13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कुलपति डॉ. देवस्वरूप को हटाया, नियुक्तियों में अनियमितता साबित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कुलपति डॉ. देवस्वरूप को हटाया, नियुक्तियों में अनियमितता साबित

सारांश

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उच्च स्तरीय जांच में UGC नियमों की अनदेखी और मनमाने ढंग से नियुक्तियों के साक्ष्य मिलने के बाद कुलपति डॉ. देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया। यह कार्रवाई राज्य सरकार के परामर्श से की गई है।

मुख्य बातें

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने 29 मई 2025 को कुलपति प्रो.
(डॉ.) देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने का आदेश जारी किया।
देवस्वरूप बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रथम कुलपति और विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति थे।
भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुई।
जांच में कथित तौर पर UGC नियमों , आरक्षण नीतियों और विश्वविद्यालय प्रक्रियाओं के उल्लंघन के साक्ष्य मिले।
यह कार्रवाई राजस्थान सरकार के परामर्श से की गई; एक शिक्षाविद की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई थी।

राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने 29 मई 2025 को बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रथम कुलपति तथा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। राज्य सरकार के परामर्श के बाद जारी यह आदेश एक उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई कथित प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आधार पर लिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई एक शिक्षाविद द्वारा दायर शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें राजस्थान विश्वविद्यालय में डॉ. देवस्वरूप के कुलपति कार्यकाल के दौरान की गई भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं और भेदभाव का आरोप लगाया गया था। शिकायत में दावा किया गया था कि चयन प्रक्रिया में कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया।

जांच समिति के निष्कर्ष

समिति ने भर्ती दस्तावेज़ों, साक्षात्कार मूल्यांकन पत्रकों और डॉ. देवस्वरूप के कार्यकाल के दौरान हुए चयन के अभिलेखों की विस्तृत जांच की। इसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों, आरक्षण नीतियों और स्थापित विश्वविद्यालय प्रक्रियाओं के अनुपालन की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर UGC नियमों एवं विश्वविद्यालय की स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मनमाने ढंग से नियुक्तियाँ किए जाने के साक्ष्य मिले। रिपोर्ट में आरक्षण नीतियों के पालन को लेकर भी चिंताएँ दर्ज की गईं। समिति ने यह रिपोर्ट राजभवन को सौंप दी, जिसके बाद अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू हुई।

राजभवन का आधिकारिक बयान

राजस्थान लोक भवन ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा: 'राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विश्वविद्यालय के नियमों और प्रावधानों को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से की गई नियुक्तियों में अनियमितताओं के मामले में कुलपति प्रोफेसर देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाने का आदेश जारी किया है। राज्य सरकार से परामर्श करने के बाद ये आदेश जारी किए गए हैं।'

आम जनता और शिक्षा जगत पर असर

यह निर्णय राजस्थान के उच्च शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही को लेकर एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। गौरतलब है कि बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के लिए स्थापित किया गया है, और इसके प्रथम कुलपति पर इस तरह की कार्रवाई संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। शिक्षाविदों का मानना है कि UGC दिशानिर्देशों के उल्लंघन से प्रभावित उम्मीदवारों के लिए पुनर्विचार की प्रक्रिया अब शुरू हो सकती है।

आगे क्या होगा

राजभवन द्वारा तत्काल हटाए जाने के बाद दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति पद के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया अपेक्षित है। यह भी देखा जाएगा कि क्या जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. देवस्वरूप के विरुद्ध कोई आगे की कानूनी या विभागीय कार्रवाई होती है। राजस्थान सरकार और राजभवन की यह संयुक्त कार्रवाई राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा का संकेत दे सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान के राज्यपाल ने कुलपति डॉ. देवस्वरूप को क्यों हटाया?
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने UGC नियमों और विश्वविद्यालय प्रक्रियाओं की अनदेखी कर मनमाने ढंग से नियुक्तियाँ करने की कथित अनियमितताओं के चलते डॉ. देवस्वरूप को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया। यह कार्रवाई उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट और राज्य सरकार के परामर्श के बाद की गई।
जांच समिति का गठन किसने और कैसे किया?
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। यह समिति एक शिक्षाविद की शिकायत के बाद बनाई गई थी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
डॉ. देवस्वरूप कौन-से विश्वविद्यालयों में पदस्थ थे?
डॉ. देवस्वरूप बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रथम कुलपति और विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वे राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं, जहाँ की नियुक्तियाँ जांच के दायरे में आई हैं।
जांच में क्या अनियमितताएँ पाई गईं?
जांच समिति को कथित तौर पर भर्ती दस्तावेज़ों और साक्षात्कार अभिलेखों में UGC दिशानिर्देशों, आरक्षण नीतियों और विश्वविद्यालय की स्थापित प्रक्रियाओं के उल्लंघन के साक्ष्य मिले। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए प्रक्रियाएँ दरकिनार की गईं।
इस बर्खास्तगी के बाद आगे क्या होगा?
दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति पद के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया अपेक्षित है। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर डॉ. देवस्वरूप के विरुद्ध आगे की विभागीय या कानूनी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले