राजस्थान सरकार ने हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा वापस ली, RLP प्रमुख बोले — 'कभी माँगी ही नहीं थी'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में कटौती कर दी, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और RLP के बीच पहले से चले आ रहे तनाव के और गहरा होने के संकेत मिल रहे हैं। जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े तीन निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को वापस बुला लिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्यौरा
बेनीवाल के अनुसार, यह सुरक्षा व्यवस्था तत्कालीन खुफिया अधिकारी संजय अग्रवाल ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान मुहैया कराई थी। उन्होंने बताया कि जयपुर से AK-47 राइफलों से लैस कमांडो और नागौर से अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
कुल आठ सुरक्षाकर्मी तैनात थे — चार जयपुर से और चार नागौर से। इनमें से दो आवास पर, दो विश्राम ड्यूटी पर और चार हर समय उनके साथ रहते थे। उन्हें बताया गया था कि उन्होंने रेत माफिया और पेपर-लीक गिरोहों सहित कई प्रभावशाली समूहों को चुनौती दी है।
बेनीवाल की तीखी प्रतिक्रिया
सुरक्षा हटाए जाने पर बेनीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सुरक्षा की माँग नहीं की थी और राजस्थान भर के हज़ारों युवा उनकी रक्षा के लिए पर्याप्त हैं। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि पहले सुरक्षा किस आधार पर दी गई और अब किस आधार पर वापस ली गई।
उन्होंने भजनलाल सरकार पर आरोप लगाया कि वह जान-बूझकर जयपुर में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनाना चाहती थी।
साधुओं के आंदोलन और सांप्रदायिक सद्भाव का दावा
बेनीवाल ने धार्मिक संन्यासियों (साधुओं) के समर्थन में हुए एक आंदोलन का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार चाहती थी कि वे जयपुर में प्रवेश करें ताकि प्रदर्शनकारियों के साथ उन्हें भी हिरासत में लिया जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईद समारोह के दौरान कुछ तत्वों ने माहौल बिगाड़ने और उन्हें विवाद में घसीटने की कोशिश की।
हालाँकि, बेनीवाल ने दावा किया कि उन्होंने संयम बरता और सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित किया। यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में आए हैं जब BJP-RLP गठबंधन में दरार की चर्चाएँ लगातार तेज़ हो रही हैं।
BJP-RLP तनाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हनुमान बेनीवाल की RLP राजस्थान में BJP की सहयोगी रही है, लेकिन हाल के महीनों में दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। सुरक्षा वापस लेने का यह कदम राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है, यद्यपि सरकार की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या BJP और RLP के बीच यह तनाव गठबंधन की राजनीति को प्रभावित करता है।