UP राजभवन में 51 कलाकारों को मिलेगा सम्मान, विशिष्ट श्रेणी में शामिल होंगे, ₹70 हज़ार तक मानदेय
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार 5 जून को लखनऊ स्थित राजभवन के गांधी सभागार में संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोककलाओं से जुड़े 51 प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित करेगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इन कलाकारों को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, सफदर हाशमी पुरस्कार और बी.एम. शाह पुरस्कार से अलंकृत करेंगी। सम्मानित कलाकारों को संस्कृति विभाग की ‘विशिष्ट श्रेणी’ में शामिल किया जाएगा और विभागीय प्रस्तुतियों पर उन्हें ₹70 हज़ार तक का मानदेय मिलेगा।
समारोह का प्रारूप और पुरस्कारों का दायरा
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को पर्यटन भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 2021 से 2024 तक के लंबित अकादमी पुरस्कारों का वितरण एक साथ किया जाएगा। इनमें शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, वादन, नृत्य, नाट्य लेखन, रंगमंच निर्देशन, अभिनय और तकनीकी विधाओं से जुड़े कलाकार शामिल हैं।
रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सफदर हाशमी और बी.एम. शाह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अकादमी विगत छह दशकों से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।
क्यों है यह सम्मान महत्वपूर्ण
जयवीर सिंह के अनुसार वर्ष 1970-71 से अब तक 510 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। इस सम्मान से विभूषित कई कलाकार बाद में पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से भी अलंकृत हो चुके हैं। यह पुरस्कार राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मान्यताओं में गिना जाता है।
कलाकारों का आर्थिक सशक्तीकरण
मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्कृति विभाग द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों को लगभग ₹14 करोड़ का भुगतान किया गया है। वर्तमान में विभाग के पोर्टल पर लगभग 17 हज़ार कलाकार पंजीकृत हैं, जिन्हें मंच और मानदेय दोनों उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
नई पीढ़ी तक पहुँच और लोककला संरक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत ग्रीष्मकालीन कार्यशालाएँ संचालित की जा रही हैं। नवोदित प्रतिभाओं को मंच देने के लिए ‘नवांकुर योजना’ चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से युवा कलाकारों को प्रदर्शन के अवसर मिल रहे हैं।
गौरतलब है कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नियमित सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं। विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुकी लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए विशेष योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, ताकि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और सशक्त हो सके।
आगे क्या
5 जून को राजभवन में होने वाले समारोह के बाद ‘विशिष्ट श्रेणी’ में शामिल कलाकार विभागीय कार्यक्रमों में बढ़े हुए मानदेय पर प्रस्तुति दे सकेंगे, जिससे राज्य की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।