24 अक्टूबर 2026
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भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए कुशल प्रतिभा ज़रूरी: डॉ. प्रीति अदाणी का CHIPS 2026 में आह्वान

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भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए कुशल प्रतिभा ज़रूरी: डॉ. प्रीति अदाणी का CHIPS 2026 में आह्वान

सारांश

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की असली परीक्षा फैब्रिकेशन प्लांट लगाने में नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाली प्रतिभा तैयार करने में है। CHIPS 2026 में डॉ. प्रीति अदाणी की यही चेतावनी थी — और अदाणी विश्वविद्यालय का नया परिसर इसी खाई को पाटने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

प्रीति अदाणी ने 24 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में CHIPS 2026 सम्मेलन में भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए कुशल प्रतिभा की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया।
क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज के विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया।
सम्मेलन आईआईटी मंडी , वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से आयोजित हुआ।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत धोलेरा और साणंद में परियोजनाएँ चल रही हैं, जो गुजरात को सेमीकंडक्टर हब बना रही हैं।
अदाणी विश्वविद्यालय ने अपने प्रस्तावित वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेष कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।

अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने 24 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को सफल बनाने के लिए केवल अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्र पर्याप्त नहीं हैं — देश को ऐसी कुशल प्रतिभाओं की भी उतनी ही सख्त ज़रूरत है जो जटिल तकनीकों को डिज़ाइन, विकसित और बेहतर बना सकें। उन्होंने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच अधिक गहरे सहयोग का आह्वान किया।

CHIPS 2026 सम्मेलन में क्या हुआ

अदाणी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (CHIPS) 2026' को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने कहा, 'हमारी तकनीकी प्रगति का वास्तविक पैमाना यह नहीं होगा कि मशीनें कितनी बुद्धिमान बनती हैं, बल्कि यह होगा कि हम मानव बुद्धिमत्ता का कितना विवेकपूर्ण उपयोग कर बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं।'

इस सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस, सिरिल अमरचंद मंगलदास और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इन्होंने वायरलेस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम्स और कानूनी ढाँचे सहित सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में उभर रहे अवसरों और चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

तीन प्रमुख पैनल चर्चाओं के विषय

सम्मेलन में तीन केंद्रीय पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। 'द फ्यूचर ऑफ सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इन इंडिया' सत्र में देश की डिज़ाइन क्षमताओं को मज़बूत करने के उपायों पर विमर्श हुआ। 'सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग: शेपिंग इंडियाज़ टेक्नोलॉजिकल फ्यूचर' सत्र में विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके प्रभाव का विश्लेषण किया गया।

'कैरियर ऑपर्च्युनिटीज़ इन द सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम' सत्र रोज़गार के अवसरों, आवश्यक कौशल और भविष्य के करियर मार्गों पर केंद्रित रहा। यह सम्मेलन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, अनेक सेमीकंडक्टर कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा और मौजूदा परिदृश्य

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा केवल फैब्रिकेशन तक सीमित नहीं है — चिप डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग में वैश्विक विशेषज्ञता विकसित करना भी उसका अभिन्न अंग है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) ने इस दिशा में गति प्रदान की है, जबकि गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएँ राज्य को इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बना रही हैं।

गौरतलब है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ विस्तार के कारण उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और विश्वसनीय ऊर्जा अवसंरचना की माँग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव पूंजी की कमी एक बड़ी बाधा बन सकती है।

अदाणी विश्वविद्यालय की आगे की योजना

अदाणी विश्वविद्यालय ने घोषणा की कि अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में वह सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करेगा। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष कार्यक्रम, उद्योग पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों के क्षमता विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने की योजना है।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य अकादमिक शिक्षा और शोध को सीधे उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना है, ताकि भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए भविष्य की प्रतिभा तैयार की जा सके। यह सम्मेलन इस दिशा में उद्योग-शिक्षा सेतु को मज़बूत करने की एक सुनियोजित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ताइवान और दक्षिण कोरिया से तुलना करें तो स्पष्ट है कि हार्डवेयर डिज़ाइन इंजीनियरों की संख्या अभी भी कहीं पीछे है। विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच पाठ्यक्रम की खाई भरने की बात वर्षों से होती रही है, पर CHIPS जैसे सम्मेलन तभी सार्थक होंगे जब इनसे ठोस पाठ्यक्रम सुधार और स्नातक स्तरीय लैब इन्फ्रास्ट्रक्चर निकले — न केवल नेटवर्किंग। यह भी देखने वाली बात होगी कि निजी विश्वविद्यालय की यह पहल सार्वजनिक तकनीकी संस्थानों — IIT, NIT — के साथ प्रतिस्पर्धी या पूरक होगी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CHIPS 2026 सम्मेलन क्या था और इसमें किसने भाग लिया?
'कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (CHIPS) 2026' अदाणी विश्वविद्यालय द्वारा 24 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में आयोजित एक उद्योग-शिक्षा सम्मेलन था। इसमें क्वालकॉम, एनएक्सपी, माइक्रोन, सिनोप्सिस और इनफिनियन जैसी कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
डॉ. प्रीति अदाणी ने सेमीकंडक्टर मिशन पर क्या कहा?
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को सफल बनाने के लिए केवल विनिर्माण संयंत्र पर्याप्त नहीं हैं — ऐसी कुशल प्रतिभाओं की भी ज़रूरत है जो जटिल तकनीकों को डिज़ाइन और विकसित कर सकें। उन्होंने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच गहरे सहयोग पर भी ज़ोर दिया।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) क्या है और गुजरात की इसमें क्या भूमिका है?
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) भारत सरकार की पहल है जो देश में चिप डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग में वैश्विक क्षमता विकसित करने के लिए शुरू की गई है। गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएँ राज्य को इस मिशन का प्रमुख केंद्र बना रही हैं।
अदाणी विश्वविद्यालय सेमीकंडक्टर शिक्षा में क्या नई पहल कर रहा है?
अदाणी विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में प्रस्तावित वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग पर विशेष कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इनमें युवा इंजीनियरों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम, उद्योग पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों के क्षमता विकास कार्यक्रम शामिल हैं।
AI के विस्तार का सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर क्या असर पड़ रहा है?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज़ विस्तार से उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और विश्वसनीय ऊर्जा अवसंरचना की माँग लगातार बढ़ रही है। इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र का महत्व और भी बढ़ गया है और इसके लिए प्रशिक्षित मानव पूंजी की माँग भी तेज़ हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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