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राजा टोडरमल भूलेख संस्थान को विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी, अनुपूरक बजट 2026-27 में ₹10 करोड़ का प्रावधान

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राजा टोडरमल भूलेख संस्थान को विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी, अनुपूरक बजट 2026-27 में ₹10 करोड़ का प्रावधान

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने हरदोई के राजा टोडरमल भूलेख प्रशिक्षण संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की दिशा में अनुपूरक बजट 2026-27 में ₹10 करोड़ का प्रावधान किया है। यह राजस्व प्रशिक्षण को उच्च शिक्षा के ढाँचे से जोड़ने का पहला बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान, हरदोई को विश्वविद्यालय बनाने के लिए ₹10 करोड़ का प्रावधान किया।
संस्थान उत्तर प्रदेश के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भूलेख, भूमि सर्वेक्षण और राजस्व कार्यों का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र है।
2017 में संस्थान में सैटेलाइट व कोऑर्डिनेट आधारित तकनीक से भूमि पैमाइश की शुरुआत की गई थी।
चकबंदी अधिकारियों के प्राविधिक प्रावधानों के लिए अलग से ₹1.46 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित।
विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने पर संस्थान भूमि प्रबंधन, जीआईएस और डिजिटल भूलेख में विशेष पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान, हरदोई को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश इस बजट में संस्थान के उन्नयन के लिए ₹10 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम राज्य में राजस्व एवं भूलेख प्रशिक्षण को उच्च शिक्षा के ढाँचे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव माना जा रहा है।

संस्थान की पृष्ठभूमि और महत्व

हरदोई जिले में स्थित राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान दशकों से उत्तर प्रदेश के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ भूलेख, भूमि सर्वेक्षण और राजस्व कार्यों से जुड़े व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाते हैं। गौरतलब है कि 2017 में इस संस्थान में आधुनिक तकनीक का समावेश करते हुए खेतों की सीमा और भूमि की पैमाइश के लिए सैटेलाइट व कोऑर्डिनेट आधारित तकनीक की शुरुआत की गई थी, जो उस समय राज्य में अपनी तरह का अग्रणी प्रयोग था।

अनुपूरक बजट में क्या शामिल है

प्रस्तावित ₹10 करोड़ की धनराशि संस्थान के भौतिक विस्तार, आधुनिक बुनियादी ढाँचे के निर्माण और प्रशिक्षण व्यवस्था को तकनीक-आधारित बनाने पर खर्च होने की उम्मीद है। इसके अलावा, अनुपूरक बजट में चकबंदी अधिकारियों के प्राविधिक प्रावधानों के लिए ₹1.46 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि का भी प्रस्ताव किया गया है। इस राशि से चकबंदी अधिकारियों के प्रशिक्षण, आवश्यक कार्यों और विभागीय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

विश्वविद्यालय बनने से क्या बदलेगा

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दे रही है। विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद संस्थान स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगा, जिससे भूलेख एवं राजस्व प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञ जनशक्ति तैयार होगी। इससे न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि अन्य राज्यों के राजस्व कर्मियों को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल सकता है।

आगे की राह

अनुपूरक बजट में प्रावधान के बाद अब संस्थान को विश्वविद्यालय घोषित करने की औपचारिक प्रक्रिया और विधायी स्वीकृति की आवश्यकता होगी। राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। भविष्य में यह संस्थान भूमि प्रबंधन, जीआईएस तकनीक और डिजिटल भूलेख के क्षेत्र में देश का एक विशिष्ट शैक्षणिक केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विश्वविद्यालय स्थापना की वास्तविक लागत इससे कहीं अधिक होगी — इसलिए यह राशि सांकेतिक है, निर्णायक नहीं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस संस्थान को केवल राजस्व कर्मियों के इन-हाउस प्रशिक्षण केंद्र से आगे ले जाकर एक स्वायत्त, अकादमिक रूप से मान्यता प्राप्त संस्थान बनाने की इच्छाशक्ति रखती है। भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और जीआईएस-आधारित सर्वेक्षण की बढ़ती माँग को देखते हुए, इस क्षेत्र में विशेषज्ञ जनशक्ति की ज़रूरत वास्तविक है — पर बिना स्पष्ट पाठ्यक्रम ढाँचे और UGC मान्यता की रोडमैप के, यह घोषणा अधूरी रह सकती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान क्या है?
यह हरदोई, उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्रमुख सरकारी प्रशिक्षण केंद्र है जो राज्य के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को भूलेख, भूमि सर्वेक्षण और राजस्व कार्यों का व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण देता है। 2017 में यहाँ सैटेलाइट व कोऑर्डिनेट आधारित भूमि पैमाइश तकनीक भी शुरू की गई थी।
अनुपूरक बजट 2026-27 में इस संस्थान के लिए कितना धन प्रस्तावित किया गया है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए ₹10 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की है। इसके अलावा चकबंदी अधिकारियों के प्रावधानों के लिए ₹1.46 करोड़ अलग से प्रस्तावित हैं।
संस्थान को विश्वविद्यालय बनाने से क्या फायदा होगा?
विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने पर संस्थान स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगा, जिससे भूलेख, जीआईएस तकनीक और डिजिटल राजस्व प्रबंधन में विशेषज्ञ जनशक्ति तैयार होगी। इससे प्रशिक्षण अधिक व्यापक, आधुनिक और तकनीक-आधारित बनेगा।
इस संस्थान में चकबंदी अधिकारियों के लिए क्या प्रावधान है?
अनुपूरक बजट में चकबंदी अधिकारियों के प्राविधिक प्रावधानों के लिए ₹1.46 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है। यह राशि उनके प्रशिक्षण, आवश्यक कार्यों और विभागीय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर खर्च होगी।
संस्थान को विश्वविद्यालय बनाने की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी?
अनुपूरक बजट में धनराशि के प्रावधान के बाद संस्थान को विश्वविद्यालय घोषित करने के लिए औपचारिक विधायी प्रक्रिया और सरकारी स्वीकृति आवश्यक होगी। रिपोर्टों के अनुसार, राजस्व विभाग इस दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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