राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन पर PM मोदी को लिखा पत्र, कहा — 'नेता प्रतिपक्ष रबर स्टैंप नहीं'

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राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन पर PM मोदी को लिखा पत्र, कहा — 'नेता प्रतिपक्ष रबर स्टैंप नहीं'

सारांश

राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन को 'पक्षपातपूर्ण' करार देते हुए PM मोदी को पत्र लिखा और एक्स पर साझा किया। उनका आरोप है कि 69 उम्मीदवारों की फाइलें बैठक में पहली बार दी गईं और 360 डिग्री रिपोर्ट देने से इनकार किया गया — जिससे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महज औपचारिकता बनकर रह गई।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 12 मई को सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया।
गांधी का आरोप है कि बैठक में पहली बार 69 उम्मीदवारों की फाइलें दी गईं और 360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट देने से इनकार किया गया।
5 मई 2025 की बैठक में भी उन्होंने असहमति दर्ज कराई थी; 21 अक्टूबर 2025 को भेजे सुझावों का अब तक कोई जवाब नहीं।
गांधी ने कहा — सरकार ने सीबीआई का उपयोग राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल औपचारिक मुहर लगाने की नहीं है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने 12 मई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह पत्र साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वह एक पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से समझौता नहीं कर सकते।

राहुल गांधी का मुख्य आरोप

गांधी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बार-बार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का उपयोग राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि इसी संस्थागत दुरुपयोग को रोकने के लिए चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को शामिल करने का प्रावधान किया गया था, लेकिन उन्हें प्रक्रिया में कोई सार्थक भूमिका नहीं दी गई।

उन्होंने एक्स पर लिखा, ''मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है। मैं एक पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में शामिल होकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं छोड़ सकता। नेता प्रतिपक्ष कोई रबर स्टैंप नहीं है।''

दस्तावेज़ न देने का विवाद

राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने कई बार लिखित रूप से अनुरोध किया था कि चयन प्रक्रिया से जुड़े उम्मीदवारों की सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट और 360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके अनुसार, समिति की बैठक के दौरान पहली बार 69 उम्मीदवारों की फाइलें उनके सामने रखी गईं, जबकि 360 डिग्री रिपोर्ट देने से पूरी तरह इनकार कर दिया गया।

गांधी ने कहा कि उम्मीदवारों के प्रदर्शन और कार्यशैली का सही आकलन करने के लिए इन दस्तावेजों की समीक्षा अनिवार्य थी। उनके अनुसार, जानकारी न देना चयन प्रक्रिया को एक औपचारिकता में बदल देना है और इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि सरकार पहले से तय उम्मीदवार को ही चुन सके।

पिछली बैठकों में भी जताई असहमति

राहुल गांधी ने पत्र में उल्लेख किया कि उन्होंने 5 मई 2025 की पिछली बैठक में भी असहमति दर्ज कराई थी। इसके अलावा, 21 अक्टूबर 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री को निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के लिए कुछ सुझाव भी भेजे थे, जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार और विपक्ष के बीच संस्थागत नियुक्तियों की स्वतंत्रता को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति में शामिल करने का उद्देश्य ही यह था कि नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्ष की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

सरकार पर औपचारिकता का आरोप

राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार ने जरूरी जानकारी छिपाकर चयन समिति को केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल औपचारिक मुहर लगाने की नहीं है और इसलिए वह इस प्रक्रिया से कड़ी असहमति जताते हैं।

यह विवाद आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक बहस में और तीखा हो सकता है, क्योंकि सीबीआई की स्वायत्तता और उसके निदेशक की नियुक्ति की पारदर्शिता लंबे समय से विपक्षी दलों के एजेंडे पर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक संवैधानिक प्रश्न को उठाने की कोशिश है कि क्या नेता प्रतिपक्ष की चयन समिति में उपस्थिति वास्तविक है या सिर्फ दिखावटी। सीबीआई निदेशक की नियुक्ति में विपक्ष को शामिल करने का प्रावधान विनीत नारायण केस (1997) की सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था की भावना से जुड़ा है — जिसका मकसद था कि जांच एजेंसी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहे। अगर 360 डिग्री रिपोर्ट जैसे बुनियादी दस्तावेज़ भी नहीं दिए जाते, तो यह भागीदारी नाममात्र की रह जाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह विवाद सिर्फ कांग्रेस बनाम BJP नहीं है — यह संस्थागत जवाबदेही की उस बुनियाद की परीक्षा है जिस पर लोकतंत्र टिका है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन पर विरोध क्यों जताया?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चयन समिति की बैठक में उन्हें पहले से उम्मीदवारों की 360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट नहीं दी गई और 69 उम्मीदवारों की फाइलें पहली बार बैठक के दौरान रखी गईं। उनका कहना है कि इससे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महज औपचारिकता बनकर रह जाती है।
सीबीआई निदेशक चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका क्या होती है?
कानूनी प्रावधान के तहत सीबीआई निदेशक की नियुक्ति एक उच्चस्तरीय समिति करती है जिसमें प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियुक्ति में सरकार का एकतरफा नियंत्रण न हो।
राहुल गांधी ने PM मोदी को पहले कब पत्र लिखा था?
गांधी ने 21 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री को निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के लिए सुझाव भेजे थे, जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके अलावा 5 मई 2025 की बैठक में भी उन्होंने असहमति दर्ज कराई थी।
360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट क्या होती है?
360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट किसी अधिकारी के प्रदर्शन, कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता का समग्र आकलन होती है, जिसमें वरिष्ठों, सहकर्मियों और अधीनस्थों की राय शामिल होती है। सीबीआई निदेशक जैसे संवेदनशील पद के लिए यह रिपोर्ट उम्मीदवार की उपयुक्तता परखने का अहम आधार मानी जाती है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
यह विवाद संसद में और सार्वजनिक बहस में तीखा हो सकता है, क्योंकि सीबीआई की स्वायत्तता और उसके निदेशक की नियुक्ति की पारदर्शिता लंबे समय से विपक्षी दलों के एजेंडे पर रही है। यदि सरकार ने जवाब नहीं दिया, तो विपक्ष इसे संस्थागत पारदर्शिता के मुद्दे के रूप में और उठा सकता है।
राष्ट्र प्रेस