31 जुलाई 2026
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राहुल गांधी ने पत्रकार से पूछा 'क्या आप BJP से हैं', घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों पर सवाल के जवाब में

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राहुल गांधी ने पत्रकार से पूछा 'क्या आप BJP से हैं', घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों पर सवाल के जवाब में

सारांश

घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल पूछने पर राहुल गांधी ने पत्रकार से पलटकर पूछा — 'क्या आप भाजपा से हैं?' यह टिप्पणी 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च की हिंसा को लेकर जारी राजनीतिक तनाव को और गहरा करती है, जिसमें 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 31 जुलाई को संसद परिसर में एक पत्रकार से पूछा, 'क्या आप भाजपा से हैं?' — जब उनसे घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया माँगी गई।
20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च में हिंसा के बाद रिपोर्टों के अनुसार 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, कुछ गंभीर रूप से।
पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी पीड़ा साझा कर न्याय की माँग की और हिंसा के राजनीतिकरण पर सवाल उठाए।
BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पुलिसकर्मियों के मानवाधिकार और उनके परिवारों की पीड़ा को भी संवेदनशीलता से देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस और BJP दोनों 20 जुलाई की हिंसा को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 31 जुलाई को संसद परिसर में एक पत्रकार के सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'क्या आप भाजपा से हैं?' — यह सवाल तब उठाया गया जब पत्रकार ने 20 जुलाई के छात्र मार्च के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उनकी राय जाननी चाही। राहुल की यह प्रतिक्रिया उसी दिन आई जब पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा साझा कर न्याय की माँग की थी।

मुख्य घटनाक्रम

31 जुलाई को दिन में पहले, 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई झड़पों में घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें परिजनों ने उस दिन की आपबीती, घायल होने की परिस्थितियाँ और अपने परिवारों के लिए न्याय की माँग साझा की।

परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जो लोग हिंसा का राजनीतिकरण कर प्रदर्शनकारी समूहों के पक्ष में माहौल बना रहे हैं, वे पुलिसकर्मियों की तकलीफों को क्यों नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले तत्व भी उस दिन के प्रदर्शन में शामिल थे।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और विवाद

जब संसद परिसर में एक पत्रकार ने राहुल गांधी से उक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया माँगी, तो उन्होंने झुंझलाते हुए जवाब दिया, 'भैया, क्या आप भाजपा से हैं?' राहुल की इस टिप्पणी को आलोचकों ने घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के प्रति असंवेदनशील और उदासीन रवैये के रूप में देखा है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों 20 जुलाई की हिंसा को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।

BJP की प्रतिक्रिया

BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए विपक्षी नेताओं पर पुलिसकर्मियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'पुलिसकर्मियों पर हमला और उन्हें लगी चोटें ऐसा विषय है, जिस पर हमें संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उनके भी परिवार हैं, उनके भी बच्चे हैं और उनके भी मानवाधिकार हैं।'

प्रसाद ने यह भी कहा, 'हम युवाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन यदि ऐसे प्रदर्शनों के पीछे अपराधी तत्व शामिल हैं और वे पुलिसकर्मियों पर हमले में भी शामिल हैं, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।'

विपक्ष का पक्ष

एक प्रमुख विपक्षी नेता ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों पर हुई कथित बर्बरता से ध्यान हटाने के लिए पुलिस और छात्रों को आमने-सामने खड़ा करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का तर्क है कि जंतर-मंतर से संसद तक के शांतिपूर्ण मार्च को बलपूर्वक रोका गया।

20 जुलाई की हिंसा: पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, 'संसद चलो' मार्च के हिंसक हो जाने के बाद 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से जख्मी बताए गए। बताया गया है कि प्रदर्शनकारी समूहों की ओर से पथराव हुआ और उनमें कथित तौर पर असामाजिक तत्व भी शामिल थे। यह मामला अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन चुका है और संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी बहस छिड़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल पर पलटवार करना विपक्ष की संवेदनशीलता की छवि को कमज़ोर करता है। गौरतलब है कि विपक्ष का मूल तर्क — छात्रों पर बल प्रयोग — अपने आप में वैध हो सकता है, लेकिन इस तरह की प्रतिक्रिया उस तर्क को कमज़ोर कर BJP को आसान राजनीतिक ज़मीन दे देती है। 20 जुलाई की हिंसा में जहाँ दोनों पक्षों के दावे सत्यापन की माँग करते हैं, वहाँ मीडिया के सामने इस तरह का जवाब यह संदेश देता है कि नेता प्रतिपक्ष जवाबदेही से बचना चाहते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने पत्रकार से 'क्या आप BJP से हैं' क्यों कहा?
31 जुलाई को संसद परिसर में एक पत्रकार ने राहुल गांधी से 20 जुलाई के छात्र मार्च में घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया माँगी, जिस पर राहुल ने झुंझलाते हुए यह सवाल पलट दिया। आलोचकों ने इसे पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता माना है।
20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च में क्या हुआ था?
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए छात्र मार्च के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। रिपोर्टों के अनुसार इसमें 200 से अधिक दिल्ली पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से जख्मी बताए गए, और प्रदर्शनकारी समूहों की ओर से पथराव की बात कही गई।
पुलिसकर्मियों के परिवारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या माँग की?
परिजनों ने 31 जुलाई को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल पुलिसकर्मियों के लिए न्याय की माँग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हिंसा का राजनीतिकरण कर प्रदर्शनकारियों के पक्ष में माहौल बनाने वाले उनकी तकलीफों को क्यों नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
BJP ने इस मामले पर क्या कहा?
BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पुलिसकर्मियों के भी परिवार, बच्चे और मानवाधिकार हैं, और उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शनों में आपराधिक तत्व शामिल हों तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या है?
20 जुलाई की हिंसा को लेकर कांग्रेस और BJP दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। राहुल गांधी की टिप्पणी ने इस विवाद को और तेज़ कर दिया है, जिससे विपक्ष की 'छात्र-समर्थक' छवि और पुलिसकर्मियों के प्रति संवेदनशीलता दोनों सवालों के घेरे में आ गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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