राजस्थान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कुलपति डॉ. देवस्वरूप को हटाया, नियुक्तियों में अनियमितता साबित
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने 29 मई 2025 को बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रथम कुलपति तथा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। राज्य सरकार के परामर्श के बाद जारी यह आदेश एक उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई कथित प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आधार पर लिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कार्रवाई एक शिक्षाविद द्वारा दायर शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें राजस्थान विश्वविद्यालय में डॉ. देवस्वरूप के कुलपति कार्यकाल के दौरान की गई भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं और भेदभाव का आरोप लगाया गया था। शिकायत में दावा किया गया था कि चयन प्रक्रिया में कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया।
जांच समिति के निष्कर्ष
समिति ने भर्ती दस्तावेज़ों, साक्षात्कार मूल्यांकन पत्रकों और डॉ. देवस्वरूप के कार्यकाल के दौरान हुए चयन के अभिलेखों की विस्तृत जांच की। इसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों, आरक्षण नीतियों और स्थापित विश्वविद्यालय प्रक्रियाओं के अनुपालन की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर UGC नियमों एवं विश्वविद्यालय की स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मनमाने ढंग से नियुक्तियाँ किए जाने के साक्ष्य मिले। रिपोर्ट में आरक्षण नीतियों के पालन को लेकर भी चिंताएँ दर्ज की गईं। समिति ने यह रिपोर्ट राजभवन को सौंप दी, जिसके बाद अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू हुई।
राजभवन का आधिकारिक बयान
राजस्थान लोक भवन ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा: 'राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विश्वविद्यालय के नियमों और प्रावधानों को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से की गई नियुक्तियों में अनियमितताओं के मामले में कुलपति प्रोफेसर देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाने का आदेश जारी किया है। राज्य सरकार से परामर्श करने के बाद ये आदेश जारी किए गए हैं।'
आम जनता और शिक्षा जगत पर असर
यह निर्णय राजस्थान के उच्च शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही को लेकर एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। गौरतलब है कि बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए स्थापित किया गया है, और इसके प्रथम कुलपति पर इस तरह की कार्रवाई संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। शिक्षाविदों का मानना है कि UGC दिशानिर्देशों के उल्लंघन से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए पुनर्विचार की प्रक्रिया अब शुरू हो सकती है।
आगे क्या होगा
राजभवन द्वारा तत्काल हटाए जाने के बाद दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति पद के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया अपेक्षित है। यह भी देखा जाएगा कि क्या जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. देवस्वरूप के विरुद्ध कोई आगे की कानूनी या विभागीय कार्रवाई होती है। राजस्थान सरकार और राजभवन की यह संयुक्त कार्रवाई राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा का संकेत दे सकती है।