14 जुलाई 2026
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राजस्थान सरकार ने हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा वापस ली, RLP प्रमुख बोले — 'कभी माँगी ही नहीं थी'

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राजस्थान सरकार ने हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा वापस ली, RLP प्रमुख बोले — 'कभी माँगी ही नहीं थी'

सारांश

राजस्थान सरकार ने RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल के तीन PSO हटाए — बेनीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा माँगी ही नहीं। BJP-RLP गठबंधन में दरार के संकेत और तेज़ हुए।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने 29 मई 2026 को नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े तीन PSO वापस बुलाए।
बेनीवाल के अनुसार, पहले कुल आठ सुरक्षाकर्मी तैनात थे — चार जयपुर से, चार नागौर से; जयपुर दल AK-47 से लैस था।
सुरक्षा व्यवस्था SI भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान तत्कालीन खुफिया अधिकारी संजय अग्रवाल ने कराई थी।
बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा की माँग नहीं की और राजस्थान भर के हज़ारों युवा उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं।
उन्होंने सरकार पर ईद और साधु-आंदोलन के दौरान जानबूझकर तनाव भड़काने का आरोप लगाया।
BJP-RLP गठबंधन में दरार के संकेत, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं।

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में कटौती कर दी, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और RLP के बीच पहले से चले आ रहे तनाव के और गहरा होने के संकेत मिल रहे हैं। जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े तीन निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को वापस बुला लिया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्यौरा

बेनीवाल के अनुसार, यह सुरक्षा व्यवस्था तत्कालीन खुफिया अधिकारी संजय अग्रवाल ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान मुहैया कराई थी। उन्होंने बताया कि जयपुर से AK-47 राइफलों से लैस कमांडो और नागौर से अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।

कुल आठ सुरक्षाकर्मी तैनात थे — चार जयपुर से और चार नागौर से। इनमें से दो आवास पर, दो विश्राम ड्यूटी पर और चार हर समय उनके साथ रहते थे। उन्हें बताया गया था कि उन्होंने रेत माफिया और पेपर-लीक गिरोहों सहित कई प्रभावशाली समूहों को चुनौती दी है।

बेनीवाल की तीखी प्रतिक्रिया

सुरक्षा हटाए जाने पर बेनीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा की माँग नहीं की थी और राजस्थान भर के हज़ारों युवा उनकी रक्षा के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि पहले सुरक्षा किस आधार पर दी गई और अब किस आधार पर वापस ली गई।

उन्होंने भजनलाल सरकार पर आरोप लगाया कि वह जान-बूझकर जयपुर में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनाना चाहती थी।

साधुओं के आंदोलन और सांप्रदायिक सद्भाव का दावा

बेनीवाल ने धार्मिक संन्यासियों (साधुओं) के समर्थन में हुए एक आंदोलन का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार चाहती थी कि वे जयपुर में प्रवेश करें ताकि प्रदर्शनकारियों के साथ उन्हें भी हिरासत में लिया जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईद समारोह के दौरान कुछ तत्वों ने माहौल बिगाड़ने और उन्हें विवाद में घसीटने की कोशिश की।

हालाँकि, बेनीवाल ने दावा किया कि उन्होंने संयम बरता और सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित किया। यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में आए हैं जब BJP-RLP गठबंधन में दरार की चर्चाएँ लगातार तेज़ हो रही हैं।

BJP-RLP तनाव की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हनुमान बेनीवाल की RLP राजस्थान में BJP की सहयोगी रही है, लेकिन हाल के महीनों में दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। सुरक्षा वापस लेने का यह कदम राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है, यद्यपि सरकार की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या BJP और RLP के बीच यह तनाव गठबंधन की राजनीति को प्रभावित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जिस राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह हुआ है वह इसे महज़ रूटीन नहीं रहने देती। BJP-RLP गठबंधन में खटास पहले से दिख रही थी; सुरक्षा कटौती उस खटास को सार्वजनिक मंच पर ले आई है। बेनीवाल का 'हज़ारों युवा काफी हैं' वाला बयान जनाधार की राजनीति का क्लासिक उदाहरण है — सरकार के कदम को कमज़ोरी की बजाय ताकत के रूप में पेश करना। असली सवाल यह है कि क्या भजनलाल सरकार ने इस कदम के राजनीतिक परिणामों का आकलन किया था, क्योंकि राजस्थान में जाट मतदाताओं के बीच बेनीवाल की पकड़ को नज़रअंदाज़ करना BJP के लिए महंगा साबित हो सकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान सरकार ने हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा क्यों वापस ली?
सरकार ने जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े तीन PSO को 29 मई 2026 को वापस बुला लिया। सरकार की ओर से कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है; बेनीवाल ने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति करार दिया है।
हनुमान बेनीवाल को पहले कितनी सुरक्षा दी गई थी?
बेनीवाल के अनुसार, SI भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान कुल आठ सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे — चार जयपुर से (AK-47 से लैस कमांडो सहित) और चार नागौर से। दो आवास पर, दो विश्राम ड्यूटी पर और चार हर समय उनके साथ रहते थे।
BJP और RLP के बीच तनाव की वजह क्या है?
दोनों दल राजस्थान में गठबंधन सहयोगी हैं, लेकिन हाल के महीनों में कई मुद्दों पर मतभेद सार्वजनिक हुए हैं। सुरक्षा वापसी का यह कदम उस तनाव का नवीनतम उदाहरण माना जा रहा है।
बेनीवाल ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
बेनीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने साधु-आंदोलन के दौरान उन्हें जयपुर बुलाकर हिरासत में लेने की कोशिश की और ईद के दौरान माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि उनके संयम से सांप्रदायिक सद्भाव बना रहा।
क्या बेनीवाल ने खुद सुरक्षा माँगी थी?
नहीं। बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी सुरक्षा की माँग नहीं की थी। यह व्यवस्था तत्कालीन खुफिया अधिकारी संजय अग्रवाल ने SI भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान अपनी पहल पर कराई थी।
राष्ट्र प्रेस
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