राजीव रंजन: ममता बनर्जी को नैतिकता के मानदंडों का सम्मान करना चाहिए
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने ममता बनर्जी को कठघरे में खड़ा किया है।
- राजीव रंजन ने नैतिकता के मानदंडों का पालन करने की सलाह दी है।
- 60%25 मुफ्त सीटों का निर्णय यात्रियों के लिए राहत है।
- पश्चिम बंगाल में भाजपा की ओर रुझान बढ़ रहा है।
- लोग अब बदलाव के मूड में हैं।
पटना, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में ममता बनर्जी के बारे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और हवाई यात्रा में 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने के आदेश पर अपनी राय व्यक्त की।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हस्तक्षेप 'सकारात्मक स्थिति नहीं' है। केंद्रीय एजेंसी के कार्य में बाधा डालने पर इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
राजीव रंजन ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ममता बनर्जी के लंबे कार्यकाल में उनके खिलाफ इस तरह की गंभीर टिप्पणियां अभूतपूर्व हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी की कार्रवाई में मुख्यमंत्री की उपस्थिति और पश्चिम बंगाल सरकार का हस्तक्षेप दोनों ही अनुचित थे। ममता बनर्जी के पास कई वैकल्पिक रास्ते थे, लेकिन उन्हें सीधा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।"
उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी को सत्ता की लालसा में नैतिकता के मानदंडों को ध्वस्त करने से बचना चाहिए। डीजीसीए के '60 प्रतिशत सीटें मुफ्त आवंटित करने' के निर्देश पर राजीव रंजन ने कहा, "यह हवाई यात्रियों के लिए एक सुखद समाचार है। यह निर्णय निश्चित रूप से बढ़ती कीमतों से परेशान यात्रियों को राहत देगा। यह एक सराहनीय कदम है।"
राजीव रंजन ने टीएमसी सरकार पर भी टिप्पणी की और कहा, "अब लोग बदलाव की मांग कर रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी की ओर देख रहे हैं। यदि केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार बनती है, तो इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, औद्योगिक इकाइयां खुलेंगी और लोगों के जीवन में खुशहाली आएगी। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से कई उद्योग बंद पड़े हैं, जिससे लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है, और अब जनता बदलाव के मूड में है।"