राजस्थान में 24 जिलों के किसानों के लिए दिन में बिजली आपूर्ति की सुविधा, दौसा और करौली शामिल
सारांश
Key Takeaways
- दिन के समय बिजली आपूर्ति की सुविधा का विस्तार
- 24 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ
- 2027 तक सभी 50 जिलों को कवर करने का लक्ष्य
- जंगली जानवरों से होने वाले खतरों में कमी
- किसानों की जीवन गुणवत्ता में सुधार
जयपुर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को कृषि उपभोक्ताओं के लिए दिन के समय बिजली आपूर्ति की सुविधा का विस्तार दौसा और करौली तक करने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद राज्य में इस सुविधा का लाभ उठाने वाले जिलों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है।
राज्य सरकार की इस पहल के अंतर्गत, किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय दो स्लॉट में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी रात की बिजली पर निर्भरता कम हो रही है।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2024-25 के संशोधित बजट में बताए गए प्लान के अनुसार, 2027 तक राजस्थान के सभी 50 जिलों को चरणबद्ध तरीके से कवर करना है।
अब तक, 22 जिलों के किसानों को दिन में बिजली मिल रही थी। दौसा और करौली को शामिल करने के बाद यह दायरा 24 जिलों तक पहुंच गया है।
अभी, जयपुर डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले किसानों को धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग, भरतपुर, और अब दौसा और करौली में दिन के समय बिजली मिल रही है।
इसी तरह, अजमेर डिस्कॉम के अंतर्गत 12 जिले शामिल हैं: अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूंबर, राजसमंद, बांसवाड़ा, झुंझुनू, सीकर, चित्तौड़गढ़, और डूंगरपुर, जबकि जोधपुर डिस्कॉम के अंतर्गत यह सुविधा जालौर, सिरोही, और पाली में उपलब्ध है।
इस पहल के समर्थन के लिए, दौसा और करौली में बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है।
दौसा में, 18 नए 33 केवी सबस्टेशन बनाए गए हैं, और 47 सबस्टेशनों में ट्रांसफार्मर की क्षमता को 128.95 एमवीए तक बढ़ाया गया है।
करौली में, 6 नए 33 केवी सबस्टेशन बनाए गए हैं, और 15 सबस्टेशनों में क्षमता को 49.45 एमवीए तक बढ़ाया गया है।
इसके अलावा, पीएम-कुसुम योजना के तहत दोनों जिलों में कुल 32 मेगावाट क्षमता वाले 17 सोलर पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं।
इस पहल से दौसा के 52,460 किसानों और करौली के 35,341 किसानों को लाभ होगा, जिससे दिन के समय सिंचाई के लिए भरोसेमंद बिजली मिल सकेगी।
इस कदम से किसानों का बोझ कम होने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें रात में सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, खासकर खराब मौसम में। इसके साथ ही, जंगली जानवरों से होने वाले खतरों में भी कमी आएगी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।