पूर्व CM राजिंदर कौर भट्टल के खिलाफ बठिंडा कोर्ट में अर्जी, 'बम ब्लास्ट प्रपोजल' बयान पर विवाद
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री बीबी राजिंदर कौर भट्टल के एक विवादास्पद बयान को लेकर कानूनी पेचीदगियाँ बढ़ती जा रही हैं। बठिंडा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन मोहन लाल झुंबा ने 12 जून 2026 को उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बठिंडा की अदालत में याचिका दाखिल की है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
विवादित बयान क्या था
कुछ महीने पहले एक निजी टेलीविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में राजिंदर कौर भट्टल ने दावा किया था कि जब वे पंजाब की मुख्यमंत्री थीं, तब कुछ अधिकारियों ने उन्हें सुझाव दिया था कि राज्य का माहौल बिगाड़कर — अर्थात् 'बम ब्लास्ट' का सहारा लेकर — उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आ सकती है। भट्टल के अनुसार, उन्होंने उस प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी।
पुलिस की निष्क्रियता के बाद अदालत का दरवाज़ा
मोहन लाल झुंबा ने बताया कि उन्होंने पहले बठिंडा पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी और माँग की थी कि पूर्व मुख्यमंत्री के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाए। परंतु पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर वे अदालत की शरण में गए। उनके अनुसार, यह बयान न केवल राजनीतिक नेताओं में जनता के विश्वास को कमज़ोर करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि वे अधिकारी आज भी कहीं भी ऐसा कदम उठाकर पंजाब की शांति भंग कर सकते हैं।
कानूनी आधार
झुंबा के अधिवक्ता संजीव गुप्ता ने कहा कि किसी जिम्मेदार सार्वजनिक हस्ती द्वारा इस प्रकार का बयान समाज में भय और अस्थिरता उत्पन्न कर सकता है तथा राज्य की सार्वजनिक शांति को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 और 353 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत में दाखिल याचिका में संबंधित पुलिस अधिकारियों से भट्टल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई 2026 को निर्धारित है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बयानबाज़ी को लेकर पहले से संवेदनशीलता बनी हुई है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री के बयान ने राज्य में कानूनी विवाद को जन्म दिया हो। अदालत के फैसले पर सभी की नज़रें टिकी हैं।