13 जुलाई 2026
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सिक्किम 2027 के राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले बना पूर्ण साक्षर राज्य, राष्ट्रपति मुर्मु ने की सराहना

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सिक्किम 2027 के राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले बना पूर्ण साक्षर राज्य, राष्ट्रपति मुर्मु ने की सराहना

सारांश

सिक्किम ने 2027 की राष्ट्रीय समय सीमा से पहले ही उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षरता हासिल कर ली — एक हिमालयी राज्य की वह उपलब्धि जो ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवकों और महिलाओं की भागीदारी से संभव हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गंगटोक में इसे 'गर्व की बात' बताया।

मुख्य बातें

सिक्किम ने 2027 की राष्ट्रीय समय सीमा से पहले उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल किया।
घोषणा 27 मई 2026 को सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में की गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और सिक्किम की जनता को बधाई दी।
ग्राम पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हुई।
राष्ट्रपति ने साक्षरता अभियान में महिलाओं की भागीदारी को इस सफलता की समावेशी प्रकृति का प्रमाण बताया।
यह उपलब्धि विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देने वाली बताई गई है।

सिक्किम ने केंद्र सरकार के उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल कर लिया है — और यह उपलब्धि 2027 की राष्ट्रीय समय सीमा से पहले ही प्राप्त की गई है। यह घोषणा 27 मई 2026 को गंगटोक स्थित सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में की गई।

दीक्षांत समारोह में हुई घोषणा

इस ऐतिहासिक अवसर पर सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर, मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और राज्य के शिक्षा मंत्री राजू बसनेत भी मंचासीन थे। लोकसभा सांसद इंद्र हंग सुब्बा सहित राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद् भी समारोह में उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने इस उपलब्धि पर सिक्किम सरकार और वहाँ की जनता को बधाई देते हुए कहा, 'सिक्किम का पूर्णतः साक्षर राज्य होना गर्व की बात है। मैं मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, उनकी सरकार और सिक्किम के सभी निवासियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देती हूँ।'

उल्लास कार्यक्रम की भूमिका

उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वयस्क शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देना है, ताकि समाज के हर वर्ग — विशेषकर वंचित तबकों — को शिक्षा की समावेशी पहुँच सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों के अनुसार, ग्राम पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों ने इस सफलता को संभव बनाया।

गौरतलब है कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार की विकसित भारत 2047 की व्यापक दृष्टि का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें साक्षरता को सशक्तिकरण और सामाजिक प्रगति की बुनियाद माना गया है।

महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर

राष्ट्रपति मुर्मु ने साक्षरता अभियान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों का शिक्षा प्राप्त करना इस अभियान की समावेशी प्रकृति को रेखांकित करता है और सामूहिक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज राज्य पूर्णतः साक्षर हो गया है।

राज्यपाल माथुर ने इस उपलब्धि को हिमालयी राज्य के लिए 'गौरव का क्षण' बताया और मुख्यमंत्री तमांग एवं उनकी टीम को बधाई दी।

ज़मीनी कार्यकर्ताओं का योगदान

लोकसभा सांसद इंद्र हंग सुब्बा ने कहा कि यह उपलब्धि गाँवों और समुदायों में कार्यरत स्वयंसेवकों, शिक्षकों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के वर्षों के परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने इस गति को बनाए रखने और आने वाले वर्षों में राज्य के साक्षरता स्तर को बरकरार रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब देश के कई बड़े राज्य अभी भी अपने साक्षरता लक्ष्यों की ओर काम कर रहे हैं — सिक्किम का यह कदम अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'पूर्ण साक्षरता' की परिभाषा और उसके मापन का मानक क्या है — क्या यह केवल बुनियादी पढ़ने-लिखने की क्षमता है या कार्यात्मक साक्षरता भी इसमें शामिल है। छोटे पहाड़ी राज्यों में साक्षरता अभियान चलाना बड़े मैदानी राज्यों की तुलना में संरचनात्मक रूप से आसान होता है — जनसंख्या घनत्व, भौगोलिक क्षेत्रफल और प्रशासनिक पहुँच सभी अनुकूल हैं। इसलिए इस मॉडल को सीधे बिहार, उत्तर प्रदेश या राजस्थान पर लागू करना संभव नहीं — वहाँ की चुनौतियाँ कई गुना अधिक जटिल हैं। फिर भी, ग्राम पंचायत स्तर पर समुदाय-संचालित दृष्टिकोण और महिलाओं की केंद्रीय भूमिका — ये दो तत्व निश्चित रूप से नीति-निर्माताओं के लिए अनुकरणीय हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिक्किम को पूर्ण साक्षर राज्य कब और कैसे घोषित किया गया?
27 मई 2026 को गंगटोक स्थित सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। यह उपलब्धि उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 2027 की राष्ट्रीय समय सीमा से पहले हासिल की गई।
उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम क्या है?
यह केंद्र सरकार का एक राष्ट्रीय साक्षरता अभियान है जो वयस्क शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और आजीवन शिक्षा पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य 2027 तक देश के सभी राज्यों को पूर्ण साक्षर बनाना है और यह विकसित भारत 2047 की व्यापक दृष्टि का हिस्सा है।
सिक्किम की पूर्ण साक्षरता में किनका योगदान रहा?
अधिकारियों के अनुसार, ग्राम पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों ने यह उपलब्धि संभव की। लोकसभा सांसद इंद्र हंग सुब्बा ने विशेष रूप से गाँवों में कार्यरत स्वयंसेवकों, शिक्षकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के वर्षों के परिश्रम को श्रेय दिया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने सिक्किम की साक्षरता उपलब्धि पर क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि 'सिक्किम का पूर्णतः साक्षर राज्य होना गर्व की बात है।' उन्होंने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, उनकी सरकार और सिक्किम के सभी निवासियों को बधाई दी और साक्षरता अभियान में महिलाओं की भागीदारी की विशेष सराहना की।
सिक्किम की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
सिक्किम ने राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले पूर्ण साक्षरता हासिल करके एक समुदाय-संचालित मॉडल प्रस्तुत किया है। लोकसभा सांसद इंद्र हंग सुब्बा ने इस गति को बनाए रखने और साक्षरता स्तर को भविष्य में भी बरकरार रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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