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सेल्फ स्टडी से नीट में शामली की द्राक्षा ने पाई AIR 16,632, राजमिस्त्री पिता की बेटी का डॉक्टर बनने का सपना होगा पूरा

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सेल्फ स्टडी से नीट में शामली की द्राक्षा ने पाई AIR 16,632, राजमिस्त्री पिता की बेटी का डॉक्टर बनने का सपना होगा पूरा

सारांश

शामली के एक राजमिस्त्री की बेटी द्राक्षा ने महंगी कोचिंग के बिना, केवल सेल्फ स्टडी और इंटरनेट के सहारे नीट में AIR 16,632 हासिल की। यह कहानी सिर्फ एक रैंक की नहीं — यह उस संकल्प की है जो आर्थिक तंगी को भी परास्त कर देता है।

मुख्य बातें

द्राक्षा ने शामली के सोंटा रसूलपुर गांव से नीट में ऑल इंडिया रैंक 16,632 हासिल की।
किसी महंगी कोचिंग संस्था की मदद के बिना, केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन सामग्री से तैयारी की।
प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन 13 से 14 घंटे पढ़ाई; बाद में लक्ष्य-आधारित रणनीति अपनाई।
पिता रागिब राजमिस्त्री हैं; सीमित आय के बावजूद परिवार ने बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी।
नीट रैंक के आधार पर चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है।

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के सोंटा रसूलपुर गांव की छात्रा द्राक्षा ने बिना किसी महंगी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री के बल पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में ऑल इंडिया रैंक 16,632 हासिल की है। 17 जुलाई को सामने आई यह उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है जो आर्थिक बाधाओं के बीच चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखते हैं। थानाभवन क्षेत्र की इस बेटी ने साबित किया है कि संसाधनों की कमी संकल्प को नहीं रोक सकती।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

द्राक्षा के पिता रागिब पेशे से राजमिस्त्री हैं। परिवार की सीमित आय के कारण महंगी कोचिंग संस्थाओं की फीस वहन करना संभव नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने बेटी की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और किसी भी कीमत पर उसकी पढ़ाई बाधित नहीं होने दी। साधारण पारिवारिक परिवेश में पली-बढ़ी द्राक्षा ने कठिन परिस्थितियों को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया।

तैयारी की रणनीति

महंगी कोचिंग का विकल्प न होने पर द्राक्षा ने इंटरनेट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री को अपना हथियार बनाया। प्रारंभिक चरण में उन्होंने प्रतिदिन 13 से 14 घंटे तक पढ़ाई की। बाद में उन्होंने समय-केंद्रित अध्ययन की जगह लक्ष्य-आधारित तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, 'जो लक्ष्य तय किया था, परिणाम भी उसी के अनुरूप मिला।' यह दृष्टिकोण उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है जो कोचिंग के बिना प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

परिवार का समर्थन

द्राक्षा ने बताया कि उनके पिता की कड़ी मेहनत ने उन्हें सदा प्रेरित किया। उनके शब्दों में, 'मेरे पिता राजमिस्त्री हैं और उन्होंने हमेशा कड़ी मेहनत की है। उन्हें संघर्ष करते देखकर मुझे भी मेहनत करने और अपने लक्ष्य तक पहुँचने की प्रेरणा मिली।' द्राक्षा की माँ ने बताया कि उनकी बेटी शुरू से पढ़ाई में होनहार रही है और परिवार ने हरसंभव प्रयास किया कि उसकी पढ़ाई निरंतर जारी रहे।

डॉक्टर बनने की राह

द्राक्षा ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव विज्ञान विषय की ओर था और डॉक्टरों का कार्य उन्हें सदा प्रेरित करता था। उन्होंने कहा, 'मुझे बचपन से डॉक्टर बनने की इच्छा थी। दूसरे पेशे भी अच्छे हैं, लेकिन मुझे हमेशा डॉक्टरों का काम प्रेरित करता था।' नीट में यह रैंक हासिल कर अब वे चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की दिशा में अग्रसर हैं और उनका डॉक्टर बनने का सपना साकार होने के करीब है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या महंगी कोचिंग तक पहुँच को? लाखों रुपये की फीस वाले कोचिंग उद्योग के बीच एक राजमिस्त्री की बेटी का इंटरनेट के सहारे शीर्ष रैंक हासिल करना यह संकेत देता है कि सार्वजनिक डिजिटल शिक्षा संसाधनों में निवेश का असर ज़मीन पर दिखने लगा है। फिर भी, यह अपवाद है — नियम नहीं। जब तक गुणवत्तापूर्ण तैयारी संसाधन समान रूप से सुलभ नहीं होते, ऐसी प्रेरणादायक कहानियाँ व्यवस्थागत असमानता को ढकने का काम भी करती हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शामली की द्राक्षा ने नीट में कौन सी रैंक हासिल की?
द्राक्षा ने नीट में ऑल इंडिया रैंक 16,632 हासिल की। उन्होंने यह उपलब्धि बिना किसी महंगी कोचिंग के, केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री के दम पर प्राप्त की।
द्राक्षा ने नीट की तैयारी कैसे की?
द्राक्षा ने इंटरनेट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का उपयोग किया। शुरुआत में वे प्रतिदिन 13 से 14 घंटे पढ़ती थीं और बाद में लक्ष्य-आधारित तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।
द्राक्षा के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है?
द्राक्षा के पिता रागिब पेशे से राजमिस्त्री हैं और परिवार की आय सीमित है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद परिवार ने बेटी की शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी।
क्या बिना कोचिंग के नीट पास करना संभव है?
द्राक्षा का उदाहरण दर्शाता है कि सही रणनीति, लगन और ऑनलाइन संसाधनों के उपयोग से बिना महंगी कोचिंग के भी नीट में अच्छी रैंक हासिल की जा सकती है। हालांकि, यह प्रत्येक विद्यार्थी की मेहनत और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
द्राक्षा आगे क्या करेंगी?
नीट में AIR 16,632 हासिल करने के बाद द्राक्षा चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया में आगे बढ़ रही हैं। बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली द्राक्षा का लक्ष्य अब साकार होने की राह पर है।
राष्ट्र प्रेस
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