार ने कोरोना काल की याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह उस दौर में लोगों की सांसें रुकीं, उसे ध्यान में रखकर अभी से पेड़ लगाना ज़रूरी है। उन्होंने अपील की कि लोग जन्मदिन, बच्चों के जन्मदिन और माता-पिता के नाम पर एक पेड़ अवश्य लगाएं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में वायु प्रदूषण और हरित आवरण की कमी एक गंभीर चिंता बनती जा रही है। गौरतलब है कि जमीनी स्तर पर इस तरह की व्यक्तिगत पहल अक्सर सरकारी अभियानों की तुलना में अधिक प्रभावी सामाजिक संदेश देती हैं, क्योंकि ये सीधे समुदाय से जुड़ती हैं। राजेंद्र तिवारी का यह प्रयास बताता है कि जागरूकता के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
क्या होगा आगे
राजेंद्र तिवारी के अनुसार यह अभियान केवल 5 जून तक सीमित नहीं रहेगा — वे आगे भी दारागंज और प्रयागराज के अन्य मुहल्लों में यह जागरूकता यात्रा जारी रखने का इरादा रखते हैं। उनकी इस मुहिम से प्रेरित होकर स्थानीय निवासी भी अपने स्तर पर वृक्षारोपण की दिशा में कदम उठाने को प्रोत्साहित हो रहे हैं।