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पूर्व CM राजिंदर कौर भट्टल के खिलाफ बठिंडा कोर्ट में अर्जी, 'बम ब्लास्ट प्रपोजल' बयान पर विवाद

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पूर्व CM राजिंदर कौर भट्टल के खिलाफ बठिंडा कोर्ट में अर्जी, 'बम ब्लास्ट प्रपोजल' बयान पर विवाद

सारांश

पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल का 'बम ब्लास्ट प्रपोजल' वाला बयान अब अदालत तक पहुँच गया है। बठिंडा के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन लाल झुंबा ने पुलिस की निष्क्रियता के बाद कोर्ट में याचिका दाखिल की है। 18 जुलाई को सुनवाई तय है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार में दावा किया था कि उन्हें सत्ता में वापसी के लिए 'बम ब्लास्ट' का सहारा लेने का प्रस्ताव मिला था।
बठिंडा के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन लाल झुंबा ने पहले बठिंडा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, कार्रवाई न होने पर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया।
अधिवक्ता संजीव गुप्ता ने BNS की धारा 352 और 353 के तहत भट्टल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की है।
बठिंडा अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 18 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बयान से जनता में भय और अविश्वास का वातावरण पैदा हुआ है।

पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री बीबी राजिंदर कौर भट्टल के एक विवादास्पद बयान को लेकर कानूनी पेचीदगियाँ बढ़ती जा रही हैं। बठिंडा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन मोहन लाल झुंबा ने 12 जून 2026 को उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बठिंडा की अदालत में याचिका दाखिल की है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।

विवादित बयान क्या था

कुछ महीने पहले एक निजी टेलीविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में राजिंदर कौर भट्टल ने दावा किया था कि जब वे पंजाब की मुख्यमंत्री थीं, तब कुछ अधिकारियों ने उन्हें सुझाव दिया था कि राज्य का माहौल बिगाड़कर — अर्थात् 'बम ब्लास्ट' का सहारा लेकर — उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आ सकती है। भट्टल के अनुसार, उन्होंने उस प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी।

पुलिस की निष्क्रियता के बाद अदालत का दरवाज़ा

मोहन लाल झुंबा ने बताया कि उन्होंने पहले बठिंडा पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी और माँग की थी कि पूर्व मुख्यमंत्री के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाए। परंतु पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर वे अदालत की शरण में गए। उनके अनुसार, यह बयान न केवल राजनीतिक नेताओं में जनता के विश्वास को कमज़ोर करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि वे अधिकारी आज भी कहीं भी ऐसा कदम उठाकर पंजाब की शांति भंग कर सकते हैं।

कानूनी आधार

झुंबा के अधिवक्ता संजीव गुप्ता ने कहा कि किसी जिम्मेदार सार्वजनिक हस्ती द्वारा इस प्रकार का बयान समाज में भय और अस्थिरता उत्पन्न कर सकता है तथा राज्य की सार्वजनिक शांति को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 और 353 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत में दाखिल याचिका में संबंधित पुलिस अधिकारियों से भट्टल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।

आगे क्या होगा

इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई 2026 को निर्धारित है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बयानबाज़ी को लेकर पहले से संवेदनशीलता बनी हुई है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री के बयान ने राज्य में कानूनी विवाद को जन्म दिया हो। अदालत के फैसले पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे उन्होंने स्वयं उजागर किया परंतु उस समय सार्वजनिक नहीं किया। सवाल यह है कि यदि ऐसा प्रस्ताव वाकई आया था, तो उसकी जाँच तब क्यों नहीं हुई? अब जब यह बयान सार्वजनिक हो चुका है, तो पुलिस की प्रारंभिक निष्क्रियता भी उतनी ही जाँच की माँग करती है जितनी स्वयं बयान की। अदालत का हस्तक्षेप इस बात की पुष्टि करता है कि संस्थागत जवाबदेही के लिए नागरिकों को न्यायपालिका का दरवाज़ा खटखटाना पड़ रहा है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजिंदर कौर भट्टल का विवादित बयान क्या था?
पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल ने एक निजी टेलीविज़न चैनल के साक्षात्कार में दावा किया था कि जब वे पंजाब की मुख्यमंत्री थीं, तब कुछ अधिकारियों ने उन्हें 'बम ब्लास्ट' के ज़रिए राज्य का माहौल बिगाड़कर सरकार दोबारा बनाने का प्रस्ताव दिया था। उनके अनुसार, उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर अधिकारियों को फटकार लगाई थी।
बठिंडा कोर्ट में याचिका किसने और क्यों दाखिल की?
बठिंडा के सामाजिक कार्यकर्ता और मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन मोहन लाल झुंबा ने यह याचिका दाखिल की है। उन्होंने पहले बठिंडा पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वे 12 जून 2026 को अदालत पहुँचे।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संजीव गुप्ता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 और 353 के तहत भट्टल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की है। उनका तर्क है कि इस प्रकार का बयान समाज में भय और अस्थिरता उत्पन्न करता है तथा राज्य की शांति भंग कर सकता है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
बठिंडा की अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 18 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है। उस दिन अदालत संबंधित पुलिस अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने पर विचार करेगी।
इस विवाद का पंजाब की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बयान से आम जनता का राजनीतिक नेताओं पर विश्वास कम हुआ है और यह संकेत मिलता है कि संबंधित अधिकारी आज भी सक्रिय हो सकते हैं। यह मामला पंजाब में राजनीतिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को एक बार फिर केंद्र में ला सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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