राहुल गांधी की बातें सोचने योग्य होती हैं, योगी पहले खुद झाँकें: कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने 21 सितंबर 2026 को रांची में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राहुल गांधी पर दिए गए बयान, असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन संबंधी इशारे और अन्य राजनीतिक विवादों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ठाकुर ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और योगी आदित्यनाथ को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए।
योगी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राहुल गांधी पर दिए गए बयान के जवाब में राजेश ठाकुर ने कहा, 'तीर बिल्कुल निशाने पर लगी है।' उन्होंने कहा कि योगी महिला सम्मान की बात करते हैं, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री से यह पूछना चाहिए कि उन्होंने घरों की महिलाओं को कितना सम्मान दिया है।
ठाकुर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जो कर रहे हैं, वही राहुल गांधी पहले ही करके दिखा चुके हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 'प्रधानमंत्री किसी से जबरदस्ती गले मिलें, वो ठीक है क्या?' उनका जोर इस बात पर था कि राहुल गांधी की ओर से जब भी कोई बात कही जाती है, उस पर विचार किया जाना चाहिए।
ओवैसी के गठबंधन संकेत पर प्रतिक्रिया
असदुद्दीन ओवैसी द्वारा गठबंधन को लेकर दिए गए इशारे पर राजेश ठाकुर ने कहा कि कौन किससे गठबंधन करेगा, यह संबंधित दलों का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, 'दोनों दल मिलकर क्या तय करेंगे, समय आने पर इसका जवाब दिया जाएगा।' इस बयान को राजनीतिक पर्यवेक्षक संभावित भावी समीकरणों की ओर सतर्क संकेत के रूप में देख रहे हैं।
हामिद अंसारी और योगी के बयान पर तीखी टिप्पणी
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर ठाकुर ने कहा कि योगी की बातों को 'ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहिए।' उन्होंने कहा कि एक राज्य के मुख्यमंत्री को पहले अपने पद की गरिमा समझनी चाहिए और फिर दूसरों को गरिमा का पाठ पढ़ाना चाहिए। ठाकुर के शब्दों में, 'योगी आदित्यनाथ को अपने गिरेबान में झाँकने की ज्यादा जरूरत है।'
ओम प्रकाश राजभर के बयान पर कांग्रेस की राय
ओम प्रकाश राजभर के बयान को लेकर ठाकुर ने कहा कि इसका उत्तर दत्तात्रेय होसबले को देना चाहिए, क्योंकि उनके और उनके मंत्रियों के बयानों में विरोधाभास दिखता है। ठाकुर ने तंज किया, 'ज्यादा बेहतर यह है कि वे लोग आपस में फैसला कर लें कि जाति का जहर कौन फैला रहा है?'
यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों और विपक्षी एकता को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच इस तरह के वाक्युद्ध आने वाले चुनावी माहौल की परिचायक बनते जा रही हैं।