13 जुलाई 2026
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राष्ट्रपति मुर्मु ने सिक्किम पुलिस को 'राष्ट्रपति का निशान' दिया, बोलीं — पुलिस बने नागरिकों की सहयोगी

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राष्ट्रपति मुर्मु ने सिक्किम पुलिस को 'राष्ट्रपति का निशान' दिया, बोलीं — पुलिस बने नागरिकों की सहयोगी

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गंगटोक में सिक्किम पुलिस को 'राष्ट्रपति का निशान' देते हुए औपनिवेशिक पुलिस मानसिकता पर सीधा प्रहार किया — और कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए पुलिस को शासक नहीं, नागरिकों का सहयोगी बनना होगा।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 मई 2026 को गंगटोक में सिक्किम पुलिस को 'राष्ट्रपति का निशान' प्रदान किया।
सिक्किम पुलिस की स्थापना 1897 में हुई थी; यह बल राज्य में शांति और न्याय का प्रतीक रहा है।
राष्ट्रपति ने औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति को विकसित भारत के लक्ष्य के लिए अनिवार्य बताया।
पुलिस में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-हितैषी व्यवहार पर विशेष ज़ोर दिया गया।
महिलाओं, बच्चों और समाज के कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 मई 2026 को गंगटोक में आयोजित एक विशेष समारोह में सिक्किम पुलिस को 'राष्ट्रपति का निशान' प्रदान किया — यह सम्मान किसी पुलिस बल को मिलने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। इस अवसर पर उन्होंने सिक्किम पुलिस से जुड़े वर्तमान और पूर्व सभी अधिकारियों एवं जवानों को बधाई देते हुए कहा कि 1897 में अपनी स्थापना के बाद से यह बल सिक्किम में शांति, सुरक्षा और न्याय का स्तंभ बना रहा है।

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की ज़रूरत

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत की पुलिस व्यवस्था पर लंबे समय तक चले औपनिवेशिक शासन की गहरी छाप रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुलामी के दौर में पुलिस का उद्देश्य जनता की सेवा नहीं, बल्कि उन पर नियंत्रण रखना और शासन के आदेशों को कठोरता से लागू करना था। इसी कारण पुलिस तंत्र में जनता की सहायता करने की जगह उन पर शासन करने की सोच पनपी।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देशवासियों को सशक्त बनाने और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्ति अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, नागरिक राष्ट्र-निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान नहीं दे पाएंगे।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल

राष्ट्रपति ने पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस तंत्र को और अधिक नागरिक-हितैषी बनाया जाना चाहिए, ताकि आम लोग बिना किसी भय के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और समाज के कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता देने की बात उन्होंने दृढ़ता से कही।

सहयोगी की भूमिका से बढ़ेगा विश्वास

मुर्मु ने कहा कि पुलिस को नागरिकों का सहयोगी और मार्गदर्शक बनना है। उनके अनुसार, जब पुलिस लोगों की समस्याओं को समझकर उनकी सहायता करेगी, तो समाज में सुरक्षा के प्रति भरोसा और कानून के प्रति सम्मान — दोनों स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और जागरूक समाज का निर्माण करना होना चाहिए।

सिक्किम पुलिस की सराहना

राष्ट्रपति ने सिक्किम पुलिस के योगदान की विशेष सराहना करते हुए कहा कि इस बल ने राज्य में शांति और भाईचारा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, सिक्किम पुलिस ने अपने पेशेवर और मित्रतापूर्ण व्यवहार के बल पर राज्य के नागरिकों का स्नेह और सम्मान अर्जित किया है — और यही भावना पूरे देश की पुलिस के लिए अनुकरणीय है।

यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है जब देशभर में पुलिस सुधार और नागरिक-पुलिस संबंधों को लेकर व्यापक चर्चा जारी है। राष्ट्रपति का यह संबोधन उस दिशा में एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इसके साथ कोई संस्थागत तंत्र भी आएगा — जैसे स्वतंत्र शिकायत निवारण, पुलिस जवाबदेही आयोग, या सामुदायिक पुलिसिंग के बाध्यकारी मानक। सिक्किम पुलिस की प्रशंसा उचित है, परंतु देश के बड़े राज्यों में नागरिक-पुलिस संबंधों की तस्वीर अभी भी चिंताजनक है। बिना नीतिगत बदलाव के, ऐसे भाषण प्रेरणादायक तो होते हैं, पर परिवर्तनकारी नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'राष्ट्रपति का निशान' क्या होता है और यह किसे दिया जाता है?
'राष्ट्रपति का निशान' भारत में किसी पुलिस बल को दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है, जो असाधारण सेवा और अनुशासन के लिए प्रदान किया जाता है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्वारा स्वयं प्रदान किया जाता है।
सिक्किम पुलिस को यह सम्मान कब और कहाँ दिया गया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 मई 2026 को गंगटोक में आयोजित समारोह में सिक्किम पुलिस को 'राष्ट्रपति का निशान' प्रदान किया। सिक्किम पुलिस की स्थापना 1897 में हुई थी।
राष्ट्रपति मुर्मु ने पुलिस सुधार पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन की मानसिकता के कारण पुलिस में जनता पर शासन करने की सोच विकसित हुई, जिससे मुक्ति ज़रूरी है। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-हितैषी व्यवहार को पुलिस व्यवस्था के लिए अनिवार्य बताया।
समाज के कमज़ोर वर्गों के प्रति पुलिस की भूमिका पर राष्ट्रपति ने क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और समाज के कमज़ोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आम नागरिक बिना भय के अपनी समस्याएँ दर्ज करा सकें, इसके लिए पुलिस को और अधिक सुलभ बनाना होगा।
सिक्किम पुलिस की क्या विशेषताएँ बताई गईं?
राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम पुलिस ने 1897 से राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपने पेशेवर और मित्रतापूर्ण व्यवहार के बल पर इस बल ने राज्य के नागरिकों का स्नेह और सम्मान अर्जित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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