राहुल गांधी का केरल चुनाव पर बयान: केरलम की जीत और यूडीएफ का नेतृत्व
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी का यूडीएफ की जीत का दावा
- केरलम की जनता बदलाव के लिए तैयार है
- कांग्रेस ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया
- यूडीएफ और सीपीआई-एम के बीच प्रतिस्पर्धा जारी
- राजनीतिक गुटबाजी का सामना करना पड़ा
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनाव की घड़ी नजदीक आते ही राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केरल में यूडीएफ की जीत का अटल विश्वास व्यक्त किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यूडीएफ टीम ही केरलम टीम है। हर उम्मीदवार केरलम की जनता की आवाज़, उनकी आशाओं और उनके विश्वास का प्रतिनिधित्व करता है। यह अनुभवी नेताओं और युवा परिवर्तनकारियों का एक ऐसा समूह है जो अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की बारीकियों को भलीभांति समझते हैं।
राहुल गांधी ने आगे कहा, "मेरे लिए केरलम मेरा घर है और केरलम की जनता मेरा परिवार है। जनता ने मुझे जो कुछ भी सिखाया है और जिस प्यार और स्नेह से उन्होंने मुझे अपनाया है, उसके लिए मैं उनका आभारी हूं! मैं हमेशा आपका साथी रहूंगा। केरलम का संदेश स्पष्ट है, जनता बदलाव के लिए तैयार है। वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो उनकी बात सुने, समझे और ईमानदारी से काम करे।"
उन्होंने कहा कि आगामी यूडीएफ सरकार के साथ मिलकर, मैं इस खूबसूरत राज्य के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा। केरलम विजयी होगा और यूडीएफ नेतृत्व करेगा।
गौरतलब है कि 140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में कांग्रेस 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि तीन निर्वाचन क्षेत्रों में उन बागी नेताओं का समर्थन करेगी जिन्होंने सीपीआई-एम से अलग होकर अपने गुट का गठन किया है। कांग्रेस ने गुरुवार रात को अपने उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की, जिसमें 37 निर्वाचन क्षेत्रों के नाम सम्मिलित हैं।
इस देरी से हुई घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व को गुटों में संतुलन बनाने, पुराने नेताओं को स्थान देने और नए चेहरों को शामिल करने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सबसे नाटकीय पल तब आया जब वरिष्ठ नेता और कन्नूर लोकसभा सांसद के. सुधाकरन ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और यहां तक कि पार्टी छोड़ने की धमकी भी दी।