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राजस्थान जन धन योजना में चौथे स्थान पर, ₹24,610 करोड़ जमा और 3.85 करोड़ से अधिक खाते

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राजस्थान जन धन योजना में चौथे स्थान पर, ₹24,610 करोड़ जमा और 3.85 करोड़ से अधिक खाते

सारांश

जमा राशि के मामले में राजस्थान देशभर में चौथे स्थान पर — ₹24,610 करोड़ से अधिक जमा और 3.85 करोड़ खाते। सबसे बड़ी बात: 57% खाते महिलाओं के, जो राष्ट्रीय औसत से भी ऊपर है। वित्तीय समावेशिता की यह तस्वीर बताती है कि योजना केवल संख्या नहीं, बदलाव भी ला रही है।

मुख्य बातें

राजस्थान जन धन खातों में कुल जमा राशि के मामले में देश में चौथे स्थान पर है।
राज्य में 3.85 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए हैं और जमा राशि ₹24,610 करोड़ को पार कर चुकी है।
कुल खातों में से 2.19 करोड़ से अधिक खाते महिलाओं के हैं, जो राज्य के सभी जन धन खातों का 57% है — राष्ट्रीय औसत 56% से अधिक।
राजस्थान में खाताधारकों को 2.87 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं।
28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए खातों पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर और ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध है।
पूरे भारत में पीएमजेडीवाई के तहत कुल जमा राशि ₹2.67 लाख करोड़ तक पहुँच गई है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के क्रियान्वयन में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। वित्त मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 3.85 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं और कुल जमा राशि ₹24,610 करोड़ को पार कर गई है, जिससे राजस्थान जमा राशि के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर आ गया है। यह आँकड़ा राज्य में औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के प्रति बढ़ते जन-विश्वास और वित्तीय समावेशिता की मज़बूत होती नींव को रेखांकित करता है।

महिलाएँ बनीं सबसे बड़ी लाभार्थी

राजस्थान में जन धन योजना की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि महिला भागीदारी के मोर्चे पर सामने आई है। कुल 3.85 करोड़ खातों में से 2.19 करोड़ से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जो राज्य के समस्त जन धन खातों का 57 प्रतिशत है। यह अनुपात 56 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है।

इन खातों ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी सब्सिडी, बीमा योजनाओं और पेंशन लाभों तक सीधी पहुँच दिलाई है। अधिकारियों के अनुसार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली के ज़रिए कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे इन्हीं खातों में पहुँचता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।

डिजिटल लेनदेन को मिला बल

राजस्थान में जन धन खाताधारकों को 2.87 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं, जो डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए खातों के धारक ₹2 लाख के दुर्घटना बीमा कवर और कैशलेस भुगतान सुविधाओं के पात्र हैं।

इसके अतिरिक्त, जीरो-बैलेंस बैंकिंग की सुविधा के साथ खाताधारक ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं। यह प्रावधान आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को आपातकालीन नकदी की ज़रूरत में औपचारिक बैंकिंग चैनल की ओर मोड़ने में सहायक रहा है।

राष्ट्रीय परिदृश्य में राजस्थान की स्थिति

समूचे भारत में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत कुल जमा राशि ₹2.67 लाख करोड़ तक पहुँच चुकी है, जो औपचारिक बैंकिंग में देशभर के नागरिकों की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है। इस राष्ट्रीय संदर्भ में राजस्थान का चौथा स्थान विशेष महत्त्व रखता है, क्योंकि राज्य की बड़ी ग्रामीण आबादी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए वित्तीय समावेशिता की यह गति उल्लेखनीय मानी जा रही है।

गौरतलब है कि यह योजना वर्ष 2014 में शुरू हुई थी और तब से लेकर अब तक राजस्थान में इसका विस्तार लगातार जारी है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता तेज़ी से बढ़ रही है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना ने बैंकिंग सेवाओं की पहुँच का विस्तार करके, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करके और लाखों लाभार्थियों तक कल्याणकारी लाभों का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करके राजस्थान में वित्तीय समावेशिता को काफ़ी मज़बूत किया है। आने वाले समय में इस योजना के दायरे को और विस्तृत करने की संभावना जताई जा रही है, ताकि अभी तक बैंकिंग से वंचित रहे सुदूर क्षेत्रों तक भी इसका लाभ पहुँचाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये खाते सक्रिय रूप से उपयोग हो रहे हैं या केवल डीबीटी के माध्यम के रूप में काम कर रहे हैं। महिला खाताधारकों का 57% अनुपात उत्साहजनक है, परंतु असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए बीमा और ओवरड्राफ्ट सुविधाओं की वास्तविक उपयोगिता अभी भी सीमित बताई जाती है। वित्तीय समावेशिता की सच्ची परीक्षा खाता खुलने से नहीं, बल्कि उसके नियमित और स्वतंत्र उपयोग से होती है — और इस पहलू पर सरकारी आँकड़े अभी पर्याप्त पारदर्शिता नहीं देते।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में प्रधानमंत्री जन धन योजना की स्थिति क्या है?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 3.85 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए हैं और कुल जमा राशि ₹24,610 करोड़ को पार कर गई है। जमा राशि के मामले में राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है।
राजस्थान में जन धन खातों में महिलाओं की भागीदारी कितनी है?
राजस्थान के कुल 3.85 करोड़ जन धन खातों में से 2.19 करोड़ से अधिक खाते महिलाओं के हैं, जो राज्य के सभी जन धन खातों का 57 प्रतिशत है। यह अनुपात 56 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
जन धन खाताधारकों को क्या-क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
जन धन खाताधारकों को जीरो-बैलेंस बैंकिंग, ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा और डीबीटी के ज़रिए सीधे सरकारी लाभ मिलते हैं। 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए खातों पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर और कैशलेस भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है।
राजस्थान में कितने रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं?
राजस्थान में जन धन खाताधारकों को 2.87 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। ये कार्ड डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और कैशलेस अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के उद्देश्य से दिए गए हैं।
पूरे भारत में जन धन योजना के तहत कुल कितनी राशि जमा है?
पूरे भारत में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत कुल जमा राशि ₹2.67 लाख करोड़ तक पहुँच गई है। यह आँकड़ा औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में देशभर के नागरिकों के बढ़ते विश्वास और वित्तीय भागीदारी को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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